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गांव की चौरा देवी

            गाँव की चौरा देवी
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नवरात्र का समय | गाँव में माँ चौरा देवी के मधुर गीत स्त्रियों के द्वारा गाए जा रहे हैं | हमारे देश में देवी – देवताओं को प्रसन्न करने हेतु उनके मंदिर बनाए जाते हैं, जहाँ पर के बच्चे, युवक स्त्री-पुरुष इकट्ठा होकर देवी-देवताओं के गुनगान किया करते हैं |
                            
                           रामपुर गाँव के दक्षिणी दिशा में चौरा देवी का मंदिर है | चाहे नवरात्र हो, शादी – विवाह आदि शुभ कार्यों में माँ चौरा देवी की पूजा – अर्चन अनिवार्य होती है | गाँव के लोग अपनी मन की मनौतियाँ की पूर्ति हेतु माँ चौरा देवी की आराधना – प्रार्थना – पूजा – अर्चन किया करते हैं | यदि किसी की बिटिया की शादी में अवरोध हो, गरीबी के कारण बहुत सी लड़कियाँ कँवारी रह जाती हैं | माँ चौरा देवी की आराधना – पूजा –अर्चन से सब की कामना अवश्य पूरी हो जाती है |
                             
                           एक बार रामपुर गाँव में भयंकर अकाल पड़ा | वर्षा ऋतु में एक भी बूँद आसमान से नहीं टपकी | बारिस न होने से वनस्पतियाँ, फसलें सूखने के कगार पर पहुँच गई | पीने का पानी दुर्लभ हो गया | बारिस न होने से पशु – पक्षियाँ भी मरने लगी | गाँव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है |
                           एक दिन गाँव के मुखिया ने गाँववालों को अपने पास बुलाया और कहा – “ भाइयों, बहनों, माताओं, इस वर्ष महासंकट का समय है ’’| इस महाकाल से उबरने हेतु आप सब अपना विचार व्यक्त कीजिए, जिससे इस महामारी से मुक्ति मिल सके | गाँव के एक सबसे बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा – अरे मुखिया जी, काहे को चिंता करते हो ? जब तक चौरा माई हैं, तब तक हमारे गाँव का कोई भी बालबॉका नहीं कर सकता | चाहे बाढ़ हो, सूखा हो, महाकाल हो, हमारी चौरा माँ रक्षा करती आ रही हैं, और आज भी अवश्य करेंगी, इसमें संदेह का अवकाश नहीं है | गाँव के लोगों ने हाथों को उठाकर कहा “राघव चाचा बिलकुल ठीक कह रहे हैं ---- ठीक कह रहें हैं | इस प्रकार की कई लोगों की समवेत ध्वनियाँ सुनाई देनी लगीं | गाँव वालों ने निर्णय किया कि कल सोमवार को चौरा देवी के मंदिर पर इकठ्ठा होना है और उसकी साफ – सफाई करना होगा | गाँववालों ने अपनी सहमति दे दी |
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                       प्रात:काल का समय | ब्रह्मबेला का आगमन हो चुका है | ग्रामीण जन स्नान – ध्यान – पूजा – पाठ आदि कार्यों में तल्लीन दिखाई दे रहे हैं | चौरा देवी के मंदिर में घण्टा – घड़ियाल की प्रचण्ड – ध्वनियाँ अनवरत सुनाई पड़ रही है | ग्रामीण स्त्रियों के द्वारा देवीगीत गाए जा रहे हैं | मंदिर का पूरा परिसर मंगलमय हो चुका है | चारों दिशाओं में पंडित जनों द्वारा वैदिक मंत्रों कंठ मधुर और विशुद्ध उच्चारण हो रहा है | मंदिर का परिसर विधुत बल्बों की रोशनी में नहाया हुआ है |
                      
                       मंदिर के पुजारी ने चौरा देवी की स्तुतियाँ का समवेत गायन शुरू कर दिया है | चौरा देवी अचानक प्रकट हो गई | उन्होंने पुजारी से कहा– “मैं गाँव वालों पर अप्रसन्न हूँ, पुजारी ने पूछा क्यों माई ? उन्होंने उत्तर दिया – विगत पाँच वर्षों में मेरे चौरा पर कोई मांगलिक सुकृत्य संपन्न नही हुए हैं | जिसका दुष्परिणाम तुम्हारे समक्ष दिखाई दे रहा है | यदि अकाल – महामारी आदि बीमारियों से बचना हो तो, मेरे चौरा पर प्रतिवर्ष मांगलिक कार्यों का संपादन अवश्य होना चाहिए | विशेषकर शारदीय नवरात्र में पूजन – अर्चन – अवश्य करें और करवाएँ | चौरा देवी के मुख से यह दिव्य वाणी सुनकर के पुजारी ने मौन स्वीकृति प्रदान कर दिया | चौरा देवी यह कह करके अन्तर्धान हो गई |
               
                        पुजारी ने गाँववालों से चौरा देवी की दैवीवाणी को सुनाया | गाँववालों ