जीवन- वृत्त —------------------- नाम :- प्रोफेसर (डॉक्टर)मिथिलेश कुमार त्रिपाठी माता का नाम :- स्व०धनदेई पिता का नाम :- श्री रामबरन त्रिपाठी विवाहित/अविवाहित:-विवाहित(विधुर) जन्मतिथि :- 4 मार्च 1964 ई० जन्म स्थान :- (उत्तर प्रदेश) स्थायी पता :- ग्राम :- दहेंव पोस्ट :- बालवरगंज(सुजानगंज) जिला :- जौनपुर पिन कोड :- 222201 (उ प्र) जन्म-जनपद :- जौनपुर शिक्षा :-1 1- एम ए (हिन्दी) इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 2-पी-एच०डी(हिन्दी) शीर्षक:- मानस की आध्यात्मिक भूमिका काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी 3-पीजीडीजेएमसी(पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म ऐण्ड मास कम्युनिकेशन)उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 4-डीएचईएन(डिप्लोमा इन हेल्थ एजुकेशन ऐण्ड न्यूट्रेशन)उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद अभिरुचि :- अध्ययन-अध्यापन,लेखन, जन-सेवा, साहित्यिक -सामाजिक-सांस्कृतिक-धार्मिक-आध्यात्मिक आदि मंचों पर व्याख्यान, जिज्ञासु बुद्धिजीवियों के लिए उनकी जिज्ञासा के समाधानार्थ दिशा- निर्देशन, तत्वचिन्तन- मनन,कृषि,बागव...
नवम सर्ग अहो अद्भुत यह माया लोक, दिखायी देता है अभिराम । इसी में जन्म-मरण का चक्रो जी चल रहा निशिछंच-वासर अविराम ॥ सृष्टि में मात्र मनुज गतिमान, किन्तु शिशु सा प्रायः नादान । किया करता त्रुटियों दिन-रात, ऊ और खो देता निज प्रतिनिधि ऊसम्मान ।। यही लगता कुछ ऐसे लोग, है जिन्हे भौतिक सुख से वैराग। मनुज वे नहीं अपितु है देव, स्ववैभव का भी करते त्याग ॥ उन्हीं देवी पुरुषों में एक, मधुर व्यवहार यशस्वी वीर। बाह्य तन वज्र हृदय नवनीत, मुदित मुद्रा प्रायः गम्भीर लिया जिसने विपत्ति को मोल, छेड़ कर अंग्रेजों से जंग। हो रहे जन्म भूमि उनमुक्त, मिटा दे वैरी के सब रंग ।। कौन वह मानवता की मूर्ति, मनोयोगों का जो सम्राट। शत्रुओं था जो का काल कराल । जगत से न्यारी जिसकी बार ॥ वही है नेता वीर सुभाष, हिन्द-पतझर का जो मधुमास । तपन में शीतल मन्द फुहार, तुमुल तम में जो दिव्य प्रकाश ॥ शीत लहरी में भानु समान । धरित्री घर फैला कर-पाश। हरण कर लेता ठिठुरन शीघ्र, अहो अनुपम यह दिव्य प्रकाश ॥ जहाँ प...