नववर्ष 2024

यूपी टीजीटी पीजीटी हिन्दी साहित्य

🍀🍀 2024 की हार्दिक शुभकामनाएं 🍀🍀


सुख, संपत्ति, स्वरुप, संयम, सादगी,सफलता, साधना, संस्कार, स्वास्थ्य,सम्मान, शान्ति एवं समृध्दि की मंगल कामनाओं के साथ  नये वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!
🙏🙏🙏🙏
आलोक त्रिपाठी
सुजानगंज जौनपुर

हिंदी भाषा एवं बोलियाँ*

 *हिंदी भाषा एवं बोलियाँ* 

     पश्चिमी हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
      पांच 
*✍पश्चिमी हिंदी की कौन-कौन सी बोलियां हैं ?*
खड़ी बोली या कौरवी, ब्रजभाषा, हरियाणी, बुंदेली और कन्नौजी ।
*✍पूर्व हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी ।
*✍राजस्थानी हिंदी की कितनी बोलियां हैं ?*
मारवाड़ी, जयपुरी, मेवाती, मालवी ।
*✍पहाड़ी हिन्दी को कितने भागों में बांटा गया है ?*
पश्चिमी पहाड़ी और मध्यवर्ती पहाड़ी (कुमाऊंनी तथा गढ़वाली)
*✍बिहारी में हिन्दी की कितनी बोलियां हैं ?*
तीन- मगही, भोजपुरी और मैथिली ।
*✍भाषा के लिए हिंदी शब्द का प्राचीनतम प्रयोग कहां मिलता है ?*
शरफुद्दीन के जफरनामा में
*✍हिंदी का वास्तिव आरंभ कब से माना जाता है ?*
1000 ई.
*✍हिंदी क्षेत्र की बोलियों में सबसे ज्यादा कौन-सी बोली बोली जाती है ?*
भोजपुरी 
*✍साहित्यिक दृषि से हिंदी भाषा की सबसे महत्वपूर्ण बोली कौन-सी है ?*
बज्रभाषा
*✍ताज्जुबेकिस्तान में कौन सी हिंदी बोली जाती है ?*
बज्रभाषा
*✍भारत के बाहर सबसे ज्यादा अवधी कहां बोली जाती है ?*
फिजी
*✍हिंदी का पहला समाचार पत्र कौन था ?*
उदंत मार्तण्ड
*✍अशोक के समय राजकाज की भाषा क्या थी ?*
पाली
*✍मुहम्मद गोरी से लेकर अकबर तक राजकाज की भाषा क्या थी ?*
हिंदी
*✍अकबर के शासन काल में मंत्री टोडरमल के आदेश से किस भाषा को हिंदी की जगह पर राजभाषा बनाया गया ?*
फारसी
*✍ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब तक फारसी को राजभाषा बनाए रखा ?*
1833 ई. तक
*✍संविधान सभा में हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया था ?*
गोपाल स्वामी आयंगर
*✍भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा के रुप में कब मान्यता मिली ?*
14 सितंबर, 1949
*✍संविधान के किस अनुच्छेद में हिंदी को संघ की भाषा और देवनागरी को लिपि कहा गया है ?*
अनुच्छेद 343
*✍राजभाषा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?*
बालगंगाधर खरे
*✍संविधान के किस सूची में भाषा को सम्मिलित किया गया है ?*
आठवीं अनुसूची
*✍आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाओं को शामिल किया गया है ?*
25
*✍जनसंख्या की दृष्टि से सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिन्दी का कौन-सा स्थान है ?*
तीसरा
*✍भारतीय लिपियों में सर्वश्रेष्ठ लिपि किसे मानी गई है ?*
ब्राह्मी लिपि
*✍हिंदी के उद्भव का सही क्रम है ?*
पालि, प्राकृत,अपभ्रंश, अवहट्ट
*✍हिंदी का संबंध किससे है ?*
शौरसेनी अपभ्रंश
*✍अपभ्रंश को पुरानी हिंदी किसने कहा ?*
चंद्रधर शर्मा ‘गुलेरी’
*✍शौरसेनी अपभ्रंश में किस उपभाषा का विकास हुआ ?*
राजस्थानी
*✍साहित्यिक अपभ्रंश को पुरानी हिंदी किसने कहा था ?*
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
*✍खड़ी बोली हिंदी में सर्वप्रथम रचना करने वाले कवि किसे माना गया है ?*
अमीर खुसरो
*✍चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने किसको पुरानी हिंदी का प्रथम कवि माना है ?*
राजामुंज
*✍देवनागरी लिपि की उत्पत्ति किसके हुई ?*
ब्राह्मी
*✍तुलसी रचित विनय पत्रिका की क्या भाषा है ?*
ब्रज
*✍मैथिली का विकास किस अपभ्रंश से माना जाता है ?*
मागधी अपभ्रंश
*✍फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना कहां हुई ?*
कोलकाता
*✍कचहरियों में हिंदी प्रवेश आंदोलन का मुखपत्र किस पत्र को कहा जाता है ?*
भारत-मित्र
*✍नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना कब हुई ?*
1893 ई.
*✍नागरी प्रचारिणी सभा के संस्थापकों में कौन शामिल थे ?*
शिवकुमार सिंह और बाबू श्यामसुंदर दास
*✍रामचरितमानस किस भाषा में लिखा गया है ?*
अवधी
*✍खड़ी बोली का प्रयोग सबसे पहले किस किताब में हुआ ?*
प्रेमसागर
*✍ब्रजभाषा किस अपभ्रंश से विकसित हुआ है ?*
शौरसेनी
*✍पश्चिमी हिंदी की सबसे प्रमुख बोली कौन है ?*
ब्रजभाषा
*✍पश्चिमी हिंदी किस अपभ्रंश से विकसित हुई है ?*
शौरसेनी
*✍किस क्षेत्र की बोली को काशिका कहा गया है ?*
बनारस
*✍शकुन्तला नाटक का खड़ी बोली में अनुवाद किसे किया ?*
राज लक्ष्मण सिंह
*✍अवधी की उत्पति किस अपभ्रंश से हुई है ?*
अर्धमागधी
*✍किस बोली में कृष्ण काव्य और रीतिकालीन साहित्य का सृजन हुआ ?*
ब्रजभाषा
*अहीरवाटी का संबंध किससे है ?*
उत्तरी राजस्थानी
*✍ भाषा की उत्पति किस अपभ्रंश से हुई है ?*
ब्राचड़ अपभ्रंश
*✍बिहारी, बंगला, उड़िया और असमिया का उद्भव किस अपभ्रंश से हुआ है ?*
मागधी

