सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दिसंबर 3, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्रौंचवध(प्रथम से तृतीय सर्ग तक) क्रमशः

क्रौच-वध प्रथम-सर्ग था भीषण वन प्रान्त,तुमुल तम शासन करता। हिंस्त्र जन्तु-खघोर,सभी में मै था भरता। कहीं-कहीं थे मार्ग,बने अटवी के भीतर। भूले-भटके लोग, भयातुल चलते जिस पर ॥१॥ ...