रविवार, 22 मार्च 2026

कामायनी के सन्दर्भ में विद्वानों का कथन

यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

कामायनी के सन्दर्भ में विद्वानों का कथन

“वर्तमान हिंदी कविता में दुर्लभ कृति” – हजारी प्रसाद द्विवेदी
“विश्व साहित्य का आठवाँ काव्य ” – श्याम नारायण
“आधुनिक हिंदी कविता का रामचरित मानस” – रामनाथ सुमन
“विराट सामंजस्य की सनातन गाथा” – विश्वम्भरनाथ मानव
“आर्ष ग्रन्थ” – डॉ. नागेन्द्र
“आधुनिक हिंदी काव्य का सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रन्थ” – शुक्ल जी
“मधुरस से सिक्त महाकाव्य” – रामरतन भटनागर
“मानवता का रसात्मक इतिहास” – नन्द दुलारे वाजपेयी
“कामायनी समग्रता में समासोक्ति का विधान लक्षित करती है” – डा. नागेन्द्र
“इसकी अन्तेर्योजना त्रुटिपूर्ण और समन्वित प्रभाव की दृष्टि से दोषपूर्ण है” – शुक्ल जी
“छायावाद का उपनिषद” – शांतिप्रिय द्विवेदी
“फंतासी कृति” – मुक्तिबोध
“एक क्म्पोजीसन” – रामस्वरूप चतुर्वेदी
“यह अपने आप में चिति का विराट वपु मंगल है – डॉ. बच्चन सिंह
सर्वोत्तम महाकाव्य है- हरदेव बाहरी
1. कामायनी मानव चेतना का महाकाव्य है।यह आर्ष ग्रन्थ है।–नगेन्द्र
2. कामायनी फैंटेसी है।- मुक्तिबोध
3.कामायनी एक असफल कृति है।- इन्द्रनाथ मदान
4. कामायनी नये युग का प्रतिनिधि काव्य है।- नन्द दुलारे वाजपेयी
5.कामायनी ताजमहल के समान है- सुमित्रानन्दन पंत
6.कामायनी एक रूपक है- नगेन्द्र
7.कामायनी विश्व साहित्य का आठवाँ महाकाव्य है- श्यामनारायण
8. कामायनी दोष रहित दोषण सहित रचना रामधारी सिंह दिनकर
9. कामायनी समग्रतः में समासोक्ति का विधान लक्षित करती है- डॉ नगेन्द्र
10. कामायनी आधुनिक सभ्यता का प्रतिनिधि महाकाव्य है- नामवार सिंह
11. कामायनी आधुनिक हिन्दी साहित्य का सर्वोत्तम महाकाव्य है- हरदेव बाहरी
12.कामायनी मधुरस से सिक्त महाकाव्य है- रामरतन भटनाकर
13. कामायनी विराट सांमजस्य की सनातन गाथा है -विशवंभर मानव
14.कामायनी का कवि दूसरी श्रेणी का कवि है -हजारी प्रसाद द्विवेदी
15. कामायनी वर्तमान हिन्दी कविता में दुर्लब कृति है- हजारी प्रसाद द्विवेदी
16. कामायनी में प्रसाद ने मानवता का रागात्मक इतिहास प्रस्तुत किया है जिस प्रकार निराला ने तुलसीदास के मानस विकास का बड़ा दिव्य और विशाल रंगीन चित्र खिंचा है-रामचन्द्र शुक्ल
17. कामायनी छायावाद का उपनिषद है- शांति प्रिय द्विवेदी
18.कामायनी को कंपोजिशन की संज्ञा देने वाले-रामस्वरूप चतुर्वेदी
19.मुक्तिबोध का कामायनी संबंधि अध्ययन फूहड़ मारक्स वाद का नमूना है-बच्चन सिंह
20.कामायी जीबन की पूनर्रचना है -मुक्तिबोध
21.कामायनी मनोविज्ञान की ट्रीटाइज है -नगेन्द्र
22.कामायनी आधुनिक समीक्षक और रचनाकार दोनों के लिए परीक्षा स्थल है -रामस्वरूप चतुर्वेदी

कामायनी महाकाव्य से सम्बन्धित महत्वपूर्ण तथ्य 

✍️सर्ग 15
👉मुख्य छंद – तोटक
👉कामायनी पर प्रसाद को मंगलाप्रसाद पारितोषिक पुरस्कार मिला है
👉काम गोत्र में जन्म लेने के कारण श्रद्धा को कामायनी कहा गया है।
👉कामायनी के पांडूलिपी संस्करण का प्रकाशन 1971 में हुआ।
👉प्रसाद ने कामायनी में आदिमानव मुन की कथा के साथ साथ युगीन समस्याओं पर प्रकाश डाला है।
👉कामायनी का अंगीरस शांत रस है।
👉कामायनी दर्शन समरसता – आनन्दवाद है।
👉कामायनी की कथा का आधार ऋग्वेद,छांदोग्य उपनिषद् ,शतपथ ब्राहमण तथा श्री मद्भागवत हैं।
👉घटनाओं का चयन शतपथ ब्राह्मण से किया गया है।
👉कामायनी की पूर्व पीठिका प्रेमपथिक है।
👉कामायनी की श्रद्धा का पूर्व संस्करण उर्वशी है।
👉कामायनी का हृदय लज्जा सर्ग है।

यू पी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य -9

यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य


1- सम्पूर्ण साहित्य को फैंटेसी का एक प्रकार कहा है ?
-- फ्रायड ने
2- कृति को फैंटेसी की पुत्री कहा है ?
-- मुक्तिबोध ने
3- फैंटेसी को अनुभव की कन्या कहा है ?
-- मुक्तिबोध ने
4- "फैंटेसी एक झीना पर्दा है जिसमें जीवन तथ्य झांक उठते है" कथन है?
-- मुक्तिबोध का
5- प्रसाद कृत कामायनी को विशाल फैंटेसी माना है ?
-- मुक्तिबोध ने

6- मुक्तिबोध की कौनसी रचना "एक विराट स्वप्न फैंटेसी" मानी जाती है ?
-- अंधेरे में
7- मुक्तिबोध का फैंटेसी लेखन का प्रयोजन है ?
-- दोषयुक्त मानव या संसार के प्रति नवीन दृष्टिकोण से विचार करना
8- "वह फैंटेसी ही क्या जिसमें ---------- न हो " मुक्तिबोध के इस कथन में रिक्त स्थान में आऐगा ?
-- असंगति
9- मुक्तिबोध ने अपनी किस कृति में फैंटेसी की विवेचना की है ?
-- "एक साहित्यिक की डायरी" में
10- "फैंटेसी में मन की निगूढ वृत्तियों का, अनुभूत जीवन समस्याओं का और इच्छित जीवन स्थितियों का प्रक्षेप होता है। --------" कथन है ?
-- मुक्तिबोध का

11- "फैंटेसी मनोविज्ञान का शब्द है,"
-- डा बच्चन सिंह
12- फैंटेसी का संबंध स्वप्न और अचेतन मन में घटित होने वाली घटनाओं की विघटित और बेतरतीब बिम्बावलियों से किसने माना है ?
-- डा बच्चन सिंह ने
13- देवकीनंदन खत्री के फैंटेसी लेखन का उद्देश्य है ?
-- 1- मनोरंजन 2- यथार्थ जीवन से पलायन
14- फैंटेसी है ?
-- स्वप्नचित्रमूलक साहित्य
15- फैंटेसी का मुख्य आधार है ?
-- कल्पना

16- दिवास्वप्नात्मक अथवा दुःस्वप्नात्मक मानसिक बिम्ब कहा जाता है ?
-- फैंटेसी को
17- कालरिज ने कल्पना के कितने भेद माने है ?
-- 2 ( प्राथमिक कल्पना और विशिष्ट कल्पना )
18- फैंटेसी का सम्बन्ध होता है ?
-- अचेतन मन से
19- किसकी कृतियों में फैंटेसी, लयात्मकता एवं जीवंतता का अद्भूत संगम दिखता है ?
-- रवीन्द्रनाथ ठाकुर की
20- फैंटेसी कभी रूढ नहीं होती है। यह कथन है ?
-- सत्य

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

प्रसिद्ध पंक्तियां

कवियों एवं लेखको की प्रसिद्ध पंक्तियां 


०1. ’तोडने ही होंगे मठ और गढ सब’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– मुक्तिबोध
०2. ’द्रुत झरो जगत के जीर्णपत्र’ पंक्ति के रचनाकार
कौन हैं?
उत्तर——– सुमित्रानन्दन पन्त
०3. ’उत्तर प्रियदर्शी’किसकी गीति-नाट्य
रचना है?
उत्तर——– अज्ञेय
०4. ’केसव कहि न जाइका कहिए! देखत तब
रचना बिचित्र अति,समुझि मनहि मन रहिए!’
किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– तुलसीदास
०5. ’रावरे रूपको रीति अनूप,
नयो नयो लागतज्यों ज्यों निहारिये’ -किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– घनानन्द

०6. प्रसिद्ध हिन्दी पत्रिका ’कल्पना’ कहॉं से प्रकाशित
होती थी?
उत्तर——– हैदराबाद
०7. ’कोमल गांधार’ नाटक के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर——– शंकर शेष
०8. ’मुक्ति का रहस्य’नाटक किसकी कृति है?
उत्तर——– लक्ष्मीनारायण मिश्र
०10. ’हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’
किसकी कृति है?
उत्तर——– गणपतिचन्द्र गुप्त

०11. ’हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक
इतिहास’ के रचनाकार कौन हैं?
उत्तर——– डॉ0 रामकुमार वर्मा
०12. ’हिन्दी साहित्य की संवेदना का विकास’
किसकी रचना है?
उत्तर——-
रामस्वरूप चतुर्वेदी
०13. ’कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ जिससे उथल पुथल मच
जाए’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– बालकृष्ण शर्मा नवीन
०14. मध्यवाचार्य किस सम्प्रदाय के संस्थापक हैं?
उत्तर——– द्वैतवाद
०15. किन रचनाकारों की भाषा को
संधा भाषा कहा गया?
उत्तर——– बौद्ध-सिद्ध

०16. ’धिक् जीवन जो पाता ही आया विरोध
’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– निराला
०17. ’दुःखवा मैं कासे कहूँ मोरी सजनी’
किसकी कहानी है?
उत्तर——– चतुरसेन शास्त्री
०18. ’मधुप गुनगुना कर कह जाता’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– जयशंकर प्रसाद
०19. ’मर्द साठे पर पाठे होते हैं।’ किसकी उक्ति है?
उत्तर——– प्रेमचंद
०20. ’ये उपमान मैले हो गये हैं’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– अज्ञेय
यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य
०21. ’हम राज्य लिये मरते हैं’ किसकी काव्य-पंक्ति है?
उत्तर——– मैथिलशरण गुप्त
०22. ’हिन्दी व्याकरण’ किसकी रचना है?
उत्तर——– कामताप्रसाद गुरु
०23.’हिन्दी शब्दानुशासन’ किसने लिखा है?
उत्तर——– किशोरीदास वाजपेई
०24.’हिन्दी भाषा का उद्भव और विकास’ किसकी रचना है?
उत्तर——– उदय नारायण तिवारी
०25. ’देवीदीन’ मुंशी प्रेमचन्द के किस
उपन्यास का पात्र है?
उत्तर——– गबन

०26. ’प्रैक्टिकल क्रिटिसिज्म’ किसका ग्रन्थ है?
उत्तर——– रिचर्ड्स
०27. ’सेक्रेड वुड’ किसकी रचना है?
उत्तर——– टी.एस. इलियट
०28. ’लिरिकल बैलेडस’ किसने लिखा है?
उत्तर——– विलियम वर्ड्सवर्थ
०29. ’पोयटिक्स’ किसकी कृति है?
उत्तर——– अरस्तू
०30. ’जात पांत पूछै नहिं कोई’ किसकी पंक्ति है?
उत्तर——– रामानन्द
०31. ’प्रेम प्रेम ते होय प्रेम ते पारहिं पइए’ पंक्ति के
रचनाकार कौन हैं?
उत्तर——– सूरदास
०32. ’आधुनिक काल में गद्य का आविर्भाव सबसे प्रधान
घटना है’ किसका कथन है?
उत्तर——– आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
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'अन्तरात्मा की पुकार' एक विवेचन


'अन्तरात्मा की पुकार' एक विवेचन 

                                               आलोक मणि त्रिपाठी 
                                                       प्रवक्ता हिन्दी 
                         


कवि और उसके काव्य का विवेचन और मूल्यांकन कई स्तरो पर किया जा सकता है और यह भी सच है कि विभिन्न समयों और युग-प्रवृत्तियो के प्रभाव से उक्त विवेचन और मूल्यांकन परिर्वतन भी होते रहते हैं। परन्तु इन अनिवार्य परिवर्तनों के रहते हुए भी कवि की मूल वस्तु के स्वरूप और उसके स्वरूप और उसके काव्योत्कर्ष के सम्बन्ध में कुछ स्थाई और अपरिवर्तनीय धारणाएं भी रहा करती है। इन धारणाओं की पुष्टि करना आवश्यक होता है अन्यथा किसी भी कवि के सम्बन्ध में राष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का स्थिरीकरण नहीं हो पाता है।
पंडित श्री राम बरन त्रिपाठी का जन्म 7-जुलाई-1938 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सुजानगंज ब्लॉक में दहेव ग्राम में हुआ था। पं त्रिपाठी जी की माता का नाम स्वर्गीय श्री मती इसराजी देवी और पिता का नाम स्वर्गीय श्री लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी था। जब त्रिपाठी जी की आयु दस वर्ष थी तभी इनके पिता की मृत्यु हो गई। पंडित श्री लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अपने पीछे दो पुत्रियां और एक पुत्र को छोड़ कर इस लोक से विदा हुए। 
पं रामबरन त्रिपाठी की शिक्षा गांव के ही प्रथमिक विद्यालय से आरंभ हुई थी। उन्होंने तत्कालीन संस्कृत साहित्य और हिन्दी साहित्य का अध्ययन किया था। वे एक अच्छे चित्रकार और बांसुरी वादक भी भी थे । रामलीला , कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर इनकी बनाई हुई कलाकृतियां सब को अपनी ओर आकृष्ट किए बिना नहीं रहती थी। बालकाल से ही कविता करने लगे थे । इनकी कविताओं में कबीर , जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध की सी मिठास देखने को मिलता है। वे आरम्भ से ही विद्रोही कवि के रूप में दिखाई पड़ते हैं। गतानुगतिकता के प्रति तीव्र विद्रोह उनकी कविताओं में आदि से अंत तक बना रहा है। व्यक्तित्व की जैसी निर्बाध अभिव्यक्ति उनकी रचनाओं में हुआ है वैसा आज के आधुनिक कवियों कम दिखाई देता है। त्रिपाठी जी ने भावनाओं को कोमलता प्रदान करने का प्रयत्न नहीं किया है फिर भी इनकी रचनाओं में भाव कोमलता सर्वत्र व्याप्त है।
 सर्वत्र अभिव्यक्ति की अत्यंत निर्बाध रूप प्रदर्शित होता है। त्रिपाठी जी की प्रतिभा बहुमुखी है। उन्होंने कविताएं तो लिखी ही है, निबंध , आलोचना, उपन्यास , कहानी आदि भी लिखा है। व्यंग और कटाक्ष को वे नहीं भूलते लेकिन कथा काव्य के प्रति उनका झुकाव अधिक है। उनका महाकाव्य 'दिव्यालोक 'और 'क्रौंचवध ' कथानक उनके अंतरात्मा की उमड़ती हुई आवेगों को प्रदर्शित करती है। अनुभूति की तीव्रता के कारण उनके अंदर के आवेग बहुत वेगवान होकर प्रकट हुए हैं , कोमलकांत पदावली, छंदोबद्ध योजना,विशुद्ध गीतिकाव्यात्मकता और अलंकार योजना ने उनके काव्य को सहृदय विद्वानों के द्वारा सदैव ही सम्मान मिलता रहा है।
त्रिपाठी जी की कविताएं साधारण पाठकों को दुर्बोध मालूम नहीं होती है। इसका कारण यह है कि कवि अपने आवेगों को संयत रखकर लिखता है। कवि को एक बात कहते - कहते कभी - कभी दूसरी बात याद आ जाती है तब वहां कवि अपने आयोगों को अंकुश नहीं रख सका है। अंकुश वह रख सकता है जो भावो को सजाने का प्रयास करता है। कवि त्रिपाठी जी यह नहीं करते इसलिए उनके भावों की अविरल धारा में प्रायः सभी प्रसंग आ जाते हैं जो पाठक की दृष्टि में प्रासंगिक है। कवि की इसी प्रतिभा ने उसे अधिक लोकप्रिय बना दिया।
इस पुस्तक में कवि की पहली रचना -'वाणी वंदना' में मानवतावादी राष्ट्रप्रेम का भाव दिखाई देता है । कवि मां शारदे से आग्रह करता है -
कृषकों के कुदाल खुरपी पर 
अम्ब!फेर अपने सशक्त कर
श्रमिक वर्ग में नवल तेज भर
****************
   भारत के वीरों में जाकर ।
   मां शस्त्रास्त्रों में प्रलयंकर
   भर दे ओज अपूर्व प्रखरतर
जिससे कांपे अरि दल थर -थर।।
कवि का सम्पूर्ण जीवन ग्रामीण परिवेश में बीता है गांव के प्राकृतिक स्वरूप सहज सामान्य वातावरण ने कवि को अपने में डुबा लिया है। कोयल , पपीहा, मोर ,मैना, तोता पीपल ,बरगद,टेंसू के साथ - साथ उदित और अस्ताचल सूर्य का पूर्ण विम्ब ये सब मिलकर कवि को सौन्दर्य की नवीन अनुभूति तथा दीप्ति प्रदान करते हैं। कवि प्रकृति के समक्ष नतमस्तक होकर स्वयं को कृतार्थ अनुभव करता है। इसी यथार्थ बोध ने कवि में एक नवीन आस्था को जन्म दिया है इसी नवीन आस्था के वशीभूत होकर कवि उस थोपी हुई तथाकथित पर व्यंग करता है।

"बालारूण निरख-निरख कर , वह कल कपोल की लाली ।
अपमानित हो छिप जाता, खो अपनी छंटा निराली।।
टेसू -प्रसून खिल-खिलकर, लालिमा गर्व से ऐंठें।
अधरोष्ठ राग रंजित लख, लज्जित मुख नत से बैठा।।"
****। ******। *******
"कोकिल की सरस काली,
चातक का मधुर -मधुर स्वर।
मधुकर का मधुमय गुंजन,
न्योछावर तब वाणी पर।।"
प्रेम जीवन की उर्जा शक्ति का श्रोत है प्रेम ही जीवन में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। प्रेम सम्पूर्ण सृष्टि का मूल रहस्य है। इसी के कारण सृष्टि की रचना हुई है। अन्तर्मन में प्रेम उत्पन्न होते ही सब कुछ रूपान्तरित हो जाता है। ऐसा प्रतीत होता है, मानो अंधकार को चीरता हुआ कोई प्रकाश किरण उदित हुई है। यही प्रेम निराशा और निष्क्रियता के अंधकार को समाप्त करके जीवन में नवीन प्रकाश धारण करता है।
"जीवन के प्रथम पहर में,
तुम अरूणोदय से आए ।
धीरे धीरे रग - रग में ,
आलोक मधुर बिखराए।।"
कवि का प्रारम्भिक जीवन कष्टों और संघर्षों में व्यतीत हुआ था। 'मेरा बचपन ' कविता के माध्यम से कवि समसामयिक परिवेश के प्रति ईमानदारी उनके आत्मपरिचय से आरंभ होता है, कवि त्रिपाठी जी अपने विषय में बिना कुछ छिपाए हुए कहते हैं -
"अनुबंधित था अंधियारों से बचपन मेरा।
एक किरण के लिए तरसता रहा सबेरा।।"
****। *****। ******
"जिधर देखता विपदाओं ने डाला डेरा ।"
****। ******। ******
"जाऊं कहां और किस पथ से समझ न पाता।
किस करनी का दंड मिल रहा हाय विधाता।।"
भारत के समाज का वास्तविक चित्र गांवों में ही देखा जा सकता है आज भी गांवों में शोषण ,अशिक्षा , बेकारी , अंधविश्वास, भूखमरी विद्यमान है। कवि मूलतः गांव का निवासी है। प्रगतिशील और सर्वहारा का समर्थक होने के कारण गांवों की दशा का बहुत बारीकी से अवलोकन किया है । 
' निर्धन बाला ' कविता में कवि ने बाल मनोविज्ञान और ममतामयी मां के कोमल हृदय का जो चित्रण प्रस्तुत किया है , वह पाठक मन को करूणाकलित कर देता है। सहृदय पाठक ' निर्धन बाला ' कविता पढ़कर अश्रुविलगित हुए बिना नहीं रह पाता -
"किसी तरह पा सकी एक रोटी का टुकड़ा,
बड़े प्रेम से, जर्जर वसना, प्रसन्न वदना, 
बैठी घर के द्वार।
और ज्यों ही चाहा खाना उसने।
झपट कहीं से श्वान ले गया।।"
******। ********
"गीली मिट्टी लाकर के , लगी बनाने मधुर रोटियां।
कहती जाती अन्य साथियों से ..........
अभी मिलेगी रोटी 
किन्तु याद रखना मारूंगी 
यदि कुक्कुर छीनेगा रोटी।‌"
*****************
"अपने हिस्से की रोटी को , दिया सुता को ।
खा ले इसको कहते ही नेत्रों से मोती,
अकिंचना के , टपक पड़े भू-तल पर बिखरे।।"

आज सम्पूर्ण भारत में पाश्चात महानगरीय सभ्यता का बोलबाला है। गांव कस्बें बन रहें हैं, कस्बें शहर बन रहें हैं । गांव से लेकर शहर तक का मानव दिखावे के अंधानुकरण में फंसाता जा रहा है, जिसके कारण वह बह बहुत परेशान और दुखी हैं। जिसके कारण चोरी डकैती लूट मार अपहरण बलात्कार जैसी घटनाओं से समाचार पत्र भरें पड़े हैं। समाज के इस अवनति का कारण कवि पाश्चात्य और महानगरीय सभ्यता को ही मानता है। जिसके कारण कवि को हर व्यक्ति में अब उसको रावण दिखाई देता है । राम की संख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है -
"जितने रावण आज धरा पर, उतने राम कहां से आए?
त्रेता में कुबेर लूटते थे,
आज लूट रही निर्धन टोली,
सीता आग मांगते हारी, 
आज रूप की जलती होली।।"

कवि अत्यंत संवेदनशील प्राणी होता है। युगीन चेतना की जितनी गहरी और व्यापक अनुभूति उसे होती है शायद ही और किसी जीव में देखने को मिलें। उसका व्यक्तित्व जितना गरिमामय होंगा उसकी अनुभूति भी उतनी ही ज्यादा गौरवपूर्ण होगी। अनुभूतियों का मूल स्त्रोत यथार्थ में निहित है और किसी अन्य की अपेक्षा कवि यथार्थ के अधिक निकट सम्पर्क में रहता है। त्रिपाठी जी ने 'मुक्त छंद वाटिका' में समाज और संस्कृति का जो आइना चित्रण किया है, वह पूर्ण यथार्थ है । त्रिपाठी जी ने समाज को सिर्फ देखा ही नहीं है बल्कि क्रियात्मक रूप से अनुभव भी किया है। एक उदाहरण देखिए -
" भारत वासी कुछ अधर्म सापेक्ष हो गये,
 बचे खुचे कुछ लोग , धर्म निरपेक्ष हो गये।
 कौन निभाये धर्म-कर्म की रीति निराली,
  जिसके कारण देश रहा ये गौरवशाली।।"

"वैज्ञानिक बना रहे हंस -हंस कर विष के वाण,
जिससे जा सकतें हैं भू के सारे जीवों के प्राण।।"
 
