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हिन्दी व्याकरण से महत्वपूर्ण प्रश्न

हिन्दी व्याकरण से महत्वपूर्ण प्रश्न  प्रश्‍न 1- जिन शब्दों के अन्त में ‘अ’ आता है, उन्हें क्या कहते है। उत्‍तर – अकारांत कहते है। प्रश्‍न 2- हिन्दी वर्ण माला में अयोगवाह वर्ण कौन से है। उत्‍तर – अं , अ: वर्ण अयोगवाह वर्ण है । प्रश्‍न 3- हंस मे लगा ( ं ) चिन्ह कहलाता है। उत्‍तर – अनुस्वार प्रश्‍न 4- चॉद शब्द‍ में लगा ( ँ ) चिन्ह कहलाता है। उत्‍तर – अनुनासिक । प्रश्‍न 5- भाषा की सबसे छोटी इकाई क्या है। उत्‍तर – वर्ण । प्रश्‍न 6- जिन शब्दों में किसी प्रकार का विकार या परिवर्तन नही होता, उसे क्या कहते है। उत्‍तर – तत्सम । प्रश्‍न 7- कार्य के होने का बोध कराने वाले शब्द को क्या् कहते है। उत्‍तर – क्रिया कहते है। प्रश्‍न 8- भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान किससे होता है। उत्‍तर – व्याकरण से होता है। प्रश्‍न 9- विशेषण जिस शब्द की विशेषता बताते है, उसे क्या कहते है। उत्‍तर – विशेष्ये । प्रश्‍न 10- हिन्दी में लिंग का निर्धारण किस से होता है। उत्‍तर – संज्ञा से । प्रश्‍न 11- क्रिया का मूल रूप क्या् कहलाता है। उत्‍तर – धातु । प्रश्‍न 12- सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाली विभक्तियॉं होती है। उत्‍तर ...

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के ‘अरूंधती’ महाकाव्य में स्त्री विमर्श

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के  ‘अरूंधती’ महाकाव्य में स्त्री विमर्श   “ बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।। अमिय मूरिमय चूरन चारु। समन सकल भव रुज परिवारू।।" जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी के चरण-कमलों की धूल की बंदना करता हूं।जो सुगंध स्वाद से भरपूर है, और जन्म - मृत्यु के सभी रोगों को नाश करने वाली संजीवनी बूटी के समान है। जगद्गुरु जी का 77 वें जन्मदिन  दिवस पर उनके श्री चरणों में कोटि-कोटि नमन। प्रथम अध्याय - प्रस्तावना  क-  जगतगुरु रामभद्राचार्य आचार्य जी का  साहित्यिक परिचय  ख-  एक प्रज्ञाचक्षु रचनाकार के रूप में उनकी विलक्षणता  ग-  महाकाव्य की परंपरा और अरुंधती संस्कृति और हिंदी महाकाव्य की        पृष्ठभूमि  घ-   अरुंधती का स्थान ङ-    शोध की प्रासंगिकता  च-  आधुनिक युग में इस महाकाव्य के अध्ययन की आवश्यकता द्वितीय अध्याय- क-  अरुंधती का कथानक और पात्र परिकल्पना  ख-कथानक के आधार पौराणिक संदर्भ और जगतगुरु द्वारा किया गया मौलिक नवाचार  ग- पात्र  परिचय अर...