बुधवार, 28 फ़रवरी 2024

हिन्दी व्याकरण से महत्वपूर्ण प्रश्न 


प्रश्‍न 1- जिन शब्दों के अन्त में ‘अ’ आता है, उन्हें क्या कहते है।
उत्‍तर – अकारांत कहते है।

प्रश्‍न 2- हिन्दी वर्ण माला में अयोगवाह वर्ण कौन से है।
उत्‍तर – अं , अ: वर्ण अयोगवाह वर्ण है ।

प्रश्‍न 3- हंस मे लगा ( ं ) चिन्ह कहलाता है।
उत्‍तर – अनुस्वार

प्रश्‍न 4- चॉद शब्द‍ में लगा ( ँ ) चिन्ह कहलाता है।
उत्‍तर – अनुनासिक ।

प्रश्‍न 5- भाषा की सबसे छोटी इकाई क्या है।
उत्‍तर – वर्ण ।

प्रश्‍न 6- जिन शब्दों में किसी प्रकार का विकार या परिवर्तन नही होता, उसे क्या कहते है।
उत्‍तर – तत्सम ।

प्रश्‍न 7- कार्य के होने का बोध कराने वाले शब्द को क्या् कहते है।
उत्‍तर – क्रिया कहते है।

प्रश्‍न 8- भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान किससे होता है।
उत्‍तर – व्याकरण से होता है।

प्रश्‍न 9- विशेषण जिस शब्द की विशेषता बताते है, उसे क्या कहते है।
उत्‍तर – विशेष्ये ।

प्रश्‍न 10- हिन्दी में लिंग का निर्धारण किस से होता है।
उत्‍तर – संज्ञा से ।

प्रश्‍न 11- क्रिया का मूल रूप क्या् कहलाता है।
उत्‍तर – धातु ।

प्रश्‍न 12- सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाली विभक्तियॉं होती है।
उत्‍तर – संश्लिष्ट ।

प्रश्‍न 13- हिन्दी में कारक चिन्ह कितने होते है।
उत्‍तर – 8 होते है।
जबकि संस्कृत भाषा में कारक चिन्ह 7 होते है।

प्रश्‍न 14- संज्ञा कितने प्रकार की होती है।
उत्‍तर – संज्ञा 5 प्रकार की होती है।
1. व्यवक्ति वाचक संज्ञा
2. जाति वाचक संज्ञा
3. भाव वाचक संज्ञा
4. समूह वाचक संज्ञा
5. द्वव्या वाचक संज्ञा

प्रश्‍न 15- वे शब्द‍ जो विशेषण की भी विशेषता बतलाते है। उन्हे क्या कहते है।
उत्‍तर – प्रविशेषण ।

प्रश्‍न 16- सर्वनाम किसे कहते है।
उत्‍तर – सर्वनाम वे शब्द कहलाते है। जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग मे लाये जाते है।
जैसे – यह , वह , वे , उनका , इनका , इन्हे आदि

प्रश्‍न 17- सर्वनाम के कितने भेद होते है।
उत्‍तर – सर्वनाम के 6 भेद होते है।
1. पुरूषवाचक सर्वनाम
2. निश्चवयवाचक सर्वनाम
3. अनिश्चायवाचक सर्वनाम
4. प्रश्नावाचक सर्वनाम
5. संबंधवाचक सर्वनाम
6. निजवाचक सर्वनाम

प्रश्‍न 18- क्रिया किसे कहते है।
उत्‍तर – जिस शब्द – से किसी काम के करने या होने का बोध हो उसे क्रिया कहते है।
जैसे – खाना , हँसना , रोना , बैठना आदि

प्रश्‍न 19- क्रिया मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती है।
उत्‍तर – मुख्य रूप से क्रिया 2 प्रकार की होती है।
1. अकर्मक क्रिया
2. सकर्मक क्रिया

प्रश्‍न 20- काल कितने प्रकार के होते है।
उत्‍तर – काल 3 प्रकार के होते है।
1. वर्तमान काल
2. भूतकाल
3. भविष्य काल

प्रश्‍न 21- ‘श’ व्‍यंजन का उच्‍चारण स्‍थान कौन सा है।
उत्‍तर – तालु ।

प्रश्‍न 22- ‘व’ वर्ण का उच्‍चारण स्‍थान कौन सा है ।
उत्‍तर – दन्‍त + ओष्‍ठ ।

प्रश्‍न 23- ‘ड.’ का उच्‍चारण स्‍थान क्‍या है।
उत्‍तर – कण्‍ठ ।

प्रश्‍न 24- ‘क’ वर्ण उच्‍चारण की दृष्टि से क्‍या है।
उत्‍तर – कंठ्य ।

प्रश्‍न 25- वर्ग के द्वितीय व चतुर्थ व्‍यंजन क्‍या कहलाते है।
उत्‍तर – महाप्राण ।

प्रश्‍न 26- ‘ए’ और ‘ऐ’ का उच्‍चारण स्‍थान है।
उत्‍तर – कंठतालु ।

प्रश्‍न 27- ‘घ’ का उच्‍चारण स्‍थान क्‍या है
उत्‍तर – कंठ ।

प्रश्‍न 28- वर्ण के प्रथम, तृतीय व पंचम वर्ण क्‍या कहलाते है।
उत्‍तर – अल्‍पप्राण ।

प्रश्‍न 29- मात्रा के आधार पर हिन्‍दी स्‍वरों के दो भेद कौन से है।
उत्‍तर – हस्‍व और दीर्घ ।

प्रश्‍न 30- सर्वनाम के साथ प्रयुक्‍त्‍ा होने वाली विभक्तियॉ होती है ।
उत्‍तर – संश्लिष्‍ट ।

प्रश्‍न 31- ‘शिक्षक विद्यार्थी को हिन्‍दी पढ़ाते है। वाक्‍य में क्रिया के किस रूप का प्रयोग हुआ है।
उत्‍तर – द्विकर्मक क्रिया ।

प्रश्‍न 32- ‘मुझे’ किस प्रकार का सर्वनाम है।
उत्‍तर – उत्‍तम पुरूष ।

प्रश्‍न 33- मानव शब्‍द का विशेषण बनेगा ।
उत्‍तर – मानवीय ।

प्रश्‍न 34- चिडि़या आकाश में उड़ रही है। उस वाक्‍य में उड़ रही क्रिया किस प्रकार की है।
उत्‍तर – अकर्मक ।

प्रश्‍न 35- पशु शब्‍द का विशेषण है।
उत्‍तर – पाशविक ।

प्रश्‍न 36- नेत्री शब्‍द का पुल्लिंग रूप है।
उत्‍तर – नेता ।

प्रश्‍न 37- उत्‍कर्ष का विशेषण क्‍या होगा ।
उत्‍तर – उत्‍कृष्‍ट ।

प्रश्‍न 38- काम का तत्‍सम रूप है।
उत्‍तर – कर्म ।

प्रश्‍न 39- दूध का तत्‍सम रूप क्‍या है।
उत्‍तर – दुग्‍ध ।

प्रश्‍न 40- प वर्ग का उच्‍चारण मुँह के किस भाग से होता है।
उत्‍तर – ओष्‍ठ ।

 हिन्दी साहित्य विषय - काव्य 
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1 काव्य के तत्व माने गए है - 
दो
2 महाकाव्य के उदाहरण है - 
रामचरित मानस, रामायण, साकेत, महाभारत, पदमावत, कामायनी, उर्वशी, लोकायतन, एकलव्य आदि
3 मुक्तक काव्य के उदाहरण है- 
मीरा के पद, रमैनियां, सप्तशति
4 काव्य कहते है - 
दोष रहित, सगुण एवं रमणियार्थ प्रतिपादक युगल रचना को
5 काव्य के तत्व है - 
भाषा तत्व, बुध्दि या विचार तत्व, कल्पना तत्व और शैली तत्व

6 काव्य के भेद है - 
प्रबंध (महाकाव्य और खण्ड काव्य), मुक्तक काव्य
7 वामन ने काव्य प्रयोजन माना -
दृष्ट प्रयोजन (प्रीति आनंद की प्राप्ति) अदृष्ट प्राप्ति (कीर्ति प्राप्ति)
8 भामह की काव्य परिभाषा है - 
शब्दार्थो सहित काव्यम
9 प्रबंध काव्य का शाब्दिक अर्थ है - 
प्रकृष्ठ या विशिष्ट रूप से बंधा हुआ।
10 रसात्मक वाक्यम काव्यम परिभाषा है - 
पंडित जगन्नाथ का

11 काव्य के कला पक्ष में निहित होती है - 
भाषा
12 काव्य में आत्मा की तरह माना गया है- 
रस
13 तद्दोषों शब्दार्थो सगुणावनलंकृति पुन: क्वापि, परिभाषा है -
मम्मट की
14 काव्य के तत्व विभक्त किए गए है- 
चार वर्गो में प्रमुखतया रस, शब्द
15 कवि दण्डी ने काव्य के भेद माने है- 
तीन

16 रमणियार्थ प्रतिपादक शब्द काव्यम की परिभाषा दी है - 
आचार्य जगन्नाथ ने
17 काव्य रूपों में दृश्य काव्य है - 
नाटक
18 काव्य प्रयोजन की दृष्टि से मत सर्वमान्य है - 
मम्मटाचार्य का
19 काव्य प्रयोजनों में प्रमुख माना जाता है।
आनंदानुभूति का
20 काव्य रचना का प्रमुख कारण (हेतु) है - 
प्रतिभा का

21 महाकाव्य और खण्ड काव्य में समान लक्षण है - 
कथानक उपास्थापन एक जैसा होता है।
22 काव्य रचना के सहायक तत्व है - 
वर्ण्य विषय(भाव), अभिव्यक्ति पक्ष (कला), आत्म पक्ष
23 मम्मट के काव्य प्रयोजन है - 
यश, अर्थ, व्यवहार ज्ञान, शिवेतरक्षति, संघ पर निवृति, कांता सम्मलित
24 मम्मट के शिवेतर का अभिप्राय है –
अनिष्ट
25 सगुणालंकरण सहित दोष सहित जो होई... परिभाषा है - 
चिंतामणि की

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प्रसिद्ध पंक्तियां

कवियों एवं लेखको की प्रसिद्ध पंक्तियां 


०1. ’तोडने ही होंगे मठ और गढ सब’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– मुक्तिबोध
०2. ’द्रुत झरो जगत के जीर्णपत्र’ पंक्ति के रचनाकार
कौन हैं?
उत्तर——– सुमित्रानन्दन पन्त
०3. ’उत्तर प्रियदर्शी’किसकी गीति-नाट्य
रचना है?
उत्तर——– अज्ञेय
०4. ’केसव कहि न जाइका कहिए! देखत तब
रचना बिचित्र अति,समुझि मनहि मन रहिए!’
किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– तुलसीदास
०5. ’रावरे रूपको रीति अनूप,
नयो नयो लागतज्यों ज्यों निहारिये’ -किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– घनानन्द

०6. प्रसिद्ध हिन्दी पत्रिका ’कल्पना’ कहॉं से प्रकाशित
होती थी?
उत्तर——– हैदराबाद
०7. ’कोमल गांधार’ नाटक के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर——– शंकर शेष
०8. ’मुक्ति का रहस्य’नाटक किसकी कृति है?
उत्तर——– लक्ष्मीनारायण मिश्र
०10. ’हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’
किसकी कृति है?
उत्तर——– गणपतिचन्द्र गुप्त

०11. ’हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक
इतिहास’ के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर——– डॉ0 रामकुमार वर्मा
०12. ’हिन्दी साहित्य की संवेदना का विकास’
किसकी रचना है?
उत्तर——-
रामस्वरूप चतुर्वेदी
०13. ’कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ जिससे उथल पुथल मच
जाए’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– बालकृष्ण शर्मा नवीन
०14. मध्यवाचार्य किस सम्प्रदाय के संस्थापक हैं?
उत्तर——– द्वैतवाद
०15. किन रचनाकारों की भाषा को
संधा भाषा कहा गया?
उत्तर——– बौद्ध-सिद्ध