काव्य पाठक मर्म को छूता है, वह उसके आवेग को जगाता है, उसकी संवेदना को दर्द देता है और उसकी बुद्धि को झकझोरता है। बौद्धिकता नई कविता की देन है, किन्तु आवेग और संवेदना तो काव्य के सर्वकालिक गुण हैं। संवेदनशील कवि स्वयं उस पीड़ा का भोक्ता होता है, जिसका वह वर्णन करता है। ' अन्तरात्मा की पुकार ' में जो भी कविता और छंद है वह कवि का भोगा हुआ अतीत है, वर्तमान है और भविष्य भी है। अतीत का एक उदाहरण -
"तन पुलकित मन हर्षित था, सम्पर्क हुआ जब तेरा।
 अब बीत रही क्या मुझ पर , यह हृदय जानता मेरा।।
      ये विरह -व्यथा की बातें, छंदों में नहीं समातीं।
     स्वच्छंद हुई सी आकर, नित अश्रुधार बरसातीं।।"
कवि के आशय की अभीसिप्त व्यंजना काव्य भाषा का प्रयोजन है आशय की अनुरूपता के साथ भाषा का स्वरूप-विधान कविता की भाषा -योजना का प्रमुख नियामक तत्व हैं। दूसरे शब्दों में भाव और भाषा का बहुत गहरा सम्बन्ध है। कालिदास ने 'वागर्थाविव सम्पृक्ति वागर्थ प्रतिपत्तये ' कहकर काव्य की भाषा और उसके आशय के सम्पृक्त होने का उल्लेख किया है। 'गिरा अरथ जल बीचि समय कहियत भिन्न न भिन्न ' के द्वारा तुलसीदास ने वाणी और अर्थ की अभिन्नता द्योतित की है। अर्थात काव्य -भाषा का आदर्श स्वरूप वहीं है जो कवि के वक्तव्य को उत्कृष्ट रूप में अभिव्यक्त कर सके। त्रिपाठी जी की भाषा में भाव , वाणी और वक्तव्य को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया है, सरल व्यवहारिक भाषा,व्यंग्यात्मकता, यथार्थ के कारण कविता की भाषा में तीखापन है, साथ ही आध्यात्मिक और विनयपरक कविताओं में भाषा का वही मधुर और प्रौढ़ रूप मिलता है। समष्टि रूप से यह कहा जा सकता है कि त्रिपाठी जी की भाषा में कोमलता और माधुर्य के साथ ओज का प्रान्त रहा है।
अन्त में यह कहना चाहता हूं कि त्रिपाठी जी की रचना 'अन्तरात्मा की पुकार ' अत्यंत सशक्त रूप में पाठकों को प्रभावित करती है। यही त्रिपाठी जी के काव्य की महानता है किन्तु इतने पर भी हमें यह ध्यान रखना होगा । किसी भी काव्य का अभिशंसात्मक मूल्यांकन नहीं किया जा सकता, क्योंकि काव्य सभी 'गरिमामावाची '
अयथार्थ तत्वों से परे है। हम कह सकते हैं कि -
अपारे काव्य संसारे कविरेव प्रजापतिः |
यथा वै रोचते विश्वं तत्थेदं परिवर्तते ||
'यह अपार काव्य संसार में कवि सृष्टा ब्रह्म के
समान आचरण करता है |'
यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

हिन्दी साहित्य महत्वपूर्ण प्रश्न भाग -2

             महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रृंखला
                           (  एक )


