यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य महाप्राण निराला द्वारा रचित "रामकी शक्ति पूजा" रवि हुआ अस्त; ज्योति के पत्र पर लिखा अमर रह गया राम-रावण का अपराजेय समर आज का तीक्ष्ण शर-विधृत-क्षिप्रकर, वेग-प्रखर, शतशेलसम्वरणशील, नील नभगर्ज्जित-स्वर, प्रतिपल – परिवर्तित – व्यूह – भेद कौशल समूह राक्षस – विरुद्ध प्रत्यूह,-क्रुद्ध – कपि विषम हूह, विच्छुरित वह्नि – राजीवनयन – हतलक्ष्य – बाण, लोहितलोचन – रावण मदमोचन – महीयान, राघव-लाघव – रावण – वारण – गत – युग्म – प्रहर, उद्धत – लंकापति मर्दित – कपि – दल-बल – विस्तर, अनिमेष – राम-विश्वजिद्दिव्य – शर – भंग – भाव, विद्धांग-बद्ध – कोदण्ड – मुष्टि – खर – रुधिर – स्राव, रावण – प्रहार – दुर्वार – विकल वानर – दल – बल, मुर्छित – सुग्रीवांगद – भीषण – गवाक्ष – गय – नल, वारित – सौमित्र – भल्लपति – अगणित – मल्ल – रोध, गर्ज्जित – प्रलयाब्धि – क्षुब्ध हनुमत् – केवल प्रबोध, उद्गीरित – वह्नि – भीम – पर्वत – कपि चतुःप्रहर, जानकी – भीरू – उर – आशा भर – रावण सम्वर। लौटे युग – दल – राक्षस – पदतल पृथ्वी टलमल, बिंध महोल्लास से बार – बार आकाश विकल। वानर वाहिनी खिन्न, ल...
साहित्य प्रेमियों, साहित्य के साधक और साहित्य का अध्ययन करने वाले सभी बंधुओं को यह ब्लॉग समर्पित है।🙏🙏