०16. ’धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध
’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– निराला
०17. ’दुःखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी’
किसकी कहानी है?
उत्तर——– चतुरसेन शास्त्री
०18. ’मधुप गुनगुना कर कह जाता’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– जयशंकर प्रसाद
०19. ’मर्द साठे पर पाठे होते हैं।’ किसकी उक्ति है?
उत्तर——– प्रेमचंद
०20. ’ये उपमान मैले हो गये हैं’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– अज्ञेय
यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य
०21. ’हम राज्य लिये मरते हैं’ किसकी काव्य-पंक्ति है?
उत्तर——– मैथिलशरण गुप्त
०22. ’हिन्दी व्याकरण’ किसकी रचना है?
उत्तर——– कामताप्रसाद गुरु
०23.’हिन्दी शब्दानुशासन’ किसने लिखा है?
उत्तर——– किशोरीदास वाजपेई
०24.’हिन्दी भाषा का उद्भव और विकास’ किसकी रचना है?
उत्तर——– उदय नारायण तिवारी
०25. ’देवीदीन’ मुंशी प्रेमचन्द के किस
उपन्यास का पात्र है?
उत्तर——– गबन

०26. ’प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म’ किसका ग्रन्थ है?
उत्तर——– रिचर्ड्स
०27. ’सेक्रेड वुड’ किसकी रचना है?
उत्तर——– टी.एस. इलियट
०28. ’लिरिकल बैलेडस’ किसने लिखा है?
उत्तर——– विलियम वर्ड्सवर्थ
०29. ’पोयटिक्स’ किसकी कृति है?
उत्तर——– अरस्तू
०30. ’जात पांत पूछै नहिं कोई’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– रामानन्द
०31. ’प्रेम प्रेम ते होय प्रेम ते पारहिं पइए’ पंक्ति के
रचनाकार कौन हैं?
उत्तर——– सूरदास
०32. ’आधुनिक काल में गद्य का आविर्भाव सबसे प्रधान
घटना है’ किसका कथन है?
उत्तर——– आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
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सोमवार, 26 फ़रवरी 2024

'अन्तरात्मा की पुकार' एक विवेचन


'अन्तरात्मा की पुकार' एक विवेचन 

                                               आलोक मणि त्रिपाठी 
                                                       प्रवक्ता हिन्दी 
                                     पं यज्ञनारायण दूबे स्मारक पी.जी.
                                                 कॉलेज प्रयागराज


कवि और उसके काव्य का विवेचन और मूल्यांकन कई स्तरो पर किया जा सकता है और यह भी सच है कि विभिन्न समयों और युग-प्रवृत्तियो के प्रभाव से उक्त विवेचन और मूल्यांकन परिर्वतन भी होते रहते हैं। परन्तु इन अनिवार्य परिवर्तनों के रहते हुए भी कवि की मूल वस्तु के स्वरूप और उसके स्वरूप और उसके काव्योत्कर्ष के सम्बन्ध में कुछ स्थाई और अपरिवर्तनीय धारणाएं भी रहा करती है। इन धारणाओं की पुष्टि करना आवश्यक होता है अन्यथा किसी भी कवि के सम्बन्ध में राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का स्थिरीकरण नहीं हो पाता है।
पंडित श्री राम बरन त्रिपाठी का जन्म 7-जुलाई-1938 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सुजानगंज ब्लॉक में दहेव ग्राम में हुआ था। पं त्रिपाठी जी की माता का नाम स्वर्गीय श्री मती इसराजी देवी और पिता का नाम स्वर्गीय श्री लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी था। जब त्रिपाठी जी की आयु दस वर्ष थी तभी इनके पिता की मृत्यु हो गई। पंडित श्री लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अपने पीछे दो पुत्रियां और एक पुत्र को छोड़ कर इस लोक से विदा हुए। 
पं रामबरन त्रिपाठी की शिक्षा गांव के ही प्रथमिक विद्यालय से आरंभ हुई थी। उन्होंने तत्कालीन संस्कृत साहित्य और हिन्दी साहित्य का अध्ययन किया था। वे एक अच्छे चित्रकार और बांसुरी वादक भी भी थे । रामलीला , कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इनकी बनाई हुई कलाकृतियां सब को अपनी ओर आकृष्ट किए बिना नहीं रहती थी। बालकाल से ही कविता करने लगे थे । इनकी कविताओं में कबीर , जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की सी मिठास देखने को मिलता है। वे आरम्भ से ही विद्रोही कवि के रूप में दिखाई पड़ते हैं। गतानुगतिकता के प्रति तीव्र विद्रोह उनकी कविताओं में आदि से अंत तक बना रहा है। व्यक्तित्व की जैसी निर्बाध अभिव्यक्ति उनकी रचनाओं में हुआ है वैसा आज के आधुनिक कवियों कम दिखाई देता है। त्रिपाठी जी ने भावनाओं को कोमलता प्रदान करने का प्रयत्न नहीं किया है फिर भी इनकी रचनाओं में भाव कोमलता सर्वत्र व्याप्त है।
 सर्वत्र अभिव्यक्ति की अत्यंत निर्बाध रूप प्रदर्शित होता है। त्रिपाठी जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कविताएं तो लिखी ही है, निबंध , आलोचना, उपन्यास , कहानी आदि भी लिखा है। व्यंग और कटाक्ष को वे नहीं भूलते लेकिन कथा काव्य के प्रति उनका झुकाव अधिक है। उनका महाकाव्य 'दिव्यालोक 'और 'क्रौंचवध ' कथानक उनके अंतरात्मा की उमड़ती हुई आवेगों को प्रदर्शित करती है। अनुभूति की तीव्रता के कारण उनके अंदर के आवेग बहुत वेगवान होकर प्रकट हुए हैं , कोमलकांत पदावली, छंदोबद्ध योजना,विशुद्ध गीतिकाव्यात्मकता और अलंकार योजना ने उनके काव्य को सहृदय विद्वानों के द्वारा सदैव ही सम्मान मिलता रहा है।
त्रिपाठी जी की कविताएं साधारण पाठकों को दुर्बोध मालूम नहीं होती है। इसका कारण यह है कि कवि अपने आवेगों को संयत रखकर लिखता है। कवि को एक बात कहते - कहते कभी - कभी दूसरी बात याद आ जाती है तब वहां कवि अपने आयोगों को अंकुश नहीं रख सका है। अंकुश वह रख सकता है जो भावो को सजाने का प्रयास करता है। कवि त्रिपाठी जी यह नहीं करते इसलिए उनके भावों की अविरल धारा में प्रायः सभी प्रसंग आ जाते हैं जो पाठक की दृष्टि में प्रासंगिक है। कवि की इसी प्रतिभा ने उसे अधिक लोकप्रिय बना दिया।
इस पुस्तक में कवि की पहली रचना -'वाणी वंदना' में मानवतावादी राष्ट्रप्रेम का भाव दिखाई देता है । कवि मां शारदे से आग्रह करता है -
कृषकों के कुदाल खुरपी पर 
अम्ब!फेर अपने सशक्त कर
श्रमिक वर्ग में नवल तेज भर
****************
   भारत के वीरों में जाकर ।
   मां शस्त्रास्त्रों में प्रलयंकर
   भर दे ओज अपूर्व प्रखरतर
जिससे कांपे अरि दल थर -थर।।
कवि का सम्पूर्ण जीवन ग्रामीण परिवेश में बीता है गांव के प्राकृतिक स्वरूप सहज सामान्य वातावरण ने कवि को अपने में डुबा लिया है। कोयल , पपीहा, मोर ,मैना, तोता पीपल ,बरगद,टेंसू के साथ - साथ उदित और अस्ताचल सूर्य का पूर्ण विम्ब ये सब मिलकर कवि को सौन्दर्य की नवीन अनुभूति तथा दीप्ति प्रदान करते हैं। कवि प्रकृति के समक्ष नतमस्तक होकर स्वयं को कृतार्थ अनुभव करता है। इसी यथार्थ बोध ने कवि में एक नवीन आस्था को जन्म दिया है इसी नवीन आस्था के वशीभूत होकर कवि उस थोपी हुई तथाकथित पर व्यंग करता है।

"बालारूण निरख-निरख कर , वह कल कपोल की लाली ।
अपमानित हो छिप जाता, खो अपनी छंटा निराली।।
टेसू -प्रसून खिल-खिलकर, लालिमा गर्व से ऐंठें।
अधरोष्ठ राग रंजित लख, लज्जित मुख नत से बैठा।।"
****। ******। *******
"कोकिल की सरस काली,
चातक का मधुर -मधुर स्वर।
मधुकर का मधुमय गुंजन,
न्योछावर तब वाणी पर।।"
प्रेम जीवन की उर्जा शक्ति का श्रोत है प्रेम ही जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। प्रेम सम्पूर्ण सृष्टि का मूल रहस्य है। इसी के कारण सृष्टि की रचना हुई है। अन्तर्मन में प्रेम उत्पन्न होते ही सब कुछ रूपान्तरित हो जाता है। ऐसा प्रतीत होता है, मानो अंधकार को चीरता हुआ कोई प्रकाश किरण उदित हुई है। यही प्रेम निराशा और निष्क्रियता के अंधकार को समाप्त करके जीवन में नवीन प्रकाश धारण करता है।
"जीवन के प्रथम पहर में,
तुम अरूणोदय से आए ।
धीरे धीरे रग - रग में ,
आलोक मधुर बिखराए।।"
कवि का प्रारम्भिक जीवन कष्टों और संघर्षों में व्यतीत हुआ था। 'मेरा बचपन ' कविता के माध्यम से कवि समसामयिक परिवेश के प्रति ईमानदारी उनके आत्मपरिचय से आरंभ होता है, कवि त्रिपाठी जी अपने विषय में बिना कुछ छिपाए हुए कहते हैं -
"अनुबंधित था अंधियारों से बचपन मेरा।
एक किरण के लिए तरसता रहा सबेरा।।"
****। *****। ******
"जिधर देखता विपदाओं ने डाला डेरा ।"
****। ******। ******
"जाऊं कहां और किस पथ से समझ न पाता।
किस करनी का दंड मिल रहा हाय विधाता।।"
भारत के समाज का वास्तविक चित्र गांवों में ही देखा जा सकता है आज भी गांवों में शोषण ,अशिक्षा , बेकारी , अंधविश्वास, भूखमरी विद्यमान है। कवि मूलतः गांव का निवासी है। प्रगतिशील और सर्वहारा का समर्थक होने के कारण गांवों की दशा का बहुत बारीकी से अवलोकन किया है । 
' निर्धन बाला ' कविता में कवि ने बाल मनोविज्ञान और ममतामयी मां के कोमल हृदय का जो चित्रण प्रस्तुत किया है , वह पाठक मन को करूणाकलित कर देता है। सहृदय पाठक ' निर्धन बाला ' कविता पढ़कर अश्रुविलगित हुए बिना नहीं रह पाता -
"किसी तरह पा सकी एक रोटी का टुकड़ा,
बड़े प्रेम से, जर्जर वसना, प्रसन्न वदना, 
बैठी घर के द्वार।
और ज्यों ही चाहा खाना उसने।
झपट कहीं से श्वान ले गया।।"
******। ********
"गीली मिट्टी लाकर के , लगी बनाने मधुर रोटियां।
कहती जाती अन्य साथियों से ..........
अभी मिलेगी रोटी 
किन्तु याद रखना मारूंगी 
यदि कुक्कुर छीनेगा रोटी।‌"
*****************
"अपने हिस्से की रोटी को , दिया सुता को ।
खा ले इसको कहते ही नेत्रों से मोती,
अकिंचना के , टपक पड़े भू-तल पर बिखरे।।"

आज सम्पूर्ण भारत में पाश्चात महानगरीय सभ्यता का बोलबाला है। गांव कस्बें बन रहें हैं, कस्बें शहर बन रहें हैं । गांव से लेकर शहर तक का मानव दिखावे के अंधानुकरण में फंसाता जा रहा है, जिसके कारण वह बह बहुत परेशान और दुखी हैं। जिसके कारण चोरी डकैती लूट मार अपहरण बलात्कार जैसी घटनाओं से समाचार पत्र भरें पड़े हैं। समाज के इस अवनति का कारण कवि पाश्चात्य और महानगरीय सभ्यता को ही मानता है। जिसके कारण कवि को हर व्यक्ति में अब उसको रावण दिखाई देता है । राम की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है -
"जितने रावण आज धरा पर, उतने राम कहां से आए?
त्रेता में कुबेर लूटते थे,
आज लूट रही निर्धन टोली,
सीता आग मांगते हारी, 
आज रूप की जलती होली।।"