साहित्य अकादमी का पहला अध्यक्ष कौन था? – जवाहरलाल नेहरू
• अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना कहां हुई? – प्रयाग
• साहित्य अकादमी की स्थापना कब की गई? – 1953 ई.
• अपभ्रंश के प्रथम महाकवि कौन थे? – स्वयंभू
• आधुनिक हिंदी एकांकी नाटकों का जनक किसे कहा जाता है? – रामकुमार वर्मा
• बंगला का विकास किस भाषा से हुआ? – मागधी
• नागार्जुन का वास्तविक नाम क्या है? – वैद्यनाथ मिश्र
• 'पृथ्वीराजरासो' का रचयिता किसे माना जाता है? – चंदबरदाई
• 1909 ई. में वृंदावनलाल वर्मा ने कौन सी कहानी लिखकर ऐतिहासिक कहानियों की परंपरा को जन्म दिया? – राखीबंद भाई
• सुरेंद्र वर्मा को 'मुझे चांद चाहिए' उपन्यास पर कौन सा सम्मान मिला है? – साहित्य अकादमी
• 'अँगरेज राज सुख साज सजै सब भारी। पै धन विदेस चलि जात यहै अति ख्वारी॥' ये पंक्तियां किस कवि की हैं? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• अंग्रेजी में लिखित पत्र-संग्रह 'पिता के पत्र पुत्री के नाम' में किसके पत्र संकलित हैं? – जवाहरलाल नेहरू
• अंग्रेजी राज के गुप्तचर विभाग में मैथिलीशरण गुप्त की किस कृति का अर्थ 'जनाना हिंदुस्तान' समझा गया? – भारत-भारती
• हिंदी साहित्य में 'कलम का सिपाही' किसे कहा गया? – प्रेमचंद
• 'अंजली' और 'श्रीपत' किस नाटक के पात्र हैं? – अंजो दीदी
• 'अंडे के छिलके' एकांकी किसका लिखा है? – मोहन राकेश
• 'अंधेर नगरी' किस प्रकार की कृति है? – प्रहसन
• अंबिका प्रसाद वाजपेयी द्वारा प्रकाशित-संपादित 'नृसिंह' किस प्रकार की पत्रिका थी? – राजनीतिक पत्रिका
• अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की स्थापना कब की गई? – 1910 ई.
• भगवतीचरण वर्मा का प्रथम उपन्यास कौन सा है? – चित्रलेखा
• अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रथम सभापति कौन थे? – मदनमोहन मालवीय
• 'अच्छी हिंदी बस एक व्यक्ति लिखता था-बालमुकुंद गुप्त' यह कथन किसका है? – महावीर प्रसाद द्विवेदी
• 'अज्ञेय और आधुनिक रचना की समस्या' किसकी पुस्तक है? – रामस्वरूप चतुर्वेदी
• अज्ञेय का पूरा नाम क्या था? – सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन
• अज्ञेय के उपन्यास 'शेखर : एक जीवनी' का मूल मंतव्य क्या है? – स्वतंत्रता की खोज
• अज्ञेय के किस उपन्यास की प्रशंसा प्रकाशमान पुच्छल तारा' कहकर की गई? – शेखर : एक जीवनी
• अज्ञेय को किस कृति पर 'भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार' मिला? – कितनी नावों में कितनी बार
• अज्ञेय द्वारा संपादित 'तारसप्तक' श्रृंखला में कितने सप्तक प्रकाशित हुए? – चार
• 'अति सूधो सनेह को मारग है' किसकी उक्ति है? – घनानंद
• 'अधखिला फूल' किस प्रकार का उपन्यास है? – सामाजिक
• अधिकतर भारतीय भाषाओं की लिपियों का विकास किस प्राचीन लिपि से हुआ? – ब्राह्मी लिपि
• 'अनामदास का पोथा' उपन्यास किसका है? – हजारी प्रसाद द्विवेदी
• अनुसंधानपरक आलोचना का विकास किस पत्रिका के प्रकाशन से हुआ? – नागरी प्रचारिणी पत्रिका
• 'अपना-अपना भाग्य' कहानी का लेखक कौन है? – जैनेंद्र कुमार
• अपभ्रंश को 'पुरानी हिंदी' कहने वाले प्रथम लेखक कौन थे? – चंद्रधर शर्मा गुलेरी'
• 'अपोलो का रथ' किसकी रचना है? – श्रीकांत वर्मा
• 'अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आंचल में है दूध और आंखों में पानी।' ये पंक्तियाँ किसकी हैं? – मैथिलीशरण गुप्त
• 'अभिधा उत्तम काव्य है मध्य लक्षणा लीन। अधम व्यंजना रस विरस उलटी कहत नवीन।' यह स्थापना किसकी है? – देव
• 'अभ्युदय' के संपादक कौन थे? – मदनमोहन मालवीय
• 'अमिय हलाहल मद भरे स्वेत स्याम रतनार। जियत मरत झुकि-झुकि परत जेहि चितवत इक बार।' उपर्युक्त दोहा किस कवि का है? – रसलीन
• अमीर खुसरो किस तरह की रचनाओं के लिए प्रसिद्ध रहे हैं? – पहेलियां-मुकरियां
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' किस युग के कवि हैं? – द्विवेदी युग
• 'अरे यायावर! रहेगा याद' किसकी रचना है? – अज्ञेय
• 'अर्द्धनारीश्वर' उपन्यास किसने लिखा है? – विष्णु प्रभाकर
• 'अर्धकथानक' किसकी रचना है? – बनारसीदास जैन
• अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक कौन हैं? – भामह
• 'अलग-अलग वैतरणी' उपन्यास किसने लिखा है? – शिवप्रसाद सिंह
• अवधी बोली का केंद्र स्थान क्या है? – अयोध्या
• 'अशोक के फूल' निबंध-संग्रह किसका है? – हजारी प्रसाद द्विवेदी
• अशोक वाजपेयी ने किस पत्रिका का संपादन किया है? – पूर्वग्रह
• अश्लील साहित्य के विरुद्ध 'घासलेटी साहित्य' विरोधी आंदोलन किसने चलाया? – बनारसीदास चतुर्वेदी
• 'अष्टछाप' की स्थापना कब हुई? – 1565 ई.
• 'अष्टछाप' के दार्शनिक गुरु कौन हैं? – वल्लभाचार्य
• 'अस्तित्ववाद' के कला संबंधी रूप के पोषक कौन हैं? – सार्त्र
• आंचलिकता को कथा-साहित्य की एक विशेष प्रवृत्ति के रूप में प्रतिष्ठापित करने का श्रेय किसे दिया जाता है? – फणीश्वरनाथ 'रेणु'
• 'आंसू की बालिका' किस कवि की रचना है? – सुमित्रानंदन पंत
• 'आगे के कवि रीझिहैं तो कविताई न तौ राधिका कंहाई सुमिरन को बहानो है।' ये पंक्तियां किस कवि की हैं? – भिखारीदास
• आचार्य आनंदवर्धन ने किसे 'काव्यात्मा' स्वीकार किया है? – ध्वनि
• आचार्य क्षेमेंद्र ने किस सिद्धांत का प्रवर्तन किया है? – औचित्य
• आचार्य भामह ने 'कथा' का सूक्ष्म विवेचन करके कहानी के लिए क्या नाम दिया? – आख्यायिका
• आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने किस पत्रिका के माध्यम से हिंदी गद्य को परिष्कृत और परिमार्जित किया? – सरस्वती
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल का इतिहास ग्रंथ 'हिंदी साहित्य का इतिहास' स्वतंत्र पुस्तक से पूर्व किस रूप में प्रकाशित हुआ था? – हिंदी शब्द सागर की भूमिका
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल का निबंध-संकलन 'चिंतामणि' नाम से कितने भागों में प्रकाशित हुआ? – तीन
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल की कहानी 'ग्यारह वर्ष का समय' पहले किस पत्रिका में प्रकाशित हुई थी? – सरस्वती
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पहली सैद्धांतिक आलोचनात्मक पुस्तक कौन सी है? – काव्य में रहस्यवाद
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार भक्तिकाल का सीमांकन कहां से कहां तक है? – 1318-1643 ई.
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रीतिकाल का सीमांकन क्या है? – 1643-1843 ई.
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार हिंदी का प्रथम महाकाव्य कौन सा है? – पृथ्वीराजरासो
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अंग्रेजी ढंग का पहला मौलिक उपन्यास किसे माना है? – परीक्षा गुरु
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य के प्रारंभिक काल को किस नाम से अभिहित किया? – वीरगाथाकाल
• आचार्य रुद्रट ने किस रीति का आविष्कार किया? – लाटी
• आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने 'गाथा' को किस भाषा का मुख्य छंद माना है? – प्राकृत
पंक्तियों से जयशंकर प्रसाद की किस कृति का आरंभ हुआ है? – आंसू
• 'उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण' किसकी रचना है? – दामोदर शर्मा
• 'उड़ते चलो, उड़ते चलो' किसकी रचना है? – रामवृक्ष बेनीपुरी
• उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का वर्ष 1998 का 'लोहिया साहित्य सम्मान' किस साहित्यकार को प्रदान किया गया? – विष्णुकांत शास्त्री
• उत्तर भारत की खड़ी बोली हिंदी दक्षिण में किस रूप में विकसित हुई? – दक्कनी हिंदी
• 'उदंत मार्तंड' किस प्रकार का पत्र था? – साप्ताहिक
• 'उदंत मार्तंड' का प्रकाशन कब बंद हुआ? – 1827 ई.
• 'उदंत मार्तंड' के प्रथम संपादक कौन थे? – जुगुल किशोर सुकुल
• 'उनका गद्य मुरदे में कफन फाड़कर उठ बैठने की शक्ति संचारित करता है।' यह कथन किस रचनाकार के लिए कहा गया? – महादेवी वर्मा
• उपेंद्रनाथ अश्क' का जन्म कहां हुआ था? – जालंधर
• उपेंद्रनाथ 'अश्क' के किस नाटक में समझौतावादी और विद्रोहिणी नारी का चित्रण किया गया है? – अलग-अलग रास्ते
• 'उर्वशी' का रचनाकार कौन है? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• ऋत-वर्णन के लिए विशेषत: रीतिकाल का कौन सा कवि प्रसिद्ध है? – सेनापति
• 'ए लड़की' कहानी किस लेखक की है? – कृष्णा सोबती
• 'एक बूंद सहसा उछली' का लेखक कौन है? – अज्ञेय
• 'एकलव्य के नोट्स' किसकी रचना है? – फणीश्वरनाथ 'रेणु'
• 'एकांतवासी योगी' नाम से 'हरमिट' का अनुवाद किसने किया? – श्रीधर पाठक
• ऐतिहासिक उपन्यासों की परंपरा की शुरुआत करने का श्रेय किसे दिया जाता है? – वृंदावनलाल वर्मा
• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर किस रचनाकार ने कहानियां लिखीं? – जयशंकर प्रसाद
• औरंगजेब के ऐतिहासिक पत्रों का संकलन किस शीर्षक से हुआ? – आलमगीर के पत्र
• 'कठिन काव्य का प्रेत' किस कवि को कहा गया है? – केशव
• कथा क्षेत्र में जो स्थान प्रेमचंद का है, वही स्थान नाटक के क्षेत्र में किस साहित्यकार को प्राप्त है? – जयशंकर प्रसाद
• कथा-साहित्य में किस रचनाकार को 'कृषक संस्कृति का प्रमुख गायक' कहा गया है? – प्रेमचंद
• 'कनुप्रिया' किसकी रचना है? – धर्मवीर भारती
• 'कबिरा खड़ा बाजार में' नाटक किसकी रचना है? – भीष्म साहनी
• कबीर किसके शिष्य थे? – रामानंद
• 'करुणा भरण' नाटक किसकी रचना है? – लछिराम
• कर्नल टॉड की जीवनी किस लेखक ने लिखी है? – गौरीशंकर ओझा
• 'कर्म है अपना जीवन प्राण, कर्म पर हो जाओ बलिदान'-यह पंक्ति किस पत्र का संपादकीय आदर्श थी? – कर्मवीर
• 'कल सुनना मुझे' कविता संग्रह किसका है? – धूमिल
• 'कलम का मजदूर' किसकी रचना है? – अमृतराय
• 'कलम का सिपाही' किसकी रचना है? – अमृत राय
• 'कला और बूढ़ा चांद' किसकी रचना है? – सुमित्रानंदन पंत
• 'कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए। एक हिलोर इधर से आए एक हिलोर उधर से आए ।' इन पंक्तियों के रचयिता कौन है? – बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
• कवि समय का सर्वप्रथम सम्यक् निरूपण किस आचार्य ने किया है? – राजशेखर
• 'कविकुल कल्पतरु' किसकी रचना है? – चिंतामणि
• कविता के क्षेत्र में आधुनिक मीरा' किसे कहा गया? – महादेवी वर्मा
• 'कविता क्या है' शीर्षक निबंध किसका है? – रामचंद्र शुक्ल
• कविता में सामाजिक यथार्थवाद के नाम पर कौन सा आंदोलन चलाया गया? – प्रगतिवाद
• 'कवितावली' के रचयिता कौन है? – तुलसीदास
• 'कविवचनसुधा' पत्र कहां से प्रकाशित हुआ? – काशी
• 'कविवचनसुधा' पत्रिका का प्रकाशन किस साहित्यकार ने आरंभ किया? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• 'कविवचनसुधा' में प्रकाशित यह प्रतिज्ञा-पत्र 'हम लोग आज के दिन से कोई विलायती कपड़ा न पहिनेंगे।' किस रचनाकार का है? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• 'कहानी' पत्रिका का प्रकाशन कब शुरू हुआ? – 1955 ई.
• कहानीकार अमृत राय किस प्रसिद्ध कथाकार के सुपुत्र थे? – प्रेमचंद
• 'कहानी-नई कहानी' पुस्तक का लेखक कौन है? – नामवर सिंह
• कहानी-संग्रह 'इंद्रजाल' किस लेखक का है? – जयशंकर प्रसाद
• काका कालेलकर का पूरा नाम क्या था? – दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर
• काका कालेलकर द्वारा लिखित जीवनी ग्रंथ कौन सा है? – बापू की झाँकियाँ
• काका कालेलकर द्वारा संपादित पत्र-संकलन कौन सा है? – बापू के पत्र
• 'काबा और कर्बला' किसकी रचना है? – मैथिलीशरण गुप्त
• कालिदास के जीवन पर आधारित नाटक कौन सा है? – आषाढ़ का एक दिन
• 'काव्य की रीति सिख्यौ सुकवीन्ह सौं' यह पंक्ति किस कवि की है? – भिखारीदास
• 'काव्य में अभिव्यंजनावाद' पुस्तक किसने लिखी है? – लक्ष्मीनारायण 'सुधांशु'
• 'काव्यनिर्णय' ग्रंथ किस कवि का है? – भिखारीदास
• 'काव्यमीमांसा' की रचना किसने की है? – राजशेखर
• काव्यशास्त्र का प्रथम आचार्य किसे माना जाता है? – भरत मुनि
• काव्यशास्त्र के संप्रदायों में परंपरा से कौन सा संप्रदाय सबसे प्राचीन माना जाता है? – रस संप्रदाय
• काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा 'हिंदी साहित्य का बृहत् इतिहास' कितने खंडों में प्रकाशित किया गया? – अठारह
• 'काशी सार्वजनिक सभा' तथा 'कवितावर्द्धिनी' संस्थाओं की स्थापना किसने की? – भारतेंदु हरिश्चंद्र
• काशी से प्रकाशित किस मासिक पत्रिका में जयशंकर प्रसाद की कहानियाँ नियमित रूप से प्रकाशित होती थीं? – हिंदी गल्पमाला
• 'किन्नर देश में यात्रावृत्त किसका है? – राहुल सांकृत्यायन
• किस आचार्य की गणना वैष्णव भक्ति के प्रतिष्ठापक आचार्यों में नहीं की जाती? – हरिदास निरंजनी
• किस आलोचक ने आदिकाल को बीजवपन काल' नाम से अभिहित किया है? – महावीर प्रसाद द्विवेदी
• किस आलोचक ने बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र को हिंदी का 'स्टील' और 'एडीसन' कहा है? – रामचंद्र शुक्ल
• किस उपन्यास को पूरा करने से पूर्व प्रेमचंद का निधन हो गया? – मंगलसूत्र
• किस उपन्यास को राजेंद्र यादव और मन्नू भंडारी ने मिलकर लिखा है? – एक इंच मुसकान
• किस उपन्यास में 'अलिफ लैला' और 'पंचतंत्र' के ढंग पर लिखी गई सात अलग-अलग कहानियां किस्सागो के व्यक्तित्व से जुड़कर उपन्यास बन जाती हैं? – सूरज का सातवां घोड़ा
• किस उपन्यास में मिथिला की विशिष्ट भंगिमा है? – बाबा बटेसर नाथ
• किस उपन्यास में यात्रीशाला में ठहरे हुए यात्रियों की एक रात की जिंदगी का वर्णन है? – सोया हुआ जल
• किस उपन्यास में व्यक्ति के मन की शंकाओं, उलझनों और गुत्थियों का चित्रण है? – परख
• किस कथाकार की पत्नी ने भी कहानियां लिखीं? – प्रेमचंद
• किस कथाकार को हिंदी का शरत्' कहा गया है? – जैनेंद्र कुमार
• किस कवयित्री को 'हिंदी के विशाल मंदिर की वीणापाणि' कहा गया है? – महादेवी वर्मा
• किस कवि की कविता की हृदय-वेधकता को लक्ष्य करके उसे 'नावक के तीर' कहा गया? – बिहारी
• किस कवि को आधुनिक हिंदी साहित्य का 'बापू' कहा गया है? – सियारामशरण गुप्त
• किस कवि को 'एक भारतीय आत्मा' कहा गया? – माखनलाल चतुर्वेदी
• किस कवि को ब्रजकोकिल' कहा जाता था? – सत्यनारायण कविरत्न
• किस कवि को 'राष्ट्रकवि' की उपाधि से विभूषित किया गया है? – मैथिलीशरण गुप्त
• किस कवि को 'सहजता का कवि' कहा जाता है? – भवानी प्रसाद मिश्र
• किस कवि ने गांव-गांव, घर-घर घूमकर रात-रात भर घरों के पिछवाड़े बैठकर सोहर और विवाह गीतों को चुन-चुनकर उनसे कविता कौमुदी' संकलन तैयार किया? – रामनरेश त्रिपाठी
• किस कवि ने घोषणा की-'जाग्रत युग के स्वप्न फूलों से नहीं, चिनगारियों से सजाए जाते हैं? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस कवि ने 'मैंने मैं शैली अपनाई' का दावा किया? – निराला
• किस कवि ने मैथिलीशरण गुप्त के सामने स्वयं को 'महज डिप्टी राष्ट्रकवि' माना? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस कवि ने स्वयं को 'छायावाद की ठीक पीठ पर' आनेवाला माना? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस कहानीकार की कहानियां गहन मनोवैज्ञानिक पकड़' के लिए विख्यात हैं? – इलाचंद्र जोशी
• किस कहानीकार ने अपनी कहानियों में मुख्यत: व्यक्ति के आत्मसंघर्ष का चित्रण किया है? – अज्ञेय
• किस कहानीकार ने कहानी को 'गमले में लगा फूल का पौधा' बताया? – प्रेमचंद
• किस काल की कहानियां मध्यकालीन प्रेमकथाओं, लोककथाओं तथा स्वप्नकथाओं पर आधारित थीं? – प्रेमचंदपूर्व
• किस काव्य को 'चिपकाव्य' भी कहा गया है? – अधम काव्य
• किस काव्यधारा के अंतर्गत मूर्तिपूजा और अवतारवाद का विरोध किया गया है? – संत काव्यधारा
• किस कृति से 'आत्मकथा' विधा का प्रारंभ माना जाता है? – अर्धकथानक
• किस दौर की कविता ने 'अंबर' के स्थान पर 'धरती' की बात पर बल दिया? – प्रगतिवाद
• किस नाटककार ने नाटकों को पहली बार रूमानियत के घेरे से बाहर निकालकर आधुनिकता-बोध के साथ जोड़ा? – उपेंद्रनाथ 'अश्क'
• किस निबंध-रचना में कर्जन के भारत-विरोधी कारनामों पर व्यंग्यात्मक शैली में प्रहार किया गया है? – शिव शंभू के चिट्ठे
• किस निबंध-संग्रह में समीक्षात्मक निबंध संकलित हैं? – आस्था के चरण
• किस पत्र ने हिंदी के पहले व्यंग्य पत्र के रूप में लोकप्रियता प्राप्त की? – मतवाला
• किस पत्रिका के एकांकी नाटक विशेषांक ने एकांकी लेखन को विवादास्पद बना दिया? – हंस
• किस पत्रिका ने हिंदी कहानी के प्रचार-प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई? – सरस्वती
• किस पत्रिका में 'हम इनसे मिले थे' शीर्षक स्थायी स्तंभ के अंतर्गत साक्षात्कार प्रकाशित हुए? – नई धारा
• किस पाश्चात्य आलोचक ने काव्य के मनोवैज्ञानिक मूल्य का सिद्धांत प्रस्तुत किया है? – आई.ए. रिचर्ड्स
• किस रचनाकार को 'परतंत्र भारत का वास्तविक वैतालिक' कहा गया है? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• किस 'रामायण' को आदिकाव्य मानकर रामकथा के मूल स्रोत के रूप में स्वीकार किया जाता है? – वाल्मीकि रामायण
• किस रूसी साहित्यकार ने रिपोर्ताज विधा का प्रचार-प्रसार किया? – इलिया एहरेनबुर्ग
• किस शताब्दी को हिंदी का प्रचार युग' कहा जाता है? – उन्नीसवीं शताब्दी
• किस संप्रदाय में कृष्ण के वामांग में राधा के साथ कृष्ण की उपासना का विधान है? – निंबार्क संप्रदाय
• किस संस्कृत काव्य में पहले कृष्णलीलाओं का उल्लेख मिलता है? – ब्रह्मचरित
• किसके नवीन छंद को देखकर 'रबर छंद' कहकर मजाक उड़ाया गया? – निराला
• किसने 'धर्मयुग' का संपादन किया है? – धर्मवीर भारती
• किसे प्रथम बार 'भारत भारती सम्मान' प्रदान किया गया? – महादेवी वर्मा
• 'कीर्तिलता' और 'कीर्तिपताका' किस कवि की रचनाएं हैं? – विद्यापति
• 'कुंदन को रंग फीकौ लगे' किसकी पंक्ति है? – मतिराम
• कुंवर नारायण को उनकी किस कृति पर 'व्यास सम्मान' प्रदान किया गया? – कोई दूसरा नहीं
• 'कुकुरमुत्ता' किसकी रचना है? – निराला
• 'कुरुक्षेत्र' किसकी रचना है? – रामधारी सिंह 'दिनकर'
• 'कुल्ली भाट' किसकी रचना है? – निराला
• 'कुसुम कुमारी' उपन्यास किसने लिखा था? – देवकीनंदन खत्री
• कृष्ण काव्य की अपार संपदा किस भाषा में है? – ब्रजभाषा
• 'कृष्ण की आत्मकथा' उपन्यास का लेखक कौन है? – मनु शर्मा
• कृष्ण की सरस क्रीड़ाओं का वर्णन करनेवाला प्रख्यात ग्रंथ कौन सा है? – गीतगोविंद
• 'कृष्ण गीतावली' का रचयिता कौन है? – तुलसीदास
• कृष्णबिहारी मिश्र ने अपनी पुस्तक 'देव और बिहारी' में आलोचना की कौन सी पद्धति अपनाई है? – तुलनात्मक
• 'कृष्णार्जुन युद्ध' नाटक किसने लिखा है? – माखनलाल चतुर्वेदी
• केशवदास की किस रचना की गणना 'लक्षण ग्रंथ' के अंतर्गत की जाती है? – कविप्रिया
• 'केसव कहि न जाइ का कहिए' पंक्ति किस कवि की है? – तुलसीदास
• 'कैदी और कोकिला' रचना किस रचनाकार की है? – माखनलाल चतुर्वेदी
• 'कोठरी की बात' कहानी किसकी है? – अज्ञेय
• 'कोणार्क' नाटक किस लेखक का लिखा हुआ है? – जगदीश चंद्र माथुर
• 'कोशल केसरी' की संज्ञा से किस नाटककार को विभूषित किया गया है? – सेठ गोविंद दास
• कौन सा कहानी आंदोलन फ्रांसीसी साहित्य के 'एंटी स्टोरी' का अनुकरण है? – अकहानी
• कौन से कवि अपनी घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के लिए प्रसिद्ध हैं? – नागार्जुन
• 'क्या भूलें, क्या याद करूं' में किस रचनाकार की आत्मकथा वर्णित है? – हरिवंशराय बच्चन
• क्रोचे के अभिव्यंजनावाद की तुलना भारतीय काव्यशास्त्र के किस सिद्धांत से की गई है? – वक्रोक्ति सिद्धांत
• क्रोचे के अभिव्यंजनावाद को किस आलोचक ने भारतीय वक्रोक्तिवाद का विलायती उत्थान' माना है? – रामचंद्र शुक्ल
• 'क्वासि' किसकी रचना है? – बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
• खड़ी बोली का दूसरा नाम क्या है? – कौरवी
• खड़ी बोली का प्रयोग साहित्यिक हिंदी खड़ी बोली के अर्थ के अतिरिक्त किस अर्थ में होता है? – दिल्ली-मेरठ के आस-पास की लोक बोली के अर्थ में
• खड़ी बोली निबंधों के भीतर से अवधी, बैसवाड़ी या ब्




यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

हिन्दी साहित्य का इतिहास भाग -01

       हिंदी साहित्य प्रश्न

1. शेरसिंह का शस्त्र समर्पण’ किसकी रचना है?💐प्रसाद

2. ’ताजमहल का टेण्डर’ किसका नाटक है?💐अजय शुक्ल

3. अनुमितिवाद की अवधारणा किसकी है?💐आ शंकुक

4. ’रेखाएं बोल उठीं’ किसकी रचना है?💐देवेंद्र सत्यार्थी

5. ’सांप तुम सभ्य तो हुए नहीं’ किसकी काव्य-पंक्ति है?💐अज्ञेय

6. ’गुलगुली गिल में गलीचा है गुनीजन हैं’ किसकी काव्य-पंक्ति है?💐पद्माकर

7. ’सोन मछली’ किसकी कविता है?💐अज्ञेय

8. ’यमुना के प्रति’ कविता के रचनाकार कौन हैं?💐निराला

9. ’पेशोला की प्रतिध्वनि’ कविता के रचयिता कौन हैं?💐प्रसाद

10. मिश्र बन्धुओं में कौन-कौन सम्मिलित हैं?💐गणेश श्याम शुखदेव

11. ’गंगौली’ गांव किस उपन्यास के केन्द्र में है?💐आधा गाँव राही मासूम

12. ’कोर्ट मार्शल’ नाटक के रचनाकार कौन हैं?💐स्वदेश दीपक

13. ’ऋतम्भरा’ किसकी काव्यकृति है?💐केदारनाथ मिश्र प्रभात

14. ’पीली ऑंधी’ उपन्यास किसकी रचना है?💐प्रभाखेतान

15. ’रमणीयार्थ-प्रतिपादकः शब्दः काव्यम्’ किसका कथन है?💐जगन्नाथ

16. शब्दार्थौ सहितौ काव्यम्’ किसका कथन है?💐भामह

17. ’एक मन्त्री स्वर्ग लोक में’ किसका उपन्यास है?💐शंकर पुनताम्बेकार

18. ’गोबर गणेष’ उपन्यास के लेखक कौन हैं?💐रमेश चंद्र शाह

19. ’एक चूहे की मौत’ उपन्यास के रचनाकार कौन हैं?💐बदिउज्जमा

20. उत्पत्तिवाद के सिद्धान्त के प्रवर्तक कौन हैं?💐भट्टलोल्लत

21. भुक्तिवाद के सिद्धान्त का प्रवर्तन किसने किया?💐भट्टनायक

22. ’प्रभुजी मोरे अवगुन चित न धरो’ किसकी पंक्ति है?💐सूरदास


23. सम्प्रेषण सिद्धान्त के प्रवर्तक कौन हैं?💐रिचर्डस

24. निर्वैयक्तिकता का सिद्धान्त किसने प्रतिपादित किया?💐इलियट

25. ’रस-सिद्धान्त’ किसकी रचना है?💐नगेन्द्र

26. ’नए साहित्य का सौन्दर्यशास्त्र’ के रचनाकार कौन हैं?💐मुक्तिबोध

27. ’भाव विलास’ किसकी कृति है?💐देव

28. ’ओ! वरुणा की शान्त कछार’ किसकी पंक्ति है?💐प्रसाद

29. ’ब्रजबुलि’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया?💐बंगाली कवि ईश्वर चंद गुप्त

30. ’गुरू सुआ जेइ पंथ दिखावा’ किसकी काव्य-पंक्ति है?💐जायसी

31. प्रपद्यवाद का दूसरा नाम क्या है?💐नकेनवाद

32. ’रस गन्धर्व’ के रचनाकार का नाम बतायें।💐मणिमधुकर

33. ’यमगाथा’ नाटक किसने लिखा है?💐दूधनाथ सिंह

34. ’यह पथ बंधु था’ किसकी रचना है?💐नरेश मेहता

35. ’ध्वन्यालोक’ ग्रन्थ किसकी रचना है?💐आनंद वर्धन

36. ’साहित्य दर्पण’ के रचयिता कौन हैं💐विश्वनाथ

हिन्दी साहित्य विषय काव्य

 हिन्दी साहित्य विषय - काव्य 
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1 काव्य के तत्व माने गए है - 
दो
2 महाकाव्य के उदाहरण है - 
रामचरित मानस, रामायण, साकेत, महाभारत, पदमावत, कामायनी, उर्वशी, लोकायतन, एकलव्य आदि
3 मुक्तक काव्य के उदाहरण है- 
मीरा के पद, रमैनियां, सप्तशति
4 काव्य कहते है - 
दोष रहित, सगुण एवं रमणियार्थ प्रतिपादक युगल रचना को
5 काव्य के तत्व है - 
भाषा तत्व, बुध्दि या विचार तत्व, कल्पना तत्व और शैली तत्व

6 काव्य के भेद है - 
प्रबंध (महाकाव्य और खण्ड काव्य), मुक्तक काव्य
7 वामन ने काव्य प्रयोजन माना -
दृष्ट प्रयोजन (प्रीति आनंद की प्राप्ति) अदृष्ट प्राप्ति (कीर्ति प्राप्ति)
8 भामह की काव्य परिभाषा है - 
शब्दार्थो सहित काव्यम
9 प्रबंध काव्य का शाब्दिक अर्थ है - 
प्रकृष्ठ या विशिष्ट रूप से बंधा हुआ।
10 रसात्मक वाक्यम काव्यम परिभाषा है - 
पंडित जगन्नाथ का

11 काव्य के कला पक्ष में निहित होती है - 
भाषा
12 काव्य में आत्मा की तरह माना गया है- 
रस
13 तद्दोषों शब्दार्थो सगुणावनलंकृति पुन: क्वापि, परिभाषा है -
मम्मट की
14 काव्य के तत्व विभक्त किए गए है- 
चार वर्गो में प्रमुखतया रस, शब्द
15 कवि दण्डी ने काव्य के भेद माने है- 
तीन

16 रमणियार्थ प्रतिपादक शब्द काव्यम की परिभाषा दी है - 
आचार्य जगन्नाथ ने
17 काव्य रूपों में दृश्य काव्य है - 
नाटक
18 काव्य प्रयोजन की दृष्टि से मत सर्वमान्य है - 
मम्मटाचार्य का
19 काव्य प्रयोजनों में प्रमुख माना जाता है।
आनंदानुभूति का
20 काव्य रचना का प्रमुख कारण (हेतु) है - 
प्रतिभा का

21 महाकाव्य और खण्ड काव्य में समान लक्षण है - 
कथानक उपास्थापन एक जैसा होता है।
22 काव्य रचना के सहायक तत्व है - 
वर्ण्य विषय(भाव), अभिव्यक्ति पक्ष (कला), आत्म पक्ष
23 मम्मट के काव्य प्रयोजन है - 
यश, अर्थ, व्यवहार ज्ञान, शिवेतरक्षति, संघ पर निवृति, कांता सम्मलित
24 मम्मट के शिवेतर का अभिप्राय है –
अनिष्ट
25 सगुणालंकरण सहित दोष सहित जो होई... परिभाषा है - 
चिंतामणि की

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रविवार, 15 फ़रवरी 2026

Net JRF के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

हालावाद से महत्वपूर्ण प्रश्न 


1- "व्यक्तिवादी काव्य" या "वैयक्तिक कविता" के नाम से जाना जाता है ?
-- हालावाद
2- "इस काव्य में समग्रतः एवं संपूर्णतः वैयक्तिक चेतनाओं को ही काव्यमय स्वरों और भाषा में संजोया गया है।" यहाँ किस काव्य के बारे में कहा गया है ?
-- हालावादी काव्य के बारे में
3- "नव्य-स्वछंदतावाद" के नाम से जाना जाता है ?
-- हालावाद
4- "उन्मुक्त प्रेमकाव्य" या "प्रेम व मस्ती के काव्य" के नाम से जाना जाता है ?
-- हालावादी काव्य
5- "इसमें अपनी ही मस्ती, अल्हड़ता एवं अक्खड़ता है।" किसमें ?
-- हालावादी काव्य में
6- हालावादी काव्य पर किसका प्रभाव है ?
-- फारसी साहित्य का / उमरखैयाम का
7- "क्षयी रोमांस का कवि" कहा जाता है ?
-- हरिवंश राय बच्चन को
8- "प्रेम और रोमांस का कवि" कहा जाता है ?
-- रामेश्वर शुक्ल अंचल को
9- मांसलवाद के प्रवर्तक माने जाते है ?
-- रामेश्वर शुक्ल अंचल
10- "इनके काव्य में रोमांस तो है लेकिन निराशा और दुःख जनित।" किसके बारे में कहा गया है ?
-- नरेन्द्र शर्मा के


11- हालावाद के प्रवर्तक माने जाते है ?
-- हरिवंश राय बच्चन
12- हालावाद का समय काल माना जाता है ?
-- 1933 से 1936
13- हालावादी कविता को "वैयक्तिक कविता" किसने कहा है ?
-- डा नगेन्द्र ने
14- "वैयक्तिक कविता छायावाद की अनुजा और प्रगतिवाद की अग्रजा है।" कथन किसका है ?
-- डा नगेन्द्र का
15- हालावादी काव्य को "मस्ती, उमंग और उल्लास की कविता" किसने कहा है ?
-- हजारी प्रसाद द्विवेदी ने
16- हालावादी कविता का प्रबल भाव है ?
-- वैयक्तिकता का
17- "निराशावादी कवि" कहा जाता है ?
-- हालावादियों को
18- "व्यक्तिवादी कविता का प्रमुख स्वर निराशा का है, अवसाद का है, थकान का है, टूटन का है, चाहे किसी भी परिप्रेक्ष्य में हो ।" कथन किसका है ?
-- डा रामदरश मिश्र का
19- व्यक्तिवादी गीति कविता की सभी प्रवृत्तियाँ ( प्रेम, निराशा, वेदना, सामाजिक चेतना ) किसके काव्य में लक्षित होती है ?
-- आरसी प्रसाद सिंह के
20- "अशरीरी प्रेम के स्थान पर शरीरी प्रेम को इन्होंने तरजीह दी है।" किन्होंने तरजीह दी है ?
-- हालावादी कवियों ने