"अन्तरात्मा की पुकार ''और कवि

अन्तरात्मा की पुकार ''और कवि
डॉ  सुरेश कुमार शुक्ला
         प्रवक्ता संस्कृत
राजकीय विद्यालय झारखंड

"नरत्वं दुर्लभं लोके, विद्या तत्र सुदुर्लभा। शीलं च दुर्लभं तत्र, विनयस्तत्र सुदुर्लभः॥" हिन्दी साहित्य परम्परा में सतत् तत्पर रहते वाले भावभीनी प्रतिभा से विभूषित सहृदयों के हृदय को हिलोर देने वाले भाषा विलासिनी भुजंगम् आचार्य पंडित श्री राम बरन त्रिपाठी द्वारा रचित मुक्तक काव्य "अंतरात्मा की पुकार" को पाठक जितनी बार पढ़ते हैं उतना ही आनंद बढ़ता चला जाता है विगत वर्षों में यद्यपि बहुत सारे गद्य काव्य, कथा संग्रह,पद्य काव्य, चम्पू काव्य आदि विधाएं प्रकाशित हुई इस तरह का प्रत्येक छंद अपने आप में पूर्ण आनंद प्रदान करने वाला काव्य तैयार करने की कला तो केवल पंडित जी में ही दिखाई देती है। इनकी लेखनी जिस भी विधा में चल जाती है वहां अमित छाप छोड़ जाती है।
आधुनिक हिंदी साहित्य के इतिहास में एक और कड़ी को मुखरित और पल्लवित कर त्रिपाठी जी का एक - एक मुक्तक सहद में डूबा हुआ प्रतीत होता है।
श्री त्रिपाठी जी की लेखनी में अद्भुत क्षमता है जो वाणी से समेटना उनके साथ अन्याय होगा लेखन लेखक के अन्तर्जगत का प्रतिबिम्ब होता है। प्रत्येक लेखकके लेखन में उसके व्यक्तित्व की झलक दिखता है। यही कारण है कि त्रिपाठी जी के मुक्तक काव्य में सोद्देश्य उपादेयता नैतिकता, देश प्रेम, राजनीति, प्रपंच आदि का सांगोपांग चित्रण करने में जरा भी कोर - कसर नहीं छोड़ा है।

स्वनामधन्य, विप्रवंश, शिरोमणि श्री त्रिपाठी जी के विषय में कुछ कह पाना अपनी एक दृष्टता ही होगी , परन्तु हृदय में जो उफान है वह रुक भी नहीं रहा है। किसी भी कार्य को करने का कुछ न कुछ प्रयोजन अवश्य ही  होता है -
“प्रयोजनं विना तु मन्दोऽपि न प्रवर्तते |”
इसलिए कहा भी गया है कि- कस्यचिदपि कार्यस्य कर्मणो वापि कस्याचित्। यावत्प्रयोजनं नोक्तं तावत्केन गृहते।।
सात्विक श्रोत से आयी हुई सम्पत्तियां  हमेशा सुखकारी होती है पाप कर्मों से आयी हुई सम्पत्तियां सदा कलुषता को ही उत्पन्न करती है त्रिपाठी जी का सात्विक विचार निश्चित ही रूप से उनके काव्य में झलक रहा है। वास्तव में यह हिन्दी साहित्यकार हिन्दी साहित्य समाज में व्याप्त सामाजिक जटिलता को दूर करने में, कठिनता को सरल करने में, आर्थिक , राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक, जातिवाद, राष्ट्रवाद , भ्रष्टाचार आदि जैसी विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से अपने इस प्रयास के माध्यम से मुक्तक काव्य की रचना करने में सार्थक सिद्ध हुए हैं।


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