कवि अत्यंत संवेदनशील प्राणी होता है। युगीन चेतना की जितनी गहरी और व्यापक अनुभूति उसे होती है शायद ही और किसी जीव में देखने को मिलें। उसका व्यक्तित्व जितना गरिमामय होंगा उसकी अनुभूति भी उतनी ही ज्यादा गौरवपूर्ण होगी। अनुभूतियों का मूल स्त्रोत यथार्थ में निहित है और किसी अन्य की अपेक्षा कवि यथार्थ के अधिक निकट सम्पर्क में रहता है। त्रिपाठी जी ने 'मुक्त छंद वाटिका' में समाज और संस्कृति का जो आइना चित्रण किया है, वह पूर्ण यथार्थ है । त्रिपाठी जी ने समाज को सिर्फ देखा ही नहीं है बल्कि क्रियात्मक रूप से अनुभव भी किया है। एक उदाहरण देखिए -
" भारत वासी कुछ अधर्म सापेक्ष हो गये,
 बचे खुचे कुछ लोग , धर्म निरपेक्ष हो गये।
 कौन निभाये धर्म-कर्म की रीति निराली,
  जिसके कारण देश रहा ये गौरवशाली।।"

"वैज्ञानिक बना रहे हंस -हंस कर विष के वाण,
जिससे जा सकतें हैं भू के सारे जीवों के प्राण।।"
 
काव्य पाठक मर्म को छूता है, वह उसके आवेग को जगाता है, उसकी संवेदना को दर्द देता है और उसकी बुद्धि को झकझोरता है। बौद्धिकता नई कविता की देन है, किन्तु आवेग और संवेदना तो काव्य के सर्वकालिक गुण हैं। संवेदनशील कवि स्वयं उस पीड़ा का भोक्ता होता है, जिसका वह वर्णन करता है। ' अन्तरात्मा की पुकार ' में जो भी कविता और छंद है वह कवि का भोगा हुआ अतीत है, वर्तमान है और भविष्य भी है। अतीत का एक उदाहरण -
"तन पुलकित मन हर्षित था, सम्पर्क हुआ जब तेरा।
 अब बीत रही क्या मुझ पर , यह हृदय जानता मेरा।।
      ये विरह -व्यथा की बातें, छंदों में नहीं समातीं।
     स्वच्छंद हुई सी आकर, नित अश्रुधार बरसातीं।।"
कवि के आशय की अभीसिप्त व्यंजना काव्य भाषा का प्रयोजन है आशय की अनुरूपता के साथ भाषा का स्वरूप-विधान कविता की भाषा -योजना का प्रमुख नियामक तत्व हैं। दूसरे शब्दों में भाव और भाषा का बहुत गहरा सम्बन्ध है। कालिदास ने 'वागर्थाविव सम्पृक्ति वागर्थ प्रतिपत्तये ' कहकर काव्य की भाषा और उसके आशय के सम्पृक्त होने का उल्लेख किया है। 'गिरा अरथ जल बीचि समय कहियत भिन्न न भिन्न ' के द्वारा तुलसीदास ने वाणी और अर्थ की अभिन्नता द्योतित की है। अर्थात काव्य -भाषा का आदर्श स्वरूप वहीं है जो कवि के वक्तव्य को उत्कृष्ट रूप में अभिव्यक्त कर सके। त्रिपाठी जी की भाषा में भाव , वाणी और वक्तव्य को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है, सरल व्यवहारिक भाषा,व्यंग्यात्मकता, यथार्थ के कारण कविता की भाषा में तीखापन है, साथ ही आध्यात्मिक और विनयपरक कविताओं में भाषा का वही मधुर और प्रौढ़ रूप मिलता है। समष्टि रूप से यह कहा जा सकता है कि त्रिपाठी जी की भाषा में कोमलता और माधुर्य के साथ ओज का प्रान्त रहा है।
अन्त में यह कहना चाहता हूं कि त्रिपाठी जी की रचना 'अन्तरात्मा की पुकार ' अत्यंत सशक्त रूप में पाठकों को प्रभावित करती है। यही त्रिपाठी जी के काव्य की महानता है किन्तु इतने पर भी हमें यह ध्यान रखना होगा । किसी भी काव्य का अभिशंसात्मक मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, क्योंकि काव्य सभी 'गरिमामावाची '
अयथार्थ तत्वों से परे है। हम कह सकते हैं कि -
अपारे काव्य संसारे कविरेव प्रजापतिः |
यथा वै रोचते विश्वं तत्थेदं परिवर्तते ||
'यह अपार काव्य संसार में कवि सृष्टा ब्रह्म के
समान आचरण करता है |'
यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

सोमवार, 1 जनवरी 2024

नववर्ष 2024

यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

🍀🍀 2024 की हार्दिक शुभकामनाएं 🍀🍀


सुख, संपत्ति, स्वरुप, संयम, सादगी,सफलता, साधना, संस्कार, स्वास्थ्य,सम्मान, शान्ति एवं समृध्दि की मंगल कामनाओं के साथ  नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!
🙏🙏🙏🙏
आलोक त्रिपाठी
सुजानगंज जौनपुर

सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

Net JRF के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

हालावाद से महत्वपूर्ण प्रश्न 


1- "व्यक्तिवादी काव्य" या "वैयक्तिक कविता" के नाम से जाना जाता है ?
-- हालावाद
2- "इस काव्य में समग्रतः एवं संपूर्णतः वैयक्तिक चेतनाओं को ही काव्यमय स्वरों और भाषा में संजोया गया है।" यहाँ किस काव्य के बारे में कहा गया है ?
-- हालावादी काव्य के बारे में
3- "नव्य-स्वछंदतावाद" के नाम से जाना जाता है ?
-- हालावाद
4- "उन्मुक्त प्रेमकाव्य" या "प्रेम व मस्ती के काव्य" के नाम से जाना जाता है ?
-- हालावादी काव्य
5- "इसमें अपनी ही मस्ती, अल्हड़ता एवं अक्खड़ता है।" किसमें ?
-- हालावादी काव्य में
6- हालावादी काव्य पर किसका प्रभाव है ?
-- फारसी साहित्य का / उमरखैयाम का
7- "क्षयी रोमांस का कवि" कहा जाता है ?
-- हरिवंश राय बच्चन को
8- "प्रेम और रोमांस का कवि" कहा जाता है ?
-- रामेश्वर शुक्ल अंचल को
9- मांसलवाद के प्रवर्तक माने जाते है ?
-- रामेश्वर शुक्ल अंचल
10- "इनके काव्य में रोमांस तो है लेकिन निराशा और दुःख जनित।" किसके बारे में कहा गया है ?
-- नरेन्द्र शर्मा के


11- हालावाद के प्रवर्तक माने जाते है ?
-- हरिवंश राय बच्चन
12- हालावाद का समय काल माना जाता है ?
-- 1933 से 1936
13- हालावादी कविता को "वैयक्तिक कविता" किसने कहा है ?
-- डा नगेन्द्र ने
14- "वैयक्तिक कविता छायावाद की अनुजा और प्रगतिवाद की अग्रजा है।" कथन किसका है ?
-- डा नगेन्द्र का
15- हालावादी काव्य को "मस्ती, उमंग और उल्लास की कविता" किसने कहा है ?
-- हजारी प्रसाद द्विवेदी ने
16- हालावादी कविता का प्रबल भाव है ?
-- वैयक्तिकता का
17- "निराशावादी कवि" कहा जाता है ?
-- हालावादियों को
18- "व्यक्तिवादी कविता का प्रमुख स्वर निराशा का है, अवसाद का है, थकान का है, टूटन का है, चाहे किसी भी परिप्रेक्ष्य में हो ।" कथन किसका है ?
-- डा रामदरश मिश्र का
19- व्यक्तिवादी गीति कविता की सभी प्रवृत्तियाँ ( प्रेम, निराशा, वेदना, सामाजिक चेतना ) किसके काव्य में लक्षित होती है ?
-- आरसी प्रसाद सिंह के
20- "अशरीरी प्रेम के स्थान पर शरीरी प्रेम को इन्होंने तरजीह दी है।" किन्होंने तरजीह दी है ?
-- हालावादी कवियों ने


21- "मूलतः प्रेम यौवन और सौन्दर्य के कवि" माने जाते है ?
-- रामेश्वर शुक्ल अंचल
22- हालावादी काव्य को "क्षयी रोमांस और कुण्ठा का काव्य" किसने कहा है ?
-- डा हेतु भारद्वाज ने
23- हालावाद प्रचलित कब से हुआ ?
-- बच्चन की मधुशाला से
24- किसकी रचनाओं में आत्मसंदेह और मृत्यु भय की भावना सर्वाधिक पाई जाती है ?
-- हरिवंश राय बच्चन की
25- बच्चन की रचना त्रय में शामिल है ?
-- मधुशाला, मधुबाला और मधुकलश
26- छायावाद का "दूसरा उन्मेष" कहलाता है ?
-- उत्तर छायावाद
27- उत्तर छायावाद को छायावाद का दूसरा उन्मेष किसने कहा ?
-- हजारी प्रसाद द्विवेदी ने
28- उत्तर छायावाद में कितने प्रकार की काव्यधाराएँ विकसित हुई ?
-- दो प्रकार की ( 1- राष्ट्रीय 2- वैयक्तिक )
29- उत्तर छायावाद को "स्वछन्द काव्य धारा" किसने कहा ?
-- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
30- गणपतिचन्द्र गुप्त ने उत्तर छायावाद को कितनी काव्यधाराओं में बांटा है ?
-- 3 में ( 1- राष्ट्रीय चेतना प्रधान 2- व्यक्ति चेतना प्रधान 3- समष्टि चेतना प्रधान )


31- हालावाद को "प्रगति प्रयोग का पूर्वाभास" किसने कहा है ?
-- डा बच्चन सिंह ने
: 32- हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब हुआ था ?
-- 1907 ई
33- हरिवंशराय बच्चन रचित प्रथम काव्य संग्रह है?
-- मधुशाला ( रचना 1933, प्रकाशन 1935 ई )
34- हरिवंशराय बच्चन का प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह है ?
-- तेरा हार
35- उमर खय्याम की रुबाईयों का अनुवाद किसने किया ?
-- हरिवंश राय बच्चन ने
36- बच्चन को किस कृति के लिए "साहित्य अकादमी पुरस्कार" मिला ?
-- "दो चट्टाने" के लिए
37- बच्चन की आत्मकथा कितने खण्डों में प्रकाशित है ?
-- चार खण्डों में
( 1- क्या भूलू़ँ क्या याद करूँ
2- नीड़ का निर्माण फिर
3- बसेरे से दूर
4- दशद्वार से सोपान तक
38- "निशा निमंत्रण" में संकलन है ?
-- गीतों का
39- "निशा निमंत्रण" का प्रकाशन वर्ष है ?
-- 1938 ई
40- "निशा निमंत्रण" के गीत कितनी कितनी पंक्तियों में रचित है ?
-- 13 - 13 पंक्तियों में



यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

हिंदी भाषा एवं बोलियाँ*

 *हिंदी भाषा एवं बोलियाँ* 

     पश्चिमी हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
      पांच 
*✍पश्चिमी हिंदी की कौन-कौन सी बोलियां हैं ?*
खड़ी बोली या कौरवी, ब्रजभाषा, हरियाणी, बुंदेली और कन्नौजी ।
*✍पूर्व हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी ।
*✍राजस्थानी हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, मालवी ।
*✍पहाड़ी हिन्दी को कितने भागों में बांटा गया है ?*
पश्चिमी पहाड़ी और मध्यवर्ती पहाड़ी (कुमाऊंनी तथा गढ़वाली)
*✍बिहारी में हिन्दी की कितनी बोलियां हैं ?*
तीन- मगही, भोजपुरी और मैथिली ।
*✍भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्राचीनतम प्रयोग कहां मिलता है ?*
शरफुद्दीन के जफरनामा में
*✍हिंदी का वास्तिव आरंभ कब से माना जाता है ?*
1000 ई.
*✍हिंदी क्षेत्र की बोलियों में सबसे ज्यादा कौन-सी बोली बोली जाती है ?*
भोजपुरी 
*✍साहित्यिक दृषि से हिंदी भाषा की सबसे महत्वपूर्ण बोली कौन-सी है ?*
बज्रभाषा
*✍ताज्जुबेकिस्तान में कौन सी हिंदी बोली जाती है ?*
बज्रभाषा
*✍भारत के बाहर सबसे ज्यादा अवधी कहां बोली जाती है ?*
फिजी
*✍हिंदी का पहला समाचार पत्र कौन था ?*
उदंत मार्तण्ड
*✍अशोक के समय राजकाज की भाषा क्या थी ?*
पाली
*✍मुहम्मद गोरी से लेकर अकबर तक राजकाज की भाषा क्या थी ?*
हिंदी
*✍अकबर के शासन काल में मंत्री टोडरमल के आदेश से किस भाषा को हिंदी की जगह पर राजभाषा बनाया गया ?*
फारसी
*✍ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब तक फारसी को राजभाषा बनाए रखा ?*
1833 ई. तक
*✍संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया था ?*
गोपाल स्वामी आयंगर
*✍भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा के रुप में कब मान्यता मिली ?*
14 सितंबर, 1949
*✍संविधान के किस अनुच्छेद में हिंदी को संघ की भाषा और देवनागरी को लिपि कहा गया है ?*
अनुच्छेद 343
*✍राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?*
बालगंगाधर खरे
*✍संविधान के किस सूची में भाषा को सम्मिलित किया गया है ?*
आठवीं अनुसूची
*✍आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को शामिल किया गया है ?*
25
*✍जनसंख्या की दृष्टि से सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी का कौन-सा स्थान है ?*
तीसरा
*✍भारतीय लिपियों में सर्वश्रेष्ठ लिपि किसे मानी गई है ?*
ब्राह्मी लिपि
*✍हिंदी के उद्भव का सही क्रम है ?*
पालि, प्राकृत,अपभ्रंश, अवहट्ट
*✍हिंदी का संबंध किससे है ?*
शौरसेनी अपभ्रंश
*✍अपभ्रंश को पुरानी हिंदी किसने कहा ?*
चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
*✍शौरसेनी अपभ्रंश में किस उपभाषा का विकास हुआ ?*
राजस्थानी
*✍साहित्यिक अपभ्रंश को पुरानी हिंदी किसने कहा था ?*
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
*✍खड़ी बोली हिंदी में सर्वप्रथम रचना करने वाले कवि किसे माना गया है ?*
अमीर खुसरो
*✍चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने किसको पुरानी हिंदी का प्रथम कवि माना है ?*
राजामुंज
*✍देवनागरी लिपि की उत्पत्ति किसके हुई ?*
ब्राह्मी
*✍तुलसी रचित विनय पत्रिका की क्या भाषा है ?*
ब्रज
*✍मैथिली का विकास किस अपभ्रंश से माना जाता है ?*
मागधी अपभ्रंश
*✍फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना कहां हुई ?*
कोलकाता
*✍कचहरियों में हिंदी प्रवेश आंदोलन का मुखपत्र किस पत्र को कहा जाता है ?*
भारत-मित्र
*✍नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना कब हुई ?*
1893 ई.
*✍नागरी प्रचारिणी सभा के संस्थापकों में कौन शामिल थे ?*
शिवकुमार सिंह और बाबू श्यामसुंदर दास
*✍रामचरितमानस किस भाषा में लिखा गया है ?*
अवधी
*✍खड़ी बोली का प्रयोग सबसे पहले किस किताब में हुआ ?*
प्रेमसागर
*✍ब्रजभाषा किस अपभ्रंश से विकसित हुआ है ?*
शौरसेनी
*✍पश्चिमी हिंदी की सबसे प्रमुख बोली कौन है ?*
ब्रजभाषा
*✍पश्चिमी हिंदी किस अपभ्रंश से विकसित हुई है ?*
शौरसेनी
*✍किस क्षेत्र की बोली को काशिका कहा गया है ?*
बनारस
*✍शकुन्तला नाटक का खड़ी बोली में अनुवाद किसे किया ?*
राज लक्ष्मण सिंह
*✍अवधी की उत्पति किस अपभ्रंश से हुई है ?*
अर्धमागधी
*✍किस बोली में कृष्ण काव्य और रीतिकालीन साहित्य का सृजन हुआ ?*
ब्रजभाषा
*अहीरवाटी का संबंध किससे है ?*
उत्तरी राजस्थानी
*✍ भाषा की उत्पति किस अपभ्रंश से हुई है ?*
ब्राचड़ अपभ्रंश
*✍बिहारी, बंगला, उड़िया और असमिया का उद्भव किस अपभ्रंश से हुआ है ?*
मागधी

शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2023

"अन्तरात्मा की पुकार ''और कवि

अन्तरात्मा की पुकार ''और कवि
डॉ  सुरेश कुमार शुक्ला
         प्रवक्ता संस्कृत
राजकीय विद्यालय झारखंड

"नरत्वं दुर्लभं लोके, विद्या तत्र सुदुर्लभा। शीलं च दुर्लभं तत्र, विनयस्तत्र सुदुर्लभः॥" हिन्दी साहित्य परम्परा में सतत् तत्पर रहते वाले भावभीनी प्रतिभा से विभूषित सहृदयों के हृदय को हिलोर देने वाले भाषा विलासिनी भुजंगम् आचार्य पंडित श्री राम बरन त्रिपाठी द्वारा रचित मुक्तक काव्य "अंतरात्मा की पुकार" को पाठक जितनी बार पढ़ते हैं उतना ही आनंद बढ़ता चला जाता है विगत वर्षों में यद्यपि बहुत सारे गद्य काव्य, कथा संग्रह,पद्य काव्य, चम्पू काव्य आदि विधाएं प्रकाशित हुई इस तरह का प्रत्येक छंद अपने आप में पूर्ण आनंद प्रदान करने वाला काव्य तैयार करने की कला तो केवल पंडित जी में ही दिखाई देती है। इनकी लेखनी जिस भी विधा में चल जाती है वहां अमित छाप छोड़ जाती है।
आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में एक और कड़ी को मुखरित और पल्लवित कर त्रिपाठी जी का एक - एक मुक्तक सहद में डूबा हुआ प्रतीत होता है।
श्री त्रिपाठी जी की लेखनी में अद्भुत क्षमता है जो वाणी से समेटना उनके साथ अन्याय होगा लेखन लेखक के अन्तर्जगत का प्रतिबिम्ब होता है। प्रत्येक लेखकके लेखन में उसके व्यक्तित्व की झलक दिखता है। यही कारण है कि त्रिपाठी जी के मुक्तक काव्य में सोद्देश्य उपादेयता नैतिकता, देश प्रेम, राजनीति, प्रपंच आदि का सांगोपांग चित्रण करने में जरा भी कोर - कसर नहीं छोड़ा है।

स्वनामधन्य, विप्रवंश, शिरोमणि श्री त्रिपाठी जी के विषय में कुछ कह पाना अपनी एक दृष्टता ही होगी , परन्तु हृदय में जो उफान है वह रुक भी नहीं रहा है। किसी भी कार्य को करने का कुछ न कुछ प्रयोजन अवश्य ही  होता है -
“प्रयोजनं विना तु मन्दोऽपि न प्रवर्तते |”
इसलिए कहा भी गया है कि- कस्यचिदपि कार्यस्य कर्मणो वापि कस्याचित्। यावत्प्रयोजनं नोक्तं तावत्केन गृहते।।
सात्विक श्रोत से आयी हुई सम्पत्तियां  हमेशा सुखकारी होती है पाप कर्मों से आयी हुई सम्पत्तियां सदा कलुषता को ही उत्पन्न करती है त्रिपाठी जी का सात्विक विचार निश्चित ही रूप से उनके काव्य में झलक रहा है। वास्तव में यह हिन्दी साहित्यकार हिन्दी साहित्य समाज में व्याप्त सामाजिक जटिलता को दूर करने में, कठिनता को सरल करने में, आर्थिक , राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, जातिवाद, राष्ट्रवाद , भ्रष्टाचार आदि जैसी विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से अपने इस प्रयास के माध्यम से मुक्तक काव्य की रचना करने में सार्थक सिद्ध हुए हैं।


यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

संवेदना की अखंड ज्योति : अन्तरात्मा की पुकार


संवेदना की अखंड ज्योति : अन्तरात्मा की पुकार 

राम बरन त्रिपाठी जी के काव्य संग्रह 'अन्तरात्मा की पुकार ' की  कविताओं को पढ़कर कविता के सम्प्रेषण शक्ति पर विश्वास जमता है। आज के इस जटिल जीवन शैली में हमारे जीवन दृश्यों को इतने सहज -सरल व आकर्षक ढंग से उभार कर हमारे समक्ष रख देते हैं  कि हमारा जीवन हमारे समक्ष एक नये दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत हो जाता है।
समय के साथ प्रत्येक युग अपनी अर्थवत्ता खो देता है या जिस युग की जड़ें अपने परिवेश से जुड़ी नहीं होती वह युग हमारे लिए या समाज के लिए सार्थक नहीं हो सकता । इसी के चलते वर्तमान काल में पहुंच कर ढेर सारी काव्य प्रवृत्तियां बेहद कम समय में अपने निर्धारित उद्देश्य से विमुख होकर काल के गाल में समाती जाती है। वहीं नवगीत परम्परा अपनी गीतात्मकता के कारण आदिकाल से लेकर आज तक अपनी सार्थकता बनाएं हुए हैं । इन नवगीतकारों में जिन गीतकारों ने अपने गीतों की विषय वस्तु लोक से उठाया है,  या लोक से जुड़कर गीत प्रस्तुत किया  उनके गीत चिरस्थायी हो गये है ।ऐसे लोक गायक रामबरन त्रिपाठी जी लोक के जुड़ाव के साथ अपने 'अन्तरात्मा की पुकार ' में  जो। मुक्त छंद वाटिका प्रस्तुत की है वह एक तरह से उनके 'अन्तरात्मा की पुकार 'का 'उत्तर काण्ड' है। वर्तमान कालीन प्रत्येक  मानवीय मनोभावों को त्रिपाठी जी ने अपने सूक्ष्म पर्यवेक्षण के साथ प्रस्तुत किया है ।
इस काव्य संग्रह से -
"पनघट पर भीड़ लगीं हैं
 आती न हमारी बारी
 यह हृदय पात्र खाली है
 रोती बेबस लाचारी।।"
वर्तमान कालीन मानवीय संवेदना को पूरी तरह उभार कर प्रस्तुत कर देते है। जहां समूचे प्रदेश से कटा मानव  एकाकी जीवन दृष्टि के साथ उपस्थित हैं। वेदना जब संवेद्य होती है तभी हमारे हृदय तल को स्पर्श कर सकती है और जब संवेद्य होकर हमारे अंतर्मन तक पहुंच जाती है तो सामने वाले के दुःख , पीड़ा , वेदना से हमारा अंतर्मन चित्कार कर उठता है।यह सब सहज आंतरिक प्रक्रिया है जो हमारे जीवन के साथ सहजात हैं । हम जितना ही परदुख कातर होते हैं उतने ही संवेदनशील भी होते हैं। मानव के इसी एकाकीपन व अदृष्ट वेदना से छुटकारा दिलाने के लिए कवि की बेचैनी इस काव्य संग्रह के मंगलाचरण में देखी जा सकती है -
"मातु शारदे!वर दे!
कृषकों के कुदाल, खुरपी पर ,
अम्ब फेर अपना सशक्त कर।।"
***             *****         *****
भारत के वीरों में जाकर
मां शस्त्रास्त्रों में प्रलयंकर
भर दे ओज अपूर्व प्रखरतर।।"
यहां कवि का लोक-मंगलकारी भावना देखने को मिलता है , कवि दृष्टि मजदूर, कृषक और सैनिक समाज के हर वर्ग तक जाती है और कवि सब के मंगल की कामना करता है ।
                       लोक सम्पृक्ति और मानवीय दृष्टिकोण के साथ ही कवि अपनी दार्शनिक दृष्टि बड़े सहज रूप से हमारे सम्मुख प्रस्तुत कर देता है। काव्य रस से भीगा हमारा मन बड़े सहज ढंग से काव्यमयता में डूबी दार्शनिकता को ग्रहण कर लेता है।

"माया की डोर अनूठी , आनंद सिंधु को खींचे।
ज्यों नभ के मेघ निराले, ऊपर से भू को सींचे।।"२७५

""कण कण में बास तुम्हारा, पर देते नहीं दिखाई,
आंखों का दोष हमारा, अथवा प्रभु की प्रभुताई।।"२७६

अस्तु काव्य रस से सिक्त मन को लगाम खींचकर रोकना होगा नहीं तो काव्य के इस गतिशील प्रवाह में मन सहज ही प्रवाहमान रहेगा। ऐसी सरस और सहज काव्य कृतियां काव्य समय में उपस्थित होकर काव्य सामर्थ्य को प्रस्तुत करती है।
                                                    संजय प्रताप सिंह
प्रवक्ता हिन्दी
राजकीय विद्यालय 
अमेठी उत्तर प्रदेश



यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

।। नान्नदीवाक्।।

।।नान्दीवाक्।। 
यमदग्नि की कर्मस्थली, आलम की केलिन से गुंजित, जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की चकाचक धरती, गिरिजा दत्त शुक्ल 'गिरीश' जैसे विद्वद् वरेण की शैली से ओतप्रोत तथा प्रो0 गंगा नारायण त्रिपाठी की जन्मस्थली सुजानों की धरती सुजानगंज को आलोकित करने वाले पूज्यपाद कविभूषण श्रद्धेय श्री रामबरन त्रिपाठी द्वारा रचित अन्तरात्मा की पुकार नामक यह मुक्तावली कोमल पदावली युक्त तथा सह्र्दयों के मन को मुग्ध करती है। 
जिस प्रकार वृक्ष के जीवन चक्र में मूल से स्कंध, स्कंध से शाखाएं ,शाखाओं से वृत्त, वृत्त से पल्लव, पल्लवों से पुष्प, तथा पुष्पों से फलों का उद्भव होता है और फलों के अमृतोपम रस से ही समूचे वृक्ष के जीवन चक्र की सार्थकता सिद्ध होती है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य अपने कर्मेंद्रिय तथा ज्ञानेंद्रिय के माध्यम से शरीर, मन, प्राण, इंद्रिय, जन्म, मरण, सृष्टि, प्रलय, आदि गहन विषयों का हस्तामलकवत् ज्ञान प्राप्त कर अपनी अन्तरात्मा के द्वारा प्राप्त तत्त्वों को समाज हेतु प्रस्तुत करता है। तो उसके जीवन की सार्थकता सिद्ध होती है। इसी लोकहित की भावना से प्रेरित होकर कवि के द्वारा संकल्पित अंतरात्मा की पुकार नामक या मुक्तक काव्य सभी सुधीजनों के लिए प्रस्तुत है। 
कवि ने समाज  में फैली बुराइयों को न दूर कर पाने  पर बड़ा ही मार्मिक मुक्तक प्रस्तुत करते हुए कहा कि-

 जलाए सहस्त्रों विविध दीप हमने
 अंधेरा धरा से मिटा पर न पाए। 
रही साध ऐसी की जग जगमगाये
 नहीं किंतु दीपक तले देख पाए।।

गोपाल दास नीरज की पंक्ति जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना की आदर्शवादिता को दूर कर कवि ने अपने मुक्तक की माध्यम से वास्तविकता का भान कराया। 

इस विलक्षण सारस्वत अवदानार्थ मेैं पूज्य पितामह कवि हृदय आपका हार्दिक अभिनंदन करता हूंँ तथा आपकी इन पंक्तियों के साथ आशीर्वाद का आकांक्षी हूंँ। 

यह उद्द्घोष कृष्ण का युग युग
 जन-जन में उल्लास भरेगा। 
क्या चिंतन क्या उक्ति हमारी 
यह निर्णय इतिहास करेगा।। 

विनयावनत् 
डॉ0 विनय कुमार त्रिपाठी
 प्राचार्य
 श्री गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय सुजानगंज जौनपुर

गुरुवार, 21 सितंबर 2023

हिंदी साहित्य से महत्वपूर्ण प्रश्न (4)

यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

'नूतन ब्रह्मचारी' किसका उपन्यास है? – बालकृष्ण भट्ट
पं. किशोरीदास वाजपेयी ने उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध को किस युग के नाम से अभिहित किया? – लाल युग
• पं. जवाहरलाल नेहरू किस दैनिक समाचार-पत्र के संस्थापक और निदेशक मंडल के अध्यक्ष थे? – नेशनल हेराल्ड
• 'पंत के दो सौ पत्र बच्चन के नाम' नामक पत्र-संग्रह के संपादक कौन हैं? – हरिवंशराय बच्चन
• 'पचपन खंभे लाल दीवारें' उपन्यास की लेखिका कौन है? – उषा प्रियंवदा
• 'पत्रांजलि' का संपादन किसने किया था? – सतीशचंद्र
• पद्म सिंह शर्मा ने किस आलोचना का सूत्रपात किया? – तुलनात्मक
• 'पद्मावत' का लेखक कौन है? – जायसी
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने प्रेमाख्यान काव्य-परंपरा का प्रथम कवि किसे माना है? – कुतुबन
• 'परहित सरिस धरम नहिं भाई' पंक्ति किस रचनाकार की है? – तुलसीदास
• 'पराधीन सपनेहु सुख नाहीं' किसकी पंक्ति है? – तुलसीदास
• 'परिंदे' कहानी का लेखक कौन है? – निर्मल वर्मा
• 'परिमल' और 'अनामिका' का रचयिता कौन है? – निराला
• 'परिमल' किसकी संस्था थी? – नए लेखकों की
• 'परीक्षा गुरु' उपन्यास के लेखक कौन हैं? – लालाश्री निवास दास
• 'परीक्षा गुरु' से पूर्व प्रकाशित उपन्यास कौन सा है? – भाग्यवती
• 'पर्वत के पीछे' तथा 'ताजमहल के आँसू' एकांकी नाटकों की रचना किसने की? – लक्ष्मीनारायण लाल
• पश्चिमी हिंदी का उद्भव किस अपभ्रंश से हुआ? – शौरसेनी
• 'पहाड़ों में प्रेममय संगीत' किसकी रचना है? – उपेंद्रनाथ 'अश्क'
• पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' का कौन सा उपन्यास युवकों में लोकप्रिय हुआ? – चंद हसीनों के खुतूत
• पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' के किस उपन्यास की निंदा करते हुए महात्मा गांधी को पत्र लिखा गया? – चाकलेट
• पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' के किस बहुचर्चित उपन्यास को बनारसीदास चतुर्वेदी ने 'घासलेटी साहित्य' कहा था? – चाकलेट
• पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' के जीवन की झाँकी किस पुस्तक में निहित है? – अपनी खबर
• पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' ने किस नाम से 'आज' में राष्ट्रीय कहानियां लिखीं? – अष्टावक्र
• 'पाजेब' कहानी का लेखक कौन है? – जैनेंद्र कुमार
• पाणिनि ने किस ग्रंथ के द्वारा भाषा को एकरूपता देने का प्रयास किया? – अष्टाध्यायी
• पालि-प्राकृत भाषाएं किससे विकसित हुई? – वैदिक संस्कृत
• 'पावस पचासा' तथा 'सुकवि सतसई' का रचयिता कौन है? – अंबिकादत्त व्यास
• पाश्चात्य काव्यशास्त्र के अंतर्गत किस विद्वान् ने अनुकरण को काव्य हेतु माना है? – अरस्तु
• पाश्चात्य काव्यशास्त्र में नाटक के कितने तत्त्व माने गए हैं? – छह
• पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय ग्रंथ 'पेरि इप्सुस' (काव्य में उदात्त तत्त्व) का लेखक कौन है? – लोंजाइनस
• पाश्चात्य विचारक क्रोचे का काव्यशास्त्रीय सिद्धांत किस नाम से जाना जाता है? – अभिव्यंजनावाद
• 'पिता के पत्र पुत्री के नाम' का हिंदी अनुवाद किसने किया था? – प्रेमचंद
• पुरानी हिंदी को किस भाषा का समानार्थक माना गया? – अपभ्रंश
• 'पूर्वग्रह' पत्रिका का प्रकाशन कहाँ से हुआ? – भोपाल
• पूर्वी हिंदी की बोलियाँ अपभ्रंश के किस रूप से विकसित हुईं? – अर्द्ध मागधी
• पूर्वी हिंदी के अंतर्गत कौन सी बोली आती है? – अवधी हिंदी
• 'पेपरवेट' तथा 'फ्राकवाला घोड़ा' कहानियां किस लेखक की हैं? – गिरिराज किशोर
• 'पैरों में पंख बांधकर' किसकी रचना है? – रामवृक्ष बेनीपुरी
• 'प्रकृति के सुकुमार कवि' विशेषण किस कवि के लिए प्रयुक्त होता है? – सुमित्रानंदन पंत
• प्रगतिवादी विचारधारा का प्रतिनिधि कहानीकार कौन है? – यशपाल
• प्रगतिशील आंदोलन के सबसे सशक्त व्यंग्यकार कौन हैं? – हरिशंकर परसाई
• 'प्रगतिशील लेखक संघ' का प्रथम अधिवेशन कहां हुआ? – लखनऊ
• प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना कब हुई? – 1936 ई.
• प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम सभापति कौन थे? – प्रेमचंद
• 'प्रज्ञा नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा मता'-यह पंक्ति किस आचार्य की है? – भट्टतौत
• प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन कहां आयोजित किया गया? – नागपुर
• प्रथम विश्वयुद्ध पर आधारित कहानी कौन सी है? – उसने कहा था
• प्रथम हिंदी पत्र 'उदंत मार्तंड' का प्रकाशन कब शुरू हुआ? – 30 मई, 1826
• प्रसिद्ध कहानी 'कफन' का लेखक कौन है? – प्रेमचंद
• प्रारंभ में प्रेमचंद किस नाम से रचनाएं लिखते थे? – नवाब राय
• प्रारंभ में 'सरस्वती' पत्रिका का संपादन कहां से होता था? – काशी
• 'प्रिय प्रवास' कृति किस विधा में लिखी गई? – प्रबंध काव्य
• 'प्रिया नीलकंठी और 'रस आखेटक' निबंध-संग्रहों में किस रचनाकार के निबंध संकलित हैं? – कुबेरनाथ राय
• प्रेम और मस्ती की काव्यधारा का कवि कौन है? – हरिवंशराय बच्चन

मंगलवार, 19 सितंबर 2023

हिन्दी साहित्य की कुछ मिलती जुलती नामों वाली रचनाएं

हिन्दी साहित्य की कुछ मिलती-जुलती नामों वाली रचनाएँ।।।।

कफ़न (कहानी) प्रेमचंद  
तिरंगे कफ़न (कहानी) अमृत राय

कफ़न खोर (उपन्यास) बटरोही
अपराजिता (काव्य)~रामेश्वर शुक्ल अंचल।।
अपराजिता (उपन्यास)~चतुरसेन शास्त्री।।
नीली झील (कहानी)~कमलेश्वर।।
नीली झील (एकांकी)~धर्मवीर भारती
अर्धनारीश्वर (उपन्यास)~विष्णु प्रभाकर
अर्धनारीश्वर (निबंध)~दिनकर
एक पति के नोट्स (उपन्यास)~महेंद्र भल्ला
एक पत्नी के नोट्स (उपन्यास)~ममता कालिया
एक कस्बे के नोट्स(उपन्यास)~नीलेशरघुवंशी
त्रिशंकु (कथा संग्रह)~मन्नू भंडारी
त्रिशंकु (नाटक)~ब्रजमोहनसिंह
त्रिशंकु (निबंध)~अज्ञेय
अनित्य (उपन्यास)~मृदुला गर्ग
अनित्य (कहानी)~ बदी उज्जमा
पंच परमेश्वर (कहानी)~प्रेमचंद
पंच परमेश्वर (कहानी)~रांगेय राघव
झूठा सच (उपन्यास)~यशपाल
झूठ सच (निबंध)~सिया राम शरण गुप्त
काली आँधी (उपन्यास)~कमलेश्वर
पीली आँधी (उपन्यास)~प्रभाखेतान
द्रौपदी (प्रबंध काव्य)~नरेंद्र शर्मा
द्रौपदी (उपन्यास)~प्रतिभा राय
द्रौपदी (नाटक)~सुरेंद्रवर्मा
बाँधो न नाव इस ठाँव (उपन्यास)~उपेन्द्र नाथ
अश्क
बाँधो न नाव इस ठाँव (काव्य)~निराला
संन्यासी (उपन्यास)~इलाचंद्र जोशी
संन्यासी (नाटक)~लक्ष्मी नारायण मिश्र
युवा संन्यासी (नाटक)~कैलाश वाजपेयी
उर्वशी (काव्य)~प्रसाद
उर्वशी (काव्य)~दिनकर
रश्मि (काव्य)~महादेवी
रश्मि रथी (काव्य)~दिनकर
पिता (कहानी)~ज्ञानरंजन, महीप सिंह, धीरेन्द्र
अस्थाना
केवल पिता ( कहानी)~सेवाराम यात्री
पिता दर पिता (कहानी)~रमेश वक्षी
दीपशिखा (काव्य)~महादेवी
दीपशिखा (नाटक)~रेवती शरन शर्मा
मुक्ति पथ (नाटक)~उदयशंकर भट्ट
मुक्ति पथ (उपन्यास)~इलाचंद्र जोशी
मुक्ति पथ (उपन्यास)~अभय मौर्य
मुक्ति पर्व (उपन्यास)~मोहनदास नैमिशराय
मुक्ति प्रसंग (काव्य)~राज कमल चौधरी
मम् अरण्य (उपन्यास)~सुधाकर अदीब
अन्तिम अरण्य (उपन्यास)~निर्मल वर्मा
दूब धान (काव्य)~अनामिका
दूब धान (कहानी)~उषा किरन खान
राग विराग (कहानी)~हरिशंकरपरसाई
राग विराग (निराला की कविताओं का संग्रह)
~रामविलास शर्मा
धरती (काव्य ) ~त्रिलोचन
धरती (उपन्यास)~भैरव प्रसाद गुप्त
वसीयत (नाटक)~भगवती चरण वर्मा
वसीयत (नाटक)~नागबोडस
पंचवटी (काव्य)~मैथिलीशरण गुप्त
पंचवटी प्रसंग (काव्य)~निराला
उपसंहार (उपन्यास)~योगेशगुप्त
उपसंहार (उपन्यास)~काशी नाथ सिंह
गुलाम बादशाह (नाटक)~नंद किशोर आचार्य
गुलाम बादशाह (उपन्यास)~रूप सिंह चंदेल
बादशाह गुलाम बेगम (नाटक)~गिरिराज किशोर
गुनाहों का देवता (उपन्यास)~धर्मवीर भारती
देवता के गुनाह (उपन्यास)~देवेशठाकुर
तीसरा हाथी (नाटक)~रमेश वक्षी
अंधों का हाथी (नाटक)~शरद जोशी
पागल हाथी (लघु कथा)~प्रेमचंद
शह और मात (उपन्यास)~राजेंद्र यादव
शह ये मात (नाटक)~ब्रजमोहनसिंह
धूप के धान (काव्य )~गिरिजा कुमार माथुर
धूप की उंगलियों के निशान (कथा संग्रह)-महीप
सिंह
धूप कोठरी के आइने में खड़ी ( काव्य) ~शमशेर
बहादुर सिंह
सीढियों पर धूप (काव्य)~रघुवीर सहाय
धूप में जग रूप सुन्दर (काव्य)~त्रिलोचन
धूप के हस्ताक्षर (गजल)~ज्ञान प्रकाश विदेह
पक गई है धूप ( काव्य )~राम दरश मिश्र
उभरती हुई धूप (उपन्यास)~गोविन्द मिश्र
टहनियों पर धूप (कहानी )~मेहरुन्निसा परवेज
धूप की तलवार (कविता)~केदारनाथ अग्रवाल।।।