21- "मूलतः प्रेम यौवन और सौन्दर्य के कवि" माने जाते है ?
-- रामेश्वर शुक्ल अंचल
22- हालावादी काव्य को "क्षयी रोमांस और कुण्ठा का काव्य" किसने कहा है ?
-- डा हेतु भारद्वाज ने
23- हालावाद प्रचलित कब से हुआ ?
-- बच्चन की मधुशाला से
24- किसकी रचनाओं में आत्मसंदेह और मृत्यु भय की भावना सर्वाधिक पाई जाती है ?
-- हरिवंश राय बच्चन की
25- बच्चन की रचना त्रय में शामिल है ?
-- मधुशाला, मधुबाला और मधुकलश
26- छायावाद का "दूसरा उन्मेष" कहलाता है ?
-- उत्तर छायावाद
27- उत्तर छायावाद को छायावाद का दूसरा उन्मेष किसने कहा ?
-- हजारी प्रसाद द्विवेदी ने
28- उत्तर छायावाद में कितने प्रकार की काव्यधाराएँ विकसित हुई ?
-- दो प्रकार की ( 1- राष्ट्रीय 2- वैयक्तिक )
29- उत्तर छायावाद को "स्वछन्द काव्य धारा" किसने कहा ?
-- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने
30- गणपतिचन्द्र गुप्त ने उत्तर छायावाद को कितनी काव्यधाराओं में बांटा है ?
-- 3 में ( 1- राष्ट्रीय चेतना प्रधान 2- व्यक्ति चेतना प्रधान 3- समष्टि चेतना प्रधान )


31- हालावाद को "प्रगति प्रयोग का पूर्वाभास" किसने कहा है ?
-- डा बच्चन सिंह ने
: 32- हरिवंश राय बच्चन का जन्म कब हुआ था ?
-- 1907 ई
33- हरिवंशराय बच्चन रचित प्रथम काव्य संग्रह है?
-- मधुशाला ( रचना 1933, प्रकाशन 1935 ई )
34- हरिवंशराय बच्चन का प्रथम प्रकाशित काव्य संग्रह है ?
-- तेरा हार
35- उमर खय्याम की रुबाईयों का अनुवाद किसने किया ?
-- हरिवंश राय बच्चन ने
36- बच्चन को किस कृति के लिए "साहित्य अकादमी पुरस्कार" मिला ?
-- "दो चट्टाने" के लिए
37- बच्चन की आत्मकथा कितने खण्डों में प्रकाशित है ?
-- चार खण्डों में
( 1- क्या भूलू़ँ क्या याद करूँ
2- नीड़ का निर्माण फिर
3- बसेरे से दूर
4- दशद्वार से सोपान तक
38- "निशा निमंत्रण" में संकलन है ?
-- गीतों का
39- "निशा निमंत्रण" का प्रकाशन वर्ष है ?
-- 1938 ई
40- "निशा निमंत्रण" के गीत कितनी कितनी पंक्तियों में रचित है ?
-- 13 - 13 पंक्तियों में



यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

हिन्दी व्याकरण से महत्वपूर्ण प्रश्न

हिन्दी व्याकरण से महत्वपूर्ण प्रश्न 


प्रश्‍न 1- जिन शब्दों के अन्त में ‘अ’ आता है, उन्हें क्या कहते है।
उत्‍तर – अकारांत कहते है।

प्रश्‍न 2- हिन्दी वर्ण माला में अयोगवाह वर्ण कौन से है।
उत्‍तर – अं , अ: वर्ण अयोगवाह वर्ण है ।

प्रश्‍न 3- हंस मे लगा ( ं ) चिन्ह कहलाता है।
उत्‍तर – अनुस्वार

प्रश्‍न 4- चॉद शब्द‍ में लगा ( ँ ) चिन्ह कहलाता है।
उत्‍तर – अनुनासिक ।

प्रश्‍न 5- भाषा की सबसे छोटी इकाई क्या है।
उत्‍तर – वर्ण ।

प्रश्‍न 6- जिन शब्दों में किसी प्रकार का विकार या परिवर्तन नही होता, उसे क्या कहते है।
उत्‍तर – तत्सम ।

प्रश्‍न 7- कार्य के होने का बोध कराने वाले शब्द को क्या् कहते है।
उत्‍तर – क्रिया कहते है।

प्रश्‍न 8- भाषा के शुद्ध रूप का ज्ञान किससे होता है।
उत्‍तर – व्याकरण से होता है।

प्रश्‍न 9- विशेषण जिस शब्द की विशेषता बताते है, उसे क्या कहते है।
उत्‍तर – विशेष्ये ।

प्रश्‍न 10- हिन्दी में लिंग का निर्धारण किस से होता है।
उत्‍तर – संज्ञा से ।

प्रश्‍न 11- क्रिया का मूल रूप क्या् कहलाता है।
उत्‍तर – धातु ।

प्रश्‍न 12- सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाली विभक्तियॉं होती है।
उत्‍तर – संश्लिष्ट ।

प्रश्‍न 13- हिन्दी में कारक चिन्ह कितने होते है।
उत्‍तर – 8 होते है।
जबकि संस्कृत भाषा में कारक चिन्ह 7 होते है।

प्रश्‍न 14- संज्ञा कितने प्रकार की होती है।
उत्‍तर – संज्ञा 5 प्रकार की होती है।
1. व्यवक्ति वाचक संज्ञा
2. जाति वाचक संज्ञा
3. भाव वाचक संज्ञा
4. समूह वाचक संज्ञा
5. द्वव्या वाचक संज्ञा

प्रश्‍न 15- वे शब्द‍ जो विशेषण की भी विशेषता बतलाते है। उन्हे क्या कहते है।
उत्‍तर – प्रविशेषण ।

प्रश्‍न 16- सर्वनाम किसे कहते है।
उत्‍तर – सर्वनाम वे शब्द कहलाते है। जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग मे लाये जाते है।
जैसे – यह , वह , वे , उनका , इनका , इन्हे आदि

प्रश्‍न 17- सर्वनाम के कितने भेद होते है।
उत्‍तर – सर्वनाम के 6 भेद होते है।
1. पुरूषवाचक सर्वनाम
2. निश्चवयवाचक सर्वनाम
3. अनिश्चायवाचक सर्वनाम
4. प्रश्नावाचक सर्वनाम
5. संबंधवाचक सर्वनाम
6. निजवाचक सर्वनाम

प्रश्‍न 18- क्रिया किसे कहते है।
उत्‍तर – जिस शब्द – से किसी काम के करने या होने का बोध हो उसे क्रिया कहते है।
जैसे – खाना , हँसना , रोना , बैठना आदि

प्रश्‍न 19- क्रिया मुख्य रूप से कितने प्रकार की होती है।
उत्‍तर – मुख्य रूप से क्रिया 2 प्रकार की होती है।
1. अकर्मक क्रिया
2. सकर्मक क्रिया

प्रश्‍न 20- काल कितने प्रकार के होते है।
उत्‍तर – काल 3 प्रकार के होते है।
1. वर्तमान काल
2. भूतकाल
3. भविष्य काल

प्रश्‍न 21- ‘श’ व्‍यंजन का उच्‍चारण स्‍थान कौन सा है।
उत्‍तर – तालु ।

प्रश्‍न 22- ‘व’ वर्ण का उच्‍चारण स्‍थान कौन सा है ।
उत्‍तर – दन्‍त + ओष्‍ठ ।

प्रश्‍न 23- ‘ड.’ का उच्‍चारण स्‍थान क्‍या है।
उत्‍तर – कण्‍ठ ।

प्रश्‍न 24- ‘क’ वर्ण उच्‍चारण की दृष्टि से क्‍या है।
उत्‍तर – कंठ्य ।

प्रश्‍न 25- वर्ग के द्वितीय व चतुर्थ व्‍यंजन क्‍या कहलाते है।
उत्‍तर – महाप्राण ।

प्रश्‍न 26- ‘ए’ और ‘ऐ’ का उच्‍चारण स्‍थान है।
उत्‍तर – कंठतालु ।

प्रश्‍न 27- ‘घ’ का उच्‍चारण स्‍थान क्‍या है
उत्‍तर – कंठ ।

प्रश्‍न 28- वर्ण के प्रथम, तृतीय व पंचम वर्ण क्‍या कहलाते है।
उत्‍तर – अल्‍पप्राण ।

प्रश्‍न 29- मात्रा के आधार पर हिन्‍दी स्‍वरों के दो भेद कौन से है।
उत्‍तर – हस्‍व और दीर्घ ।

प्रश्‍न 30- सर्वनाम के साथ प्रयुक्‍त्‍ा होने वाली विभक्तियॉ होती है ।
उत्‍तर – संश्लिष्‍ट ।

प्रश्‍न 31- ‘शिक्षक विद्यार्थी को हिन्‍दी पढ़ाते है। वाक्‍य में क्रिया के किस रूप का प्रयोग हुआ है।
उत्‍तर – द्विकर्मक क्रिया ।

प्रश्‍न 32- ‘मुझे’ किस प्रकार का सर्वनाम है।
उत्‍तर – उत्‍तम पुरूष ।

प्रश्‍न 33- मानव शब्‍द का विशेषण बनेगा ।
उत्‍तर – मानवीय ।

प्रश्‍न 34- चिडि़या आकाश में उड़ रही है। उस वाक्‍य में उड़ रही क्रिया किस प्रकार की है।
उत्‍तर – अकर्मक ।

प्रश्‍न 35- पशु शब्‍द का विशेषण है।
उत्‍तर – पाशविक ।

प्रश्‍न 36- नेत्री शब्‍द का पुल्लिंग रूप है।
उत्‍तर – नेता ।

प्रश्‍न 37- उत्‍कर्ष का विशेषण क्‍या होगा ।
उत्‍तर – उत्‍कृष्‍ट ।

प्रश्‍न 38- काम का तत्‍सम रूप है।
उत्‍तर – कर्म ।

प्रश्‍न 39- दूध का तत्‍सम रूप क्‍या है।
उत्‍तर – दुग्‍ध ।

प्रश्‍न 40- प वर्ग का उच्‍चारण मुँह के किस भाग से होता है।
उत्‍तर – ओष्‍ठ ।

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के ‘अरूंधती’ महाकाव्य में स्त्री विमर्श

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के  ‘अरूंधती’ महाकाव्य में स्त्री विमर्श
 
“ बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।सुरुचि सुबास सरस अनुरागा।।
अमिय मूरिमय चूरन चारु। समन सकल भव रुज परिवारू।।"
जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी के चरण-कमलों की धूल की बंदना करता हूं।जो सुगंध स्वाद से भरपूर है, और जन्म - मृत्यु के सभी रोगों को नाश करने वाली संजीवनी बूटी के समान है। जगद्गुरु जी का 77 वें जन्मदिन  दिवस पर उनके श्री चरणों में कोटि-कोटि नमन।

प्रथम अध्याय -
प्रस्तावना 
क-  जगतगुरु रामभद्राचार्य आचार्य जी का 
साहित्यिक परिचय 
ख-  एक प्रज्ञाचक्षु रचनाकार के रूप में उनकी विलक्षणता 
ग-  महाकाव्य की परंपरा और अरुंधती संस्कृति और हिंदी महाकाव्य की 
      पृष्ठभूमि 
घ-   अरुंधती का स्थान
ङ-    शोध की प्रासंगिकता 
च-  आधुनिक युग में इस महाकाव्य के अध्ययन की आवश्यकता

द्वितीय अध्याय-
क-  अरुंधती का कथानक और पात्र परिकल्पना 
ख-कथानक के आधार पौराणिक संदर्भ और जगतगुरु द्वारा किया गया मौलिक नवाचार 
ग- पात्र  परिचय
अरुंधति और वशिष्ठ के चरित्र का मनोवैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विश्लेषण 
घ- सहयोगी पात्र 
क-  समाज और ऋषि परंपरा के अन्य पात्र का महत्व

तृतीय अध्याय -
क-  जगतगुरु की दृष्टि में ना विमर्श अधिकार और मेधा
ख- अरुंधति के माध्यम से स्त्री की बौद्धिक स्वतंत्रता का चित्रण
ग-  पारिवारिक एवं सामाजिक भूमिका
घ-   एक पत्नी माता और आचार्य के रूप में अरुंधति का गौरव
च-  रूढ़ियों का खंडन स्त्री के प्रति संकीर्ण मान्यताओं पर गुरु जी का साहित्यिक प्रहार 

चतुर्थ अध्याय -
क-  दार्शनिक एवं आध्यात्मिक पक्ष
ख- दांपत्य योग गृहस्थ जीवन को तपोवन बनाना 
ग- प्रकृति एवं संस्कृत काव्य में वर्णित प्रकृति एवं उसका आध्यात्मिक अर्थ 
घ- भारतीय नारी को स्थापित करना 

पंचम अध्याय -
क-    भाषा शिल्प एवं रस योजना 
ख-  भाषा सौष्ठव- संस्कृतनिष्ठ  हिंदी और छंदों का प्रभावी प्रयोग 
ग-   रस - विवेचन शांत करूं और श्रृंगार का समावेश 
घ-   अलंकार विधान - काव्य सौंदर्य बढ़ाने वाले प्रमुख अलंकारों का प्रयोग 

