कुछ पंक्तियां नफरतों के शहर में चालाकियों के डेरे हैं, यहाँ वो लोग रहते हैं...जो तेरे मुंह पर तेरे, मेरे मुंह पर मेरे हैं। ****। *******। ***** यहां दरख्तों साए में धूप खिलती है , चलो यहां से चले उम्र भर के लिए।। कहा तो तय था चिराग हर एक घर के लिए , कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए।। अज्ञान में सफाई है और हिम्मत है, उसके दिल और जुबान में पर्दा नहीं होता, ना कथनी और करनी में। क्या यह अफसोस की बात नहीं, ज्ञान अज्ञान के आगे सिर झुकाए? अन्याय को बढ़ाने वाले कम अन्यायी नहीं। आत्म सम्मान की रक्षा, हमारा सबसे पहला धर्म है। इंसान सब हैं पर इंसानियत विरलों में मिलती है। क्रांति बैठे-ठालों का खेल नहीं है। वह नई सभ्यता को जन्म देती है। ख्याति-प्रेम वह प्यास है जो कभी नहीं बुझती। वह अगस्त ऋषि की भांति सागर को पीकर भी शांत नहीं होती। जब दूसरों क...
साहित्य प्रेमियों, साहित्य के साधक और साहित्य का अध्ययन करने वाले सभी बंधुओं को यह ब्लॉग समर्पित है।🙏🙏