आधुनिक काल

प्रश्न =1गड़रिये और दार्शनिक किस का अनुवादित ग्रन्थ है-
(अ) हरमिट
(ब) शेफर्ड एण्ड फिलॉसफर√√
(स) डेजर्ट विलेज
(द)ट्रैवलर

प्रश्न =2 ‘पुनर्जागरण दो जातीय संस्कृतयो की टकराहट से उतपन्न रचनात्मक ऊर्जा है।’
कथन है
(अ) डॉ बच्चन सिंह
(ब) डॉ सुनीति वर्मा
(स) डॉ रामस्वरूप चतुर्वेदी√√
(द) श्री धर पाठक

प्रश्न =3 ‘ निज भाषा उन्नति अहे सब उन्नति को मूल’ कथन है
(अ) भारतेन्दु √√
(ब) स्वामी विवेकानंद
(स) महात्मा गांधी
(द)रवीन्द्र नाथ ठाकुर

प्रश्न =4भारतेन्दु जी किस नाटक में अभिनय किया-
(अ) प्रेम जोगिनी
(ब) श्री चन्द्रावली
(स)वैदिकी हिंसा, हिंसा न भवति
(द)जानकी मंगल√√

प्रश्न =5 माधवी और रूप रतन हुस्ना ‘नागरी’ किस युग की कवयित्रियाँ है-
(अ) भारतेन्दु युग√√
(ब) द्विवेदी युग
(स)छायावाद
(द) पूर्व भारतेन्दु युग

प्रश्न =6 काव्य मंजूषा के रचियता-
(अ) श्री धर पाठक
(ब)  भारतेन्दु
(स)गोपाल चन्द्र
(द) महावीर प्रसाद द्विवेदी√√

प्रश्न =7 उमर खैयाम की रुबाइयाँ की कृति है-
(अ) श्री धर पाठक
(ब) महावीर प्रसाद
(स)हरिवंश राय बच्चन√√
(द)जयशंकर प्रसाद

प्रश्न =8 द्विवेदी युग में रचित जयशंकर प्रसाद की अतुकांत रचना है-
(अ) कामायनी
(ब) प्रेमपथिक√√
(स)झरना
(द)लहर

प्रश्न =9 ‘तुम अर्ध नग्न क्यों रहो अशेष समय में। आओ, हम काते बुने गान की लय में’……..  पंक्तिया किसकी है व् किस संग्रह से है
(अ) प्रेमघन (प्रेमघन सर्वसव)
(ब) पंत जी( लोकायतन)
(स)ठाकुर प्रसाद सिंह ( महामानव)
(द)मैथिली शरण गुप्त(साकेत)√√

प्रश्न =10 ‘ बिखरे मोती’ किसका प्रथम कहानी संग्रह है-
(अ) सुभद्रा कुमारी चौहान
(ब) श्री धार पाठक
(स)जय शंकर √√
(द) महादेवी वर्मा

Q.1  ‘सुख दुःख की भावेशमयी अवस्था विशेष का गिने चुने शब्दो मे स्वर साधना के उपर्युक्त चित्रण कर देना ही गीत है’ किंसने कहा?
A पन्त
B महादेवी वर्मा√√
C महावीर प्रसाद
D रामकुमार वर्मा

Q.2 ‘मानव अथवा प्रकृति के सूक्ष्म किंतु व्यक्त सोंदर्य में आध्यात्मिक छाया का भान मेरे विचार में छायावाद की एक सर्वमान्य व्याख्या हो सकती है’ किंसने कहा
A शुक्ल
B नंदुलारे वाजपेयी√√
C नगेन्द्र
D हजारीप्रसाद

Q.3 ‘छायावाद काव्य न रहकर केवल अलंकृत संगीत बन गया था’ किस कवि ने कहा?
A निराला
B पन्त√√
C प्रसाद
D शुक्ल

Q.4 ‘चंचला स्नान कर आवै, चंद्रिका पर्व में जैसी’ पंक्ति किस काव्य से है?
A लहर
B आंसू√√
C झरना
D जूही की कली

Q.5 मुक्त करो नारी को मानव। चिर बंदिनी नारी को पंक्ति किस कृति से ली गयी है?
A पंचवटी
B युगांत
C गुंजन
D युगवाणी√√

Q.6 निम्न में से असंगत है?
A कल्पी-आरसी प्रसाद सिंह
B अपराजिता-अंचल
C किरण बेला- केदारनाथ अग्रवाल√√
D सुवर्णा-नरेंद्र शर्मा

Q.7 महादेवी जी का वह काव्य संग्रह कौन सा है जिसमें उनके दार्शनिक विचार अधिक प्रौढ़ रूप में उभर कर आए हैं
A रश्मि
B निहार
C निरजा
D सांध्यगीत√√

Q.8 अपनी व्यक्त पूर्णता को अव्यक्त पूर्णता में मिटा देने की इच्छा ही रहस्यवाद है उपर्युक्त कथन किसका है ?
A जयशंकर प्रसाद
B महादेवी वर्मा √√
C श्याम सुंदर दास
D आचार्य शुक्ल

Q.9 छायावाद तत्वत: प्रकृति के बीच जीवन का उद्गीथ है ।…इसका मूल दर्शन सर्वोत्तमवाद है यह परिभाषा किसकी हैं
A जयशंकर प्रसाद
B पंत
C रामकुमार वर्मा
D महादेवी वर्मा√√

Q.10 “जब वेदना के आधार पर स्वानुभूतिमयी अभिव्यक्ति होने लगी तब हिंदी में उसे छायावाद के नाम से अभिहित किया गया ।” यह कथन किस व्यक्ति का है
A प्रसाद √√
B परमानंद श्रीवास्तव
C डॉ नगेंद्र
D शांतिप्रिय

शनिवार, 17 जून 2023

हिन्दी साहित्य का इतिहास भाग -01

       हिंदी साहित्य प्रश्न

1. शेरसिंह का शस्त्र समर्पण’ किसकी रचना है?💐प्रसाद

2. ’ताजमहल का टेण्डर’ किसका नाटक है?💐अजय शुक्ल

3. अनुमितिवाद की अवधारणा किसकी है?💐आ शंकुक

4. ’रेखाएं बोल उठीं’ किसकी रचना है?💐देवेंद्र सत्यार्थी

5. ’सांप तुम सभ्य तो हुए नहीं’ किसकी काव्य-पंक्ति है?💐अज्ञेय

6. ’गुलगुली गिल में गलीचा है गुनीजन हैं’ किसकी काव्य-पंक्ति है?💐पद्माकर

7. ’सोन मछली’ किसकी कविता है?💐अज्ञेय

8. ’यमुना के प्रति’ कविता के रचनाकार कौन हैं?💐निराला

9. ’पेशोला की प्रतिध्वनि’ कविता के रचयिता कौन हैं?💐प्रसाद

10. मिश्र बन्धुओं में कौन-कौन सम्मिलित हैं?💐गणेश श्याम शुखदेव

11. ’गंगौली’ गांव किस उपन्यास के केन्द्र में है?💐आधा गाँव राही मासूम

12. ’कोर्ट मार्शल’ नाटक के रचनाकार कौन हैं?💐स्वदेश दीपक

13. ’ऋतम्भरा’ किसकी काव्यकृति है?💐केदारनाथ मिश्र प्रभात

14. ’पीली ऑंधी’ उपन्यास किसकी रचना है?💐प्रभाखेतान

15. ’रमणीयार्थ-प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ किसका कथन है?💐जगन्नाथ

16. शब्दार्थौ सहितौ काव्यम्’ किसका कथन है?💐भामह

17. ’एक मन्त्री स्वर्ग लोक में’ किसका उपन्यास है?💐शंकर पुनताम्बेकार

18. ’गोबर गणेष’ उपन्यास के लेखक कौन हैं?💐रमेश चंद्र शाह

19. ’एक चूहे की मौत’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?💐बदिउज्जमा

20. उत्पत्तिवाद के सिद्धान्त के प्रवर्तक कौन हैं?💐भट्टलोल्लत

21. भुक्तिवाद के सिद्धान्त का प्रवर्तन किसने किया?💐भट्टनायक

22. ’प्रभुजी मोरे अवगुन चित न धरो’ किसकी पंक्ति है?💐सूरदास


23. सम्प्रेषण सिद्धान्त के प्रवर्तक कौन हैं?💐रिचर्डस

24. निर्वैयक्तिकता का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया?💐इलियट

25. ’रस-सिद्धान्त’ किसकी रचना है?💐नगेन्द्र

26. ’नए साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’ के रचनाकार कौन हैं?💐मुक्तिबोध

27. ’भाव विलास’ किसकी कृति है?💐देव

28. ’ओ! वरुणा की शान्त कछार’ किसकी पंक्ति है?💐प्रसाद

29. ’ब्रजबुलि’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?💐बंगाली कवि ईश्वर चंद गुप्त

30. ’गुरू सुआ जेइ पंथ दिखावा’ किसकी काव्य-पंक्ति है?💐जायसी

31. प्रपद्यवाद का दूसरा नाम क्या है?💐नकेनवाद

32. ’रस गन्धर्व’ के रचनाकार का नाम बतायें।💐मणिमधुकर

33. ’यमगाथा’ नाटक किसने लिखा है?💐दूधनाथ सिंह

34. ’यह पथ बंधु था’ किसकी रचना है?💐नरेश मेहता

35. ’ध्वन्यालोक’ ग्रन्थ किसकी रचना है?💐आनंद वर्धन

36. ’साहित्य दर्पण’ के रचयिता कौन हैं💐विश्वनाथ

हिन्दी साहित्य महत्वपूर्ण प्रश्न भाग -2

             महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रृंखला
                           (  एक )