षष्ठ अध्याय-

उपसंहार एवं निष्कर्ष –

शोध का निष्कर्ष
क-   महाकाव्य के माध्यम से प्राप्त होने वाला सार्वभौमिक संदेश 
ख-  आधुनिक समाज के लिए प्रासंगिकता 
ग-    नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में अरुंधती की भूमिका
संदर्भ सूची ग्रंथ
१- अरूंधती महाकाव्य- जगद्गुरु रामभद्राचार्य (तुलसी पीठ प्रकाशन चित्रकूट)
२- अष्टावक्र महाकाव्य – जगद्गुरु रामभद्राचार्य 
३-  राघवकृपाभाष्यम् – जगद्गुरु रामभद्राचार्य 
४- अहिल्योद्धार – जगद्गुरु रामभद्राचार्य 
५-  सीताराम विवाह दर्शन – जगद्गुरु रामभद्राचार्य 

संक्षिप्त जीवन परिचय

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, जैसे अनेकानेक भाषाओं के ज्ञाता, प्रख्यात साहित्यकार , व्याकरणाचार्य , प्राचीन एवं अर्वाचीन और करण संवत कथाकार, सनातन संस्कृति के प्रखर सूर्य, 58वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित(2023), पद्मविभूषण (2015) से विभूषित, (2005) में साहित्य 
अकादमी पुरस्कार से सम्मानित एवं महामहोपाध्याय के मानद उपाधि से गौरवान्वित जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी एक ऐसी विलक्षण विभूति है। जिनके लिए शब्द कम पड़ जाते हैं, उनकी विद्वता तपस्या और साहित्य साधना को शब्दों में व्यक्त करना हिमालय को दर्पण दिखाने जैसा है।
जन्म स्थान - ऐसे महाकवि का जन्म १४ जनवरी १९५० मकर संक्रांति के एकादशी के माध्य रात्रि को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के सुजानगंज क्षेत्र के साड़ी खुर्द ( जो आज इनकी  मां शची देवी के नाम पर शचीपुरम् नाम से  जाना जाता है) में माता श्रीमती शची देवी  से हुआ था । इनके पिता श्री रामदेव मिश्र थे।  इनके बचपन का नाम गिरिधर मिश्रा था। ११नवम्बर १९८३ की कार्तिक पूर्णिमा के परम पावन दिवस पर श्री रामानंद सम्प्रदाय में विरक्त दीक्षा लेकर श्री रामभद्र दास नाम से समलंकृत हुए। 
बालक गिरिधर का जीवन सामान्य रूप से शुरू हुआ था, लेकिन महज दो महीने की आयु में एक त्रासदी घटित हुई। उनकी आँखों में 'रोहे' (Trachoma) नामक संक्रमण हो गया था। गाँव में उचित चिकित्सा सुविधा न होने के कारण, एक वृद्ध महिला ने उनकी आँखों में एक देशी दवा (जड़ी-बूटी का लेप) लगा दी, जिससे उनकी आँखों से रक्तस्राव शुरू हो गया और उन्होंने अपनी दोनों आँखों की रोशनी हमेशा के लिए खो दी।
इलाज के लिए उन्हें लखनऊ के किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी दृष्टि वापस नहीं आ सकी।
शिक्षा- प्रारम्भिक शिक्षा सर्वप्रथम पूज्य पितामह श्री सूर्यबली मिश्र के द्वारा गीता और मानस का आद्यन्त कंठस्थीकरण आठ वर्ष की अल्पायु में ही कराया गया था। तदुपरान्त स्थानीय आदर्श श्री गौरीशंकर संस्कृत विश्वविद्यालय पांच वर्ष पर्यन्त पाणिनीय व्याकरण की आरम्भिक शिक्षा सम्पन्न करके विशेष अध्ययन हेतु वाराणसी स्थित सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रवेश। परीक्षा के हर स्तर पर सर्वातिशायी अंकों की प्राप्ति तथा विभिन्न प्रकार की स्थानीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अनेकानेक स्वर्ण पदकों से सम्मानित तथा आचार्योंपाधि प्राप्त्योपरान्त यू.जी.सी. के द्वारा "आध्यात्मरामायणे अपाणनीय प्रयोगाणाम विमर्श:" विषय पर १९८१ में शोध सम्पन्न कर विद्यावारिधि(Ph.D)की उपाधि प्राप्त किया।

साहित्य साधना - 
प्रकाशित कृतियों का विवरण -
१-मुकुन्द स्मरणम भाग १एवं २ २- भारत महिमा ३- मानस में तापस प्रसंग ४- परम बडभागी जटायू ५- काका विदुर(हिन्दी खंड काव्य) ६- मां सबरी (हिन्दी खंड काव्य) ७- जानकी कृपा कटाक्ष (संस्कृत स्त्रोत काव्य) ८- सुग्रीव की 
कुचाल एवं विभीषण की करतूत, ९- श्री गीता तात्पर्य (दर्शन ग्रंथ) १०- तुलसी साहित्य में कृष्ण कथा(समीक्षात्मक ग्रंथ), ११- सनातन धर्म की विग्रह स्वरूपा गौ माता, १२- मानस में सुमित्रा, १३- श्री रामानंद सिद्धांत चन्द्रिका( संस्कृत में दर्शन ग्रंथ हिन्दी अनुवाद सहित), १४- भक्ति गीत शुधा (गीत काव्य) १५- श्री नारद भक्ति सूत्रेषु राघव कृपा भाष्यम् ( हिन्दी अनुवाद सहित),
जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी एक अत्यंत विपुल रचनाकार हैं। उन्होंने संस्कृत, हिंदी, अवधी, मैथिली और अन्य कई भाषाओं में 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की है। यहाँ उनकी कुछ  अन्य प्रमुख प्रकाशित रचनाओं की सूची प्रस्तुत है, जिन्हें विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
महाकाव्य
१- श्रीभार्गवराघवीयम् (संस्कृत): 2002 में 
प्रकाशित, इस महाकाव्य में 40 सर्ग हैं। इसके लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला है।
२- अष्टावक्र (हिंदी): 2010 में प्रकाशित, यह महाकाव्य ऋषि अष्टावक्र के जीवन पर आधारित है।
३- अरुंधती (हिंदी): 1994 में प्रकाशित, यह ऋषि वशिष्ठ और उनकी पत्नी अरुंधती के जीवन पर आधारित है।
खंडकाव्य-
१- आजादचन्द्रशेखरचरितम् (संस्कृत): स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद पर आधारित।
२- सरयुलहरी (संस्कृत): सरयू नदी की स्तुति में शतक।
३- भृंगदूतम् (संस्कृत): कालिदास के मेघदूतम् की शैली में एक दूतकाव्य।
४- काकविडांबना (संस्कृत): कौवों के माध्यम से शोषक वर्ग पर व्यंग्य।
नाटक -
१- श्रीराघवाभ्युदयम् (संस्कृत): भगवान राम के अभ्युदय पर आधारित एक नाटक।
२- उत्साह (हिंदी): एक एकांकी नाटक संग्रह।
टीका और भाष्य (Commentaries)
उन्होंने 'प्रस्थानत्रयी' (ब्रह्मसूत्र, उपनिषद और भगवद गीता) पर विशिष्टाद्वैत वेदांत के अनुसार भाष्य लिखे हैं:
३- श्रीराघवकृपाभाष्यम्: ब्रह्मसूत्र, भगवद गीता और ईशावास्यादि ग्यारह उपनिषदों पर संस्कृत भाष्य।
४- श्रीरामचरितमानस: रामचरितमानस पर उनकी विस्तृत टीका काफी प्रसिद्ध है।
गीत और स्तोत्र५- राघवगीतगुंजन (हिंदी): गीतों का संग्रह।६- श्रीसीतारामसुप्रभातम (संस्कृत): भगवान राम और सीता की प्रातःकालीन स्तुति।
इनके अलावा, उन्होंने अष्टाध्यायी (पाणिनी 
व्याकरण) पर भी कार्य किया है और अनेक प्रवचन संग्रह भी प्रकाशित हैं।
अरूंधति महाकाव्य का संक्षिप्त परिचय -
प्रस्तुत "अरूंधती" महाकाव्य के प्रणेता वाचस्पति, शास्त्र मर्मज्ञ, आध्यात्म सिंधु, युगद्रष्टा,शब्द ऋषि, सारस्वत प्रतिभा सम्पन्न पौराणिक कथाओं के मर्मज्ञ वैदिक वाङ्मय के महाप्राज्ञा सर्वाम्नाय तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज है। संस्कृत भाषा निष्णात कवि पुंगव पूज्यपाद श्री आचार्य जी ने इस महाकाव्य की सर्जनात्मक परिधि में वेद सम्मत आस्तिक दर्शन के शास्वत सिद्धांत का अनुशीलन भारतीय सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में प्रतिबिम्बित करते हुए मानव जीवन की सम्पूर्ण कलावधि की विकासोन्मुख भावदशाओं का सूक्ष्मातिसूक्ष्म विम्बनिरूपण- सृष्टि, प्रणय, प्रीति, परितोष, प्रतिक्षा, अनुनय, प्रतिशोध, क्षमा, शक्ति, उपराम, प्रबोध, भक्ति, उपलब्धि, 
उत्कंठा और प्रमोद सरिस पंचदश‌सर्गान्तर्गत शीर्षकों में एवं द्विदशशतसप्तनवति पदों में व्यक्त किया है। जो निम्नलिखित हैं -
अरुन्धती का जन्म और विवाह:
कथा का आरम्भ अरुन्धती के परिचय से होता है। वह ऋषि कर्दम और माता देवहूति की आठवीं पुत्री हैं। उनका विवाह ब्रह्मा के मानस पुत्र महर्षि वशिष्ठ के साथ होता है। यह जोड़ी वैदिक संस्कृति में आदर्श दांपत्य जीवन का प्रतीक मानी जाती है। विवाह के समय ब्रह्मा जी उन्हें आशीर्वाद देते हैं कि भविष्य में उन्हें भगवान राम के दर्शन प्राप्त होंगे।

​विश्वामित्र से संघर्ष और पुत्र वियोग:
कथा में एक प्रमुख मोड़ तब आता है जब राजा विश्वरथ (जो बाद में विश्वामित्र बने) वशिष्ठ की कामधेनु गाय को बलपूर्वक छीनने का प्रयास करते हैं। वशिष्ठ के ब्रह्मदंड के सामने विश्वरथ की शक्ति क्षीण हो जाती है। प्रतिशोध की ज्वाला में 
जलते हुए विश्वामित्र, वशिष्ठ और अरुन्धती के 100 पुत्रों को मृत्यु का श्राप दे देते हैं। यह अरुन्धती के लिए अत्यंत कष्टकारी समय होता है, फिर भी वह अपने धैर्य और तपोबल से विचलित नहीं होतीं।
​पुनर्निर्माण और शक्ति का जन्म:
इतने बड़े दु:ख के बाद भी अरुन्धती और वशिष्ठ क्षमाशीलता का परिचय देते हैं। कालान्तर में उन्हें 'शक्ति' और 'सुयज्ञ' नामक पुत्रों की प्राप्ति होती है। दुर्भाग्यवश, विश्वामित्र के उकसावे पर एक राक्षस द्वारा शक्ति का भी वध कर दिया जाता है। इसके बाद अरुन्धती अपने पौत्र (शक्ति के पुत्र) 'पराशर' का पालन-पोषण करती हैं और उसे शिक्षा देती हैं।
​राम की प्रतीक्षा और वनवास:
ब्रह्मा के वरदान के अनुसार, यह ऋषि दम्पति भगवान राम की प्रतीक्षा में अपना जीवन वानप्रस्थ आश्रम में व्यतीत करने लगते हैं। वे 
अयोध्या के पास एक आश्रम में रहने लगते हैं। जब राम का जन्म होता है, तो वशिष्ठ और अरुन्धती अत्यंत हर्षित होते हैं। राम और अरुन्धती के पुत्र सुयज्ञ, दोनों वशिष्ठ के आश्रम में एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं।
​सीता से भेंट और राम वनवास:
मिथिला में राम-सीता विवाह के बाद, जब नवविवाहित जोड़ी अयोध्या आती है, तब अरुन्धती पहली बार सीता जी से मिलती हैं। अरुन्धती सीता को पुत्रीवत स्नेह देती हैं। इसके पश्चात राम को 14 वर्ष का वनवास होता है, जो अरुन्धती के लिए पुनः एक प्रतीक्षा का काल बन जाता है।
​3. महाकाव्य का समापन
​कथा का समापन राम के वनवास से लौटने के बाद होता है। 14 वर्षों के बाद जब राम और सीता अयोध्या लौटते हैं, तो वे अरुन्धती और 
वशिष्ठ के आश्रम में जाते हैं। यहाँ एक अत्यंत भावुक प्रसंग आता है जहाँ अरुन्धती स्वयं अपने हाथों से भोजन बनाकर राम और सीता को खिलाती हैं। इसी मिलन और भोजन के प्रसंग के साथ महाकाव्य का सुखद अंत होता है।
 
