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वाणी वन्दना

वाणी वन्दना अंतरात्मा की पुकार श्री राम बरन त्रिपाठी के मुक्तक काव्य में संग्रहित मातु शारदे ! वरदे वीणा को कुछ समय के लिए एक ओर धर दे , मातु शारदे! वरदे! कृषकों के कुदाल खुरपी पर , अम्ब फेर अपने सशक्त कर , श्रमिक वर्ग में नवल तेज भर , फिर सुसिप्त उनकी अम्बे हर।। रग-रग में जन -जन में मात अनुपम  स्वर भर दें । मातु शारदे! वरदे!... चपल अंगुलियां फेर तार पर । तन्तुवाय में नवल शक्ति भर दें, नव शिशुओं में नव विकास कर , ध्वनि अम्ब कर चक्र सुघर घर।। वीणा नवल बजे भारत में कुछ ऐसा कर दें।। मातु शारदे! वरदे!... भारत के वीरों में जाकर मां सास्त्तास्तों में  प्रलयंकर भर दें ओज अपूर्व प्रखर तर , जिससे कांपे अरि दल थर-थर, दिग्विजयी निज पुत्रों को पावन वर दें , मातु शारदे! वरदे!

महावीरोदय कान्वेंट स्कूल

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महावीरोदय कान्वेंट स्कूल भगवानपुर बाबूगंज जौनपुर

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सुभाष चन्द्रिका

द्वितीय सर्ग एक दिवस अध्ययन काल में, धधक उठी अन्तस की ज्वाला। जब अंग्रेजी प्राध्यापक ने, प्रस्तुत किया-वाक् विष प्याला ।। सुन अपशब्द विदेशी-मुख से, भारत माता के प्रति बोला। हिन्द केसरी मौन त्याग कर, उत्तेजित हो निज मुँह खोला ।। "रे निर्लज्ज ! जलाशय में रह, क्यों विद्रोह मगर से करता? भूल गया वे दिन जब आया, भीख मांगने पैरों पड़ता ।। "चुप नादान गुलाम देश के, बड़ी बात छोटे मुँह करते।। हो कर के भी दास मूर्ख तुम, क्यों उतनी शेखी बघारते ।। “यदि जाने अनजाने कुत्ते, घुस जाते है घर के भीतर। तो दुर-दुर कर हम निकालते, उनको बाहर पीट-पीट कर ।। चोरी कर सीना जोरी भी, रे ओटम! तू क्यों है करता। नाक रगड़ चिल्लू भर पानी- में पर-धन से जीवन भरता ।। समय-समय पर यदि हमको, आता नागों को दूध पिलाना। तो कुचाल अवलोक जानते, वदन कुचल परलोक पठाना ।। एक शब्द भी इसके आगे, यदि कोई भी अब जो निकला। जीभ खींच बाहर कर दूंगा, फल इसका मैं दूंगा दिखला ।। तुम्हें पता क्या नहीं? दास हो, क्या कर्तव्य दास का होता? धृष्ट गुलाम हाथ स्वामी के, हाथ स्व प्राणों से है धोता ।। ओटन साहब! क्षमा कीजिए, भूल हो गयी मुझसे भारी। मैने पह...

सुभाष चन्द्रिका (महाकाव्य)

सुभाष चंद्रिका            प्रथम सर्ग  शर्वरी थी अति भयानी, व्योग ज्यो॔ अंजन बरसता।  छा गयी निस्तब्धता थी, लुप्त भूतल की सरसता” घोर सन्नाटा चतुर्दिक, सनसनाता तिमिर तक्षक। विष भयंकर वमन करता- बढ़ रहा ज्यों रात्रि-रक्षक “ तमस का साम्राज्य मानो, हर दिशा थी मुँह छुपाये।  कर पसारे भी न सूझे,  कौन किसको पथ दिखाये।। छिप रहे तारे व्यथित उर, तिमिर घन आतंक से डर। कौमुदी अपनी समेटे, छिप गया निर्मल निशाकर " कभी रह-रह स्यार उल्लू के भयंकर शब्द होते। सुन सजग मानव भयातुर, विवश साहस धैर्य खोते ॥ कभी झींगुर झिल्लियों के, परुष स्वर देते सुनायी। साथ ही रीवें इन्हीं के, ध्वान्त को देते बधाई ।। निशिचरों का बोल-बाला, मनुज-कुल आँसू बहाता । स्वप्र के संसार में भी, तिमिर सागर में नहाता ॥ सिद्धि-दात्री! सिद्धि दो माँ ! मैं अकिञ्चन शरण आया। परम पावन चरण-रज दो, और अपनी मृदुल छाया" चाहता मति मन्द मैं- सामर्थ्य से भी अधिक पाना। ज्यों उडुप से मूढ़ चाहे, सिन्धु के उस पार जाना ॥ किन्तु मातः ! वर तुम्हारा, डूबते का हो सहारा। पार कर सकता सहज ही, सिन्धु तो क्या गगन सारा " ध...