साहित्य अकादमी का पहला अध्यक्ष कौन था? – जवाहरलाल नेहरू
• अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना कहां हुई? – प्रयाग
• साहित्य अकादमी की स्थापना कब की गई? – 1953 ई.
• अपभ्रंश के प्रथम महाकवि कौन थे? – स्वयंभू
• आधुनिक हिंदी एकांकी नाटकों का जनक किसे कहा जाता है? – रामकुमार वर्मा
• बंगला का विकास किस भाषा से हुआ? – मागधी
• नागार्जुन का वास्तविक नाम क्या है? – वैद्यनाथ मिश्र
• 'पृथ्वीराजरासो' का रचयिता किसे माना जाता है? – चंदबरदाई
• 1909 ई. में वृंदावनलाल वर्मा ने कौन सी कहानी लिखकर ऐतिहासिक कहानियों की परंपरा को जन्म दिया? – राखीबंद भाई
• सुरेंद्र वर्मा को 'मुझे चांद चाहिए' उपन्यास पर कौन सा सम्मान मिला है? – साहित्य अकादमी
• 'अँगरेज राज सुख साज सजै सब भारी। पै धन विदेस चलि जात यहै अति ख्वारी॥' ये पंक्तियां किस कवि की हैं? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• अंग्रेजी में लिखित पत्र-संग्रह 'पिता के पत्र पुत्री के नाम' में किसके पत्र संकलित हैं? – जवाहरलाल नेहरू
• अंग्रेजी राज के गुप्तचर विभाग में मैथिलीशरण गुप्त की किस कृति का अर्थ 'जनाना हिंदुस्तान' समझा गया? – भारत-भारती
• हिंदी साहित्य में 'कलम का सिपाही' किसे कहा गया? – प्रेमचंद
• 'अंजली' और 'श्रीपत' किस नाटक के पात्र हैं? – अंजो दीदी
• 'अंडे के छिलके' एकांकी किसका लिखा है? – मोहन राकेश
• 'अंधेर नगरी' किस प्रकार की कृति है? – प्रहसन
• अंबिका प्रसाद वाजपेयी द्वारा प्रकाशित-संपादित 'नृसिंह' किस प्रकार की पत्रिका थी? – राजनीतिक पत्रिका
• अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना कब की गई? – 1910 ई.
• भगवतीचरण वर्मा का प्रथम उपन्यास कौन सा है? – चित्रलेखा
• अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रथम सभापति कौन थे? – मदनमोहन मालवीय
• 'अच्छी हिंदी बस एक व्यक्ति लिखता था-बालमुकुंद गुप्त' यह कथन किसका है? – महावीर प्रसाद द्विवेदी
• 'अज्ञेय और आधुनिक रचना की समस्या' किसकी पुस्तक है? – रामस्वरूप चतुर्वेदी
• अज्ञेय का पूरा नाम क्या था? – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
• अज्ञेय के उपन्यास 'शेखर : एक जीवनी' का मूल मंतव्य क्या है? – स्वतंत्रता की खोज
• अज्ञेय के किस उपन्यास की प्रशंसा प्रकाशमान पुच्छल तारा' कहकर की गई? – शेखर : एक जीवनी
• अज्ञेय को किस कृति पर 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार' मिला? – कितनी नावों में कितनी बार
• अज्ञेय द्वारा संपादित 'तारसप्तक' श्रृंखला में कितने सप्तक प्रकाशित हुए? – चार
• 'अति सूधो सनेह को मारग है' किसकी उक्ति है? – घनानंद
• 'अधखिला फूल' किस प्रकार का उपन्यास है? – सामाजिक
• अधिकतर भारतीय भाषाओं की लिपियों का विकास किस प्राचीन लिपि से हुआ? – ब्राह्मी लिपि
• 'अनामदास का पोथा' उपन्यास किसका है? – हजारी प्रसाद द्विवेदी
• अनुसंधानपरक आलोचना का विकास किस पत्रिका के प्रकाशन से हुआ? – नागरी प्रचारिणी पत्रिका
• 'अपना-अपना भाग्य' कहानी का लेखक कौन है? – जैनेंद्र कुमार
• अपभ्रंश को 'पुरानी हिंदी' कहने वाले प्रथम लेखक कौन थे? – चंद्रधर शर्मा गुलेरी'
• 'अपोलो का रथ' किसकी रचना है? – श्रीकांत वर्मा
• 'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी।' ये पंक्तियाँ किसकी हैं? – मैथिलीशरण गुप्त
• 'अभिधा उत्तम काव्य है मध्य लक्षणा लीन। अधम व्यंजना रस विरस उलटी कहत नवीन।' यह स्थापना किसकी है? – देव
• 'अभ्युदय' के संपादक कौन थे? – मदनमोहन मालवीय
• 'अमिय हलाहल मद भरे स्वेत स्याम रतनार। जियत मरत झुकि-झुकि परत जेहि चितवत इक बार।' उपर्युक्त दोहा किस कवि का है? – रसलीन
• अमीर खुसरो किस तरह की रचनाओं के लिए प्रसिद्ध रहे हैं? – पहेलियां-मुकरियां
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' किस युग के कवि हैं? – द्विवेदी युग
• 'अरे यायावर! रहेगा याद' किसकी रचना है? – अज्ञेय
• 'अर्द्धनारीश्वर' उपन्यास किसने लिखा है? – विष्णु प्रभाकर
• 'अर्धकथानक' किसकी रचना है? – बनारसीदास जैन
• अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक कौन हैं? – भामह
• 'अलग-अलग वैतरणी' उपन्यास किसने लिखा है? – शिवप्रसाद सिंह
• अवधी बोली का केंद्र स्थान क्या है? – अयोध्या
• 'अशोक के फूल' निबंध-संग्रह किसका है? – हजारी प्रसाद द्विवेदी
• अशोक वाजपेयी ने किस पत्रिका का संपादन किया है? – पूर्वग्रह
• अश्लील साहित्य के विरुद्ध 'घासलेटी साहित्य' विरोधी आंदोलन किसने चलाया? – बनारसीदास चतुर्वेदी
• 'अष्टछाप' की स्थापना कब हुई? – 1565 ई.
• 'अष्टछाप' के दार्शनिक गुरु कौन हैं? – वल्लभाचार्य
• 'अस्तित्ववाद' के कला संबंधी रूप के पोषक कौन हैं? – सार्त्र
• आंचलिकता को कथा-साहित्य की एक विशेष प्रवृत्ति के रूप में प्रतिष्ठापित करने का श्रेय किसे दिया जाता है? – फणीश्वरनाथ 'रेणु'
• 'आंसू की बालिका' किस कवि की रचना है? – सुमित्रानंदन पंत
• 'आगे के कवि रीझिहैं तो कविताई न तौ राधिका कंहाई सुमिरन को बहानो है।' ये पंक्तियां किस कवि की हैं? – भिखारीदास
• आचार्य आनंदवर्धन ने किसे 'काव्यात्मा' स्वीकार किया है? – ध्वनि
• आचार्य क्षेमेंद्र ने किस सिद्धांत का प्रवर्तन किया है? – औचित्य
• आचार्य भामह ने 'कथा' का सूक्ष्म विवेचन करके कहानी के लिए क्या नाम दिया? – आख्यायिका
• आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका के माध्यम से हिंदी गद्य को परिष्कृत और परिमार्जित किया? – सरस्वती
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल का इतिहास ग्रंथ 'हिंदी साहित्य का इतिहास' स्वतंत्र पुस्तक से पूर्व किस रूप में प्रकाशित हुआ था? – हिंदी शब्द सागर की भूमिका
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल का निबंध-संकलन 'चिंतामणि' नाम से कितने भागों में प्रकाशित हुआ? – तीन
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल की कहानी 'ग्यारह वर्ष का समय' पहले किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी? – सरस्वती
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पहली सैद्धांतिक आलोचनात्मक पुस्तक कौन सी है? – काव्य में रहस्यवाद
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार भक्तिकाल का सीमांकन कहां से कहां तक है? – 1318-1643 ई.
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रीतिकाल का सीमांकन क्या है? – 1643-1843 ई.
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार हिंदी का प्रथम महाकाव्य कौन सा है? – पृथ्वीराजरासो
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अंग्रेजी ढंग का पहला मौलिक उपन्यास किसे माना है? – परीक्षा गुरु
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को किस नाम से अभिहित किया? – वीरगाथाकाल
• आचार्य रुद्रट ने किस रीति का आविष्कार किया? – लाटी
• आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने 'गाथा' को किस भाषा का मुख्य छंद माना है? – प्राकृत
पंक्तियों से जयशंकर प्रसाद की किस कृति का आरंभ हुआ है? – आंसू
• 'उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण' किसकी रचना है? – दामोदर शर्मा
• 'उड़ते चलो, उड़ते चलो' किसकी रचना है? – रामवृक्ष बेनीपुरी
• उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का वर्ष 1998 का 'लोहिया साहित्य सम्मान' किस साहित्यकार को प्रदान किया गया? – विष्णुकांत शास्त्री
• उत्तर भारत की खड़ी बोली हिंदी दक्षिण में किस रूप में विकसित हुई? – दक्कनी हिंदी
• 'उदंत मार्तंड' किस प्रकार का पत्र था? – साप्ताहिक
• 'उदंत मार्तंड' का प्रकाशन कब बंद हुआ? – 1827 ई.
• 'उदंत मार्तंड' के प्रथम संपादक कौन थे? – जुगुल किशोर सुकुल
• 'उनका गद्य मुरदे में कफन फाड़कर उठ बैठने की शक्ति संचारित करता है।' यह कथन किस रचनाकार के लिए कहा गया? – महादेवी वर्मा
• उपेंद्रनाथ अश्क' का जन्म कहां हुआ था? – जालंधर
• उपेंद्रनाथ 'अश्क' के किस नाटक में समझौतावादी और विद्रोहिणी नारी का चित्रण किया गया है? – अलग-अलग रास्ते
• 'उर्वशी' का रचनाकार कौन है? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• ऋत-वर्णन के लिए विशेषत: रीतिकाल का कौन सा कवि प्रसिद्ध है? – सेनापति
• 'ए लड़की' कहानी किस लेखक की है? – कृष्णा सोबती
• 'एक बूंद सहसा उछली' का लेखक कौन है? – अज्ञेय
• 'एकलव्य के नोट्स' किसकी रचना है? – फणीश्वरनाथ 'रेणु'
• 'एकांतवासी योगी' नाम से 'हरमिट' का अनुवाद किसने किया? – श्रीधर पाठक
• ऐतिहासिक उपन्यासों की परंपरा की शुरुआत करने का श्रेय किसे दिया जाता है? – वृंदावनलाल वर्मा
• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर किस रचनाकार ने कहानियां लिखीं? – जयशंकर प्रसाद
• औरंगजेब के ऐतिहासिक पत्रों का संकलन किस शीर्षक से हुआ? – आलमगीर के पत्र
• 'कठिन काव्य का प्रेत' किस कवि को कहा गया है? – केशव
• कथा क्षेत्र में जो स्थान प्रेमचंद का है, वही स्थान नाटक के क्षेत्र में किस साहित्यकार को प्राप्त है? – जयशंकर प्रसाद
• कथा-साहित्य में किस रचनाकार को 'कृषक संस्कृति का प्रमुख गायक' कहा गया है? – प्रेमचंद
• 'कनुप्रिया' किसकी रचना है? – धर्मवीर भारती
• 'कबिरा खड़ा बाजार में' नाटक किसकी रचना है? – भीष्म साहनी
• कबीर किसके शिष्य थे? – रामानंद
• 'करुणा भरण' नाटक किसकी रचना है? – लछिराम
• कर्नल टॉड की जीवनी किस लेखक ने लिखी है? – गौरीशंकर ओझा
• 'कर्म है अपना जीवन प्राण, कर्म पर हो जाओ बलिदान'-यह पंक्ति किस पत्र का संपादकीय आदर्श थी? – कर्मवीर
• 'कल सुनना मुझे' कविता संग्रह किसका है? – धूमिल
• 'कलम का मजदूर' किसकी रचना है? – अमृतराय
• 'कलम का सिपाही' किसकी रचना है? – अमृत राय
• 'कला और बूढ़ा चांद' किसकी रचना है? – सुमित्रानंदन पंत
• 'कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए। एक हिलोर इधर से आए एक हिलोर उधर से आए ।' इन पंक्तियों के रचयिता कौन है? – बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
• कवि समय का सर्वप्रथम सम्यक् निरूपण किस आचार्य ने किया है? – राजशेखर