 
आपने अरूंधती के माध्यम से संसार को यह बोध कराया है कि भारतीय सांस्कृतिक में स्त्री केवल अनुगामिनी नहीं, अपितु ऋषियों की भी मार्गदर्शक एवं तपो भूमि है।इस महाकाव्य में नारी विमर्श का उदात्त रूप आपने प्रस्तुत किया है वह आधुनिक जगत के लिए अनुकरणीय है। 
प्रस्तुत महाकाव्य में करूण,वीर एवं शांत रस की त्रिवेणी प्रवाहित होती है आपकी लेखनी ने संस्कृत और शास्त्रीयता और हिंदी की तरलता को जिस प्रकार से एकाकर किया है, वह आपकी उभय भाषाचक्रवर्ती उपाधि को सार्थक 
करता है । अरुंधति महाकाव्य आध्यात्मिक तर्पण है,  जिसमें गृहस्थ जीवन पवित्रता और बैराग्य की पराकाष्ठा एक साथ दिखाई पड़ती है आपने वशिष्ठ और अरुंधती के संबंधों के माध्यम से दांपत्य जीवन की जो व्याख्या की है वह हिंदी साहित्य में अद्वितीय है।
आपकी भाषा कालिदास के लालित्यपूर्ण शैली और तुलसीदास की भक्ति प्रवणता का अनूठा संगम है। अलंकारों का सहज प्रयोग और छंदों की गतिशीलता पाठक को उस युग में ले जाती है, जहां ऋषि और देव संवाद करते थे।
 'अरुंधति'  शब्द-  शब्द मंत्र की भांति पवित्र और प्रभावशाली है। जहां प्रज्ञा और करुणा का मिलन होता है वही अरुंधती जैसा चरित्र जन्म लेता है।
अरुंधति महाकाव्य आधुनिक काल  में आर्ष काव्य परंपरा का पुनरूद्धार है, इसमें केवल शब्दों का चमत्कार नहीं अपितु  अनुभूतियों का 
साक्षात्कार है। इस महाकाव्य में आपने यह सिद्ध किया है कि ज्ञान एवं भक्ति परस्पर विरोधी नहीं है, बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं।

महाकाव्य पर शोध की आवश्यकता
इस महाकाव्य पर शोध की आवश्यकता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
१.   नारी गरिमा और सशक्तिकरण का पुनरुद्धार
प्राचीन भारतीय साहित्य में ऋषियों की चर्चा अधिक होती है, जबकि ऋषिकाओं (विदुषी महिलाओं) का जीवन अक्सर पृष्ठभूमि में रह जाता है।
नायिका-प्रधान महाकाव्य: यह महाकाव्य वशिष्ठ 
की पत्नी अरुंधती को केंद्र में रखकर लिखा गया है। शोध के माध्यम से यह सामने लाया जा सकता है कि कैसे कवि ने एक पौराणिक नारी पात्र को आधुनिक संदर्भ में ‘सशक्त नारी’ के रूप में प्रस्तुत किया है।
शिक्षा और अधिकार: इसमें नारी शिक्षा और समाज में उनके समान अधिकारों की वकालत की गई है, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है।
२.   भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों की स्थापना
वर्तमान दौर में जब सांस्कृतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, ‘अरुंधती’ महाकाव्य भारतीय गृहस्थ जीवन के आदर्शों को प्रस्तुत करता है।
दांपत्य जीवन का आदर्श: वशिष्ठ और अरुंधती का जीवन दांपत्य प्रेम, त्याग और सहधर्मचारिणी के रूप में आदर्श प्रस्तुत करता है। शोध द्वारा यह स्थापित किया जा सकता है 
कि सफल गृहस्थ जीवन के लिए आपसी सामंजस्य कितना आवश्यक है।
समन्वयवादी दृष्टिकोण: ग्रंथ में विभिन्न दार्शनिक मतों और सामाजिक वर्गों के बीच समन्वय का प्रयास है, जिसे शोध द्वारा और अधिक स्पष्ट किया जा सकता है।
३.   साहित्यिक और भाषाई महत्व
हिंदी साहित्य में महाकाव्य परंपरा क्षीण होती जा रही थी, जिसे इस ग्रंथ ने पुनर्जीवित किया है।
रस और अलंकार योजना: इस महाकाव्य में ‘करुण’ और ‘शृंगार’ रस का अद्भुत परिपाक है। शोधकर्ता इसके छंद, बिम्ब और अलंकारों के प्रयोग का विश्लेषण कर हिंदी साहित्य की समृद्धि को उजागर कर सकते हैं।
संस्कृतनिष्ठ हिंदी: इसकी भाषा शैली पर शोध करने से यह समझा जा सकता है कि कैसे तत्सम शब्दावली का प्रयोग करते हुए भी भावों को सहजता से व्यक्त किया जा सकता है।
४.   उपेक्षित पात्रों को न्याय
रामायण और अन्य पौराणिक कथाओं में अरुंधती का उल्लेख मिलता है, लेकिन उनका विस्तृत जीवन परिचय दुर्लभ है। इस महाकाव्य पर शोध करने से एक उपेक्षित पौराणिक चरित्र के व्यक्तित्व के विभिन्न आयाम (जैसे उनकी तपस्या, विद्वता और मातृत्व) समाज के सामने आ सकेंगे।
५.   आधुनिक समस्याओं का समाधानकवि ने पौराणिक कथा के माध्यम से आज की समस्याओं (जैसे जातिवाद, नारी शोषण, शिक्षा का अभाव) पर भी प्रकाश ला है। शोध का एक उद्देश्य यह खोजना हो सकता है कि यह महाकाव्य आधुनिक सामाजिक चुनौतियों के क्या समाधान प्रस्तुत करता है।
अन्त में महाकवि के लिए दो शब्द-
नयनों न अस्ति मस्त ज्ञानचक्षु विराजते,
साहित्य सिंधु हंसाय,रामभद्राय ते नमः।।
 अर्थात जिनके भौतिक नेत्र नहीं है, पर ज्ञान के चक्षु विराजमान है, साहित्य रूपी सागर के उस राजहंस जगतगुरु रामभद्राचार्य को कोटि-कोटि नमन।

 
 

सोमवार, 1 जनवरी 2024

नववर्ष 2024

यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

🍀🍀 2024 की हार्दिक शुभकामनाएं 🍀🍀


सुख, संपत्ति, स्वरुप, संयम, सादगी,सफलता, साधना, संस्कार, स्वास्थ्य,सम्मान, शान्ति एवं समृध्दि की मंगल कामनाओं के साथ  नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!
🙏🙏🙏🙏
आलोक त्रिपाठी
सुजानगंज जौनपुर

सोमवार, 30 अक्टूबर 2023

हिंदी भाषा एवं बोलियाँ*

 *हिंदी भाषा एवं बोलियाँ* 

     पश्चिमी हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
      पांच 
*✍पश्चिमी हिंदी की कौन-कौन सी बोलियां हैं ?*
खड़ी बोली या कौरवी, ब्रजभाषा, हरियाणी, बुंदेली और कन्नौजी ।
*✍पूर्व हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी ।
*✍राजस्थानी हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, मालवी ।
*✍पहाड़ी हिन्दी को कितने भागों में बांटा गया है ?*
पश्चिमी पहाड़ी और मध्यवर्ती पहाड़ी (कुमाऊंनी तथा गढ़वाली)
*✍बिहारी में हिन्दी की कितनी बोलियां हैं ?*
तीन- मगही, भोजपुरी और मैथिली ।
*✍भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्राचीनतम प्रयोग कहां मिलता है ?*
शरफुद्दीन के जफरनामा में
*✍हिंदी का वास्तिव आरंभ कब से माना जाता है ?*
1000 ई.
*✍हिंदी क्षेत्र की बोलियों में सबसे ज्यादा कौन-सी बोली बोली जाती है ?*
भोजपुरी 
*✍साहित्यिक दृषि से हिंदी भाषा की सबसे महत्वपूर्ण बोली कौन-सी है ?*
बज्रभाषा
*✍ताज्जुबेकिस्तान में कौन सी हिंदी बोली जाती है ?*
बज्रभाषा
*✍भारत के बाहर सबसे ज्यादा अवधी कहां बोली जाती है ?*
फिजी
*✍हिंदी का पहला समाचार पत्र कौन था ?*
उदंत मार्तण्ड
*✍अशोक के समय राजकाज की भाषा क्या थी ?*
पाली
*✍मुहम्मद गोरी से लेकर अकबर तक राजकाज की भाषा क्या थी ?*
हिंदी
*✍अकबर के शासन काल में मंत्री टोडरमल के आदेश से किस भाषा को हिंदी की जगह पर राजभाषा बनाया गया ?*
फारसी
*✍ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब तक फारसी को राजभाषा बनाए रखा ?*
1833 ई. तक
*✍संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया था ?*
गोपाल स्वामी आयंगर
*✍भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा के रुप में कब मान्यता मिली ?*
14 सितंबर, 1949
*✍संविधान के किस अनुच्छेद में हिंदी को संघ की भाषा और देवनागरी को लिपि कहा गया है ?*
अनुच्छेद 343
*✍राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?*
बालगंगाधर खरे
*✍संविधान के किस सूची में भाषा को सम्मिलित किया गया है ?*
आठवीं अनुसूची
*✍आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को शामिल किया गया है ?*
25
*✍जनसंख्या की दृष्टि से सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी का कौन-सा स्थान है ?*
तीसरा
*✍भारतीय लिपियों में सर्वश्रेष्ठ लिपि किसे मानी गई है ?*
ब्राह्मी लिपि
*✍हिंदी के उद्भव का सही क्रम है ?*
पालि, प्राकृत,अपभ्रंश, अवहट्ट
*✍हिंदी का संबंध किससे है ?*
शौरसेनी अपभ्रंश
*✍अपभ्रंश को पुरानी हिंदी किसने कहा ?*
चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
*✍शौरसेनी अपभ्रंश में किस उपभाषा का विकास हुआ ?*
राजस्थानी
*✍साहित्यिक अपभ्रंश को पुरानी हिंदी किसने कहा था ?*
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
*✍खड़ी बोली हिंदी में सर्वप्रथम रचना करने वाले कवि किसे माना गया है ?*
अमीर खुसरो
*✍चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने किसको पुरानी हिंदी का प्रथम कवि माना है ?*
राजामुंज
*✍देवनागरी लिपि की उत्पत्ति किसके हुई ?*
ब्राह्मी
*✍तुलसी रचित विनय पत्रिका की क्या भाषा है ?*
ब्रज
*✍मैथिली का विकास किस अपभ्रंश से माना जाता है ?*
मागधी अपभ्रंश
*✍फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना कहां हुई ?*
कोलकाता
*✍कचहरियों में हिंदी प्रवेश आंदोलन का मुखपत्र किस पत्र को कहा जाता है ?*
भारत-मित्र
*✍नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना कब हुई ?*
1893 ई.
*✍नागरी प्रचारिणी सभा के संस्थापकों में कौन शामिल थे ?*
शिवकुमार सिंह और बाबू श्यामसुंदर दास
*✍रामचरितमानस किस भाषा में लिखा गया है ?*
अवधी
*✍खड़ी बोली का प्रयोग सबसे पहले किस किताब में हुआ ?*
प्रेमसागर
*✍ब्रजभाषा किस अपभ्रंश से विकसित हुआ है ?*
शौरसेनी
*✍पश्चिमी हिंदी की सबसे प्रमुख बोली कौन है ?*
ब्रजभाषा
*✍पश्चिमी हिंदी किस अपभ्रंश से विकसित हुई है ?*
शौरसेनी
*✍किस क्षेत्र की बोली को काशिका कहा गया है ?*
बनारस
*✍शकुन्तला नाटक का खड़ी बोली में अनुवाद किसे किया ?*
राज लक्ष्मण सिंह
*✍अवधी की उत्पति किस अपभ्रंश से हुई है ?*
अर्धमागधी
*✍किस बोली में कृष्ण काव्य और रीतिकालीन साहित्य का सृजन हुआ ?*
ब्रजभाषा
*अहीरवाटी का संबंध किससे है ?*
उत्तरी राजस्थानी
*✍ भाषा की उत्पति किस अपभ्रंश से हुई है ?*
ब्राचड़ अपभ्रंश
*✍बिहारी, बंगला, उड़िया और असमिया का उद्भव किस अपभ्रंश से हुआ है ?*
मागधी