डॉ मिथिलेश कुमार त्रिपाठी जीवन वृत्त

जीवन- वृत्त —------------------- नाम :- प्रोफेसर (डॉक्टर)मिथिलेश कुमार त्रिपाठी माता का नाम :- स्व०धनदेई पिता का नाम :- श्री रामबरन त्रिपाठी विवाहित/अविवाहित:-विवाहित(विधुर) जन्मतिथि :- 4 मार्च 1964 ई० जन्म स्थान :-  (उत्तर प्रदेश) स्थायी पता :- ग्राम :-  दहेंव पोस्ट :- बालवरगंज(सुजानगंज) जिला :- जौनपुर पिन कोड :- 222201 (उ प्र) जन्म-जनपद :- जौनपुर शिक्षा :-1 1- एम ए (हिन्दी) इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 2-पी-एच०डी(हिन्दी) शीर्षक:- मानस की आध्यात्मिक भूमिका काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी 3-पीजीडीजेएमसी(पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन जर्नलिज्म ऐण्ड मास कम्युनिकेशन)उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 4-डीएचईएन(डिप्लोमा इन हेल्थ एजुकेशन ऐण्ड न्यूट्रेशन)उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद अभिरुचि :- अध्ययन-अध्यापन,लेखन, जन-सेवा, साहित्यिक -सामाजिक-सांस्कृतिक-धार्मिक-आध्यात्मिक आदि मंचों पर व्याख्यान, जिज्ञासु बुद्धिजीवियों के लिए उनकी जिज्ञासा के समाधानार्थ दिशा- निर्देशन, तत्वचिन्तन- मनन,कृषि,बागव...

हिन्दी साहित्य से महत्वपूर्ण प्रश्न

(1) ” पद्मावत् ” कथा के लेखक हैं = मलिक मुहम्मद जायसी (2) ” युगवाणी ” के लेखक के = सुमित्रानंदन पंत (3) ” सूरसागर ” के रचयिता है = सूरदास (4) ” सतसई ” के रचनाकार है = बिहारी (5) ” प्रियप्रवास ” के लेखक हैं = अयोध्या सिंह उपाध्याय (6) ” यशोधरा ” पुस्तक के रचनाकार है = मैथिलीशरण गुप्त (7) ” भारत भारती ” के लेखक कौन है = मैथिलीशरण गुप्त (8) ” कामायनी ” की रचना किसने की = जयशंकर प्रसाद ने (9) ” जय पराजय ” के लेखक के = उपेन्द्रनाथ अश्क (10) ” चंद्रकांता संतति ” किसकी कृति है = देवकीनन्दन खत्री के (11) ” गोदान ” एवं ” गबन ” प्रसिद्ध पुस्तक के लेखक कौन है = मुन्शी प्रेमचंद (12) ” गोरा ” प्रसिद्ध उपन्यास है = रविन्द्र नाथ टैगोर की (13) ” मृगनयनी ” के लेखक कौन है = वृन्दावनलाल वर्मा (14) ” भारत दुर्दशा ” के रचनाकार है = भारतेन्दु हरिश्चंद्र (15) ” मैला आंचल ” किसकी कृति है = फणीश्वरनाथ रेणु के (16) ” गणदेवता ” किसकी रचना है = ताराशंकर बंधोपाध्याय के (17) ” चरित्रहीन ” किसकी रचना है = शरदचन्द्र चटर्जी के (18) मुगल शहजादी में से किसने प्रसिद्ध पुस्तक ” हुमायूँनामा ” लिखा = गुलबदन बेगम ने (19) ” च...