• 'कविकुल कल्पतरु' किसकी रचना है? – चिंतामणि
• कविता के क्षेत्र में आधुनिक मीरा' किसे कहा गया? – महादेवी वर्मा
• 'कविता क्या है' शीर्षक निबंध किसका है? – रामचंद्र शुक्ल
• कविता में सामाजिक यथार्थवाद के नाम पर कौन सा आंदोलन चलाया गया? – प्रगतिवाद
• 'कवितावली' के रचयिता कौन है? – तुलसीदास
• 'कविवचनसुधा' पत्र कहां से प्रकाशित हुआ? – काशी
• 'कविवचनसुधा' पत्रिका का प्रकाशन किस साहित्यकार ने आरंभ किया? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• 'कविवचनसुधा' में प्रकाशित यह प्रतिज्ञा-पत्र 'हम लोग आज के दिन से कोई विलायती कपड़ा न पहिनेंगे।' किस रचनाकार का है? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• 'कहानी' पत्रिका का प्रकाशन कब शुरू हुआ? – 1955 ई.
• कहानीकार अमृत राय किस प्रसिद्ध कथाकार के सुपुत्र थे? – प्रेमचंद
• 'कहानी-नई कहानी' पुस्तक का लेखक कौन है? – नामवर सिंह
• कहानी-संग्रह 'इंद्रजाल' किस लेखक का है? – जयशंकर प्रसाद
• काका कालेलकर का पूरा नाम क्या था? – दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर
• काका कालेलकर द्वारा लिखित जीवनी ग्रंथ कौन सा है? – बापू की झाँकियाँ
• काका कालेलकर द्वारा संपादित पत्र-संकलन कौन सा है? – बापू के पत्र
• 'काबा और कर्बला' किसकी रचना है? – मैथिलीशरण गुप्त
• कालिदास के जीवन पर आधारित नाटक कौन सा है? – आषाढ़ का एक दिन
• 'काव्य की रीति सिख्यौ सुकवीन्ह सौं' यह पंक्ति किस कवि की है? – भिखारीदास
• 'काव्य में अभिव्यंजनावाद' पुस्तक किसने लिखी है? – लक्ष्मीनारायण 'सुधांशु'
• 'काव्यनिर्णय' ग्रंथ किस कवि का है? – भिखारीदास
• 'काव्यमीमांसा' की रचना किसने की है? – राजशेखर
• काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य किसे माना जाता है? – भरत मुनि
• काव्यशास्त्र के संप्रदायों में परंपरा से कौन सा संप्रदाय सबसे प्राचीन माना जाता है? – रस संप्रदाय
• काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा 'हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास' कितने खंडों में प्रकाशित किया गया? – अठारह
• 'काशी सार्वजनिक सभा' तथा 'कवितावर्द्धिनी' संस्थाओं की स्थापना किसने की? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• काशी से प्रकाशित किस मासिक पत्रिका में जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ नियमित रूप से प्रकाशित होती थीं? – हिंदी गल्पमाला
• 'किन्नर देश में यात्रावृत्त किसका है? – राहुल सांकृत्यायन
• किस आचार्य की गणना वैष्णव भक्ति के प्रतिष्ठापक आचार्यों में नहीं की जाती? – हरिदास निरंजनी
• किस आलोचक ने आदिकाल को बीजवपन काल' नाम से अभिहित किया है? – महावीर प्रसाद द्विवेदी
• किस आलोचक ने बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र को हिंदी का 'स्टील' और 'एडीसन' कहा है? – रामचंद्र शुक्ल
• किस उपन्यास को पूरा करने से पूर्व प्रेमचंद का निधन हो गया? – मंगलसूत्र
• किस उपन्यास को राजेंद्र यादव और मन्नू भंडारी ने मिलकर लिखा है? – एक इंच मुसकान
• किस उपन्यास में 'अलिफ लैला' और 'पंचतंत्र' के ढंग पर लिखी गई सात अलग-अलग कहानियां किस्सागो के व्यक्तित्व से जुड़कर उपन्यास बन जाती हैं? – सूरज का सातवां घोड़ा
• किस उपन्यास में मिथिला की विशिष्ट भंगिमा है? – बाबा बटेसर नाथ
• किस उपन्यास में यात्रीशाला में ठहरे हुए यात्रियों की एक रात की जिंदगी का वर्णन है? – सोया हुआ जल
• किस उपन्यास में व्यक्ति के मन की शंकाओं, उलझनों और गुत्थियों का चित्रण है? – परख
• किस कथाकार की पत्नी ने भी कहानियां लिखीं? – प्रेमचंद
• किस कथाकार को हिंदी का शरत्' कहा गया है? – जैनेंद्र कुमार
• किस कवयित्री को 'हिंदी के विशाल मंदिर की वीणापाणि' कहा गया है? – महादेवी वर्मा
• किस कवि की कविता की हृदय-वेधकता को लक्ष्य करके उसे 'नावक के तीर' कहा गया? – बिहारी
• किस कवि को आधुनिक हिंदी साहित्य का 'बापू' कहा गया है? – सियारामशरण गुप्त
• किस कवि को 'एक भारतीय आत्मा' कहा गया? – माखनलाल चतुर्वेदी
• किस कवि को ब्रजकोकिल' कहा जाता था? – सत्यनारायण कविरत्न
• किस कवि को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि से विभूषित किया गया है? – मैथिलीशरण गुप्त
• किस कवि को 'सहजता का कवि' कहा जाता है? – भवानी प्रसाद मिश्र
• किस कवि ने गांव-गांव, घर-घर घूमकर रात-रात भर घरों के पिछवाड़े बैठकर सोहर और विवाह गीतों को चुन-चुनकर उनसे कविता कौमुदी' संकलन तैयार किया? – रामनरेश त्रिपाठी
• किस कवि ने घोषणा की-'जाग्रत युग के स्वप्न फूलों से नहीं, चिनगारियों से सजाए जाते हैं? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस कवि ने 'मैंने मैं शैली अपनाई' का दावा किया? – निराला
• किस कवि ने मैथिलीशरण गुप्त के सामने स्वयं को 'महज डिप्टी राष्ट्रकवि' माना? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस कवि ने स्वयं को 'छायावाद की ठीक पीठ पर' आनेवाला माना? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस कहानीकार की कहानियां गहन मनोवैज्ञानिक पकड़' के लिए विख्यात हैं? – इलाचंद्र जोशी
• किस कहानीकार ने अपनी कहानियों में मुख्यत: व्यक्ति के आत्मसंघर्ष का चित्रण किया है? – अज्ञेय
• किस कहानीकार ने कहानी को 'गमले में लगा फूल का पौधा' बताया? – प्रेमचंद
• किस काल की कहानियां मध्यकालीन प्रेमकथाओं, लोककथाओं तथा स्वप्नकथाओं पर आधारित थीं? – प्रेमचंदपूर्व
• किस काव्य को 'चिपकाव्य' भी कहा गया है? – अधम काव्य
• किस काव्यधारा के अंतर्गत मूर्तिपूजा और अवतारवाद का विरोध किया गया है? – संत काव्यधारा
• किस कृति से 'आत्मकथा' विधा का प्रारंभ माना जाता है? – अर्धकथानक
• किस दौर की कविता ने 'अंबर' के स्थान पर 'धरती' की बात पर बल दिया? – प्रगतिवाद
• किस नाटककार ने नाटकों को पहली बार रूमानियत के घेरे से बाहर निकालकर आधुनिकता-बोध के साथ जोड़ा? – उपेंद्रनाथ 'अश्क'
• किस निबंध-रचना में कर्जन के भारत-विरोधी कारनामों पर व्यंग्यात्मक शैली में प्रहार किया गया है? – शिव शंभू के चिट्ठे
• किस निबंध-संग्रह में समीक्षात्मक निबंध संकलित हैं? – आस्था के चरण
• किस पत्र ने हिंदी के पहले व्यंग्य पत्र के रूप में लोकप्रियता प्राप्त की? – मतवाला
• किस पत्रिका के एकांकी नाटक विशेषांक ने एकांकी लेखन को विवादास्पद बना दिया? – हंस
• किस पत्रिका ने हिंदी कहानी के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई? – सरस्वती
• किस पत्रिका में 'हम इनसे मिले थे' शीर्षक स्थायी स्तंभ के अंतर्गत साक्षात्कार प्रकाशित हुए? – नई धारा
• किस पाश्चात्य आलोचक ने काव्य के मनोवैज्ञानिक मूल्य का सिद्धांत प्रस्तुत किया है? – आई.ए. रिचर्ड्स
• किस रचनाकार को 'परतंत्र भारत का वास्तविक वैतालिक' कहा गया है? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस 'रामायण' को आदिकाव्य मानकर रामकथा के मूल स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाता है? – वाल्मीकि रामायण
• किस रूसी साहित्यकार ने रिपोर्ताज विधा का प्रचार-प्रसार किया? – इलिया एहरेनबुर्ग
• किस शताब्दी को हिंदी का प्रचार युग' कहा जाता है? – उन्नीसवीं शताब्दी
• किस संप्रदाय में कृष्ण के वामांग में राधा के साथ कृष्ण की उपासना का विधान है? – निंबार्क संप्रदाय
• किस संस्कृत काव्य में पहले कृष्णलीलाओं का उल्लेख मिलता है? – ब्रह्मचरित
• किसके नवीन छंद को देखकर 'रबर छंद' कहकर मजाक उड़ाया गया? – निराला
• किसने 'धर्मयुग' का संपादन किया है? – धर्मवीर भारती
• किसे प्रथम बार 'भारत भारती सम्मान' प्रदान किया गया? – महादेवी वर्मा
• 'कीर्तिलता' और 'कीर्तिपताका' किस कवि की रचनाएं हैं? – विद्यापति
• 'कुंदन को रंग फीकौ लगे' किसकी पंक्ति है? – मतिराम
• कुंवर नारायण को उनकी किस कृति पर 'व्यास सम्मान' प्रदान किया गया? – कोई दूसरा नहीं
• 'कुकुरमुत्ता' किसकी रचना है? – निराला
• 'कुरुक्षेत्र' किसकी रचना है? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• 'कुल्ली भाट' किसकी रचना है? – निराला
• 'कुसुम कुमारी' उपन्यास किसने लिखा था? – देवकीनंदन खत्री
• कृष्ण काव्य की अपार संपदा किस भाषा में है? – ब्रजभाषा
• 'कृष्ण की आत्मकथा' उपन्यास का लेखक कौन है? – मनु शर्मा
• कृष्ण की सरस क्रीड़ाओं का वर्णन करनेवाला प्रख्यात ग्रंथ कौन सा है? – गीतगोविंद
• 'कृष्ण गीतावली' का रचयिता कौन है? – तुलसीदास
• कृष्णबिहारी मिश्र ने अपनी पुस्तक 'देव और बिहारी' में आलोचना की कौन सी पद्धति अपनाई है? – तुलनात्मक
• 'कृष्णार्जुन युद्ध' नाटक किसने लिखा है? – माखनलाल चतुर्वेदी
• केशवदास की किस रचना की गणना 'लक्षण ग्रंथ' के अंतर्गत की जाती है? – कविप्रिया
• 'केसव कहि न जाइ का कहिए' पंक्ति किस कवि की है? – तुलसीदास
• 'कैदी और कोकिला' रचना किस रचनाकार की है? – माखनलाल चतुर्वेदी
• 'कोठरी की बात' कहानी किसकी है? – अज्ञेय
• 'कोणार्क' नाटक किस लेखक का लिखा हुआ है? – जगदीश चंद्र माथुर
• 'कोशल केसरी' की संज्ञा से किस नाटककार को विभूषित किया गया है? – सेठ गोविंद दास
• कौन सा कहानी आंदोलन फ्रांसीसी साहित्य के 'एंटी स्टोरी' का अनुकरण है? – अकहानी
• कौन से कवि अपनी घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के लिए प्रसिद्ध हैं? – नागार्जुन
• 'क्या भूलें, क्या याद करूं' में किस रचनाकार की आत्मकथा वर्णित है? – हरिवंशराय बच्चन
• क्रोचे के अभिव्यंजनावाद की तुलना भारतीय काव्यशास्त्र के किस सिद्धांत से की गई है? – वक्रोक्ति सिद्धांत
• क्रोचे के अभिव्यंजनावाद को किस आलोचक ने भारतीय वक्रोक्तिवाद का विलायती उत्थान' माना है? – रामचंद्र शुक्ल
• 'क्वासि' किसकी रचना है? – बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
• खड़ी बोली का दूसरा नाम क्या है? – कौरवी
• खड़ी बोली का प्रयोग साहित्यिक हिंदी खड़ी बोली के अर्थ के अतिरिक्त किस अर्थ में होता है? – दिल्ली-मेरठ के आस-पास की लोक बोली के अर्थ में
• खड़ी बोली निबंधों के भीतर से अवधी, बैसवाड़ी या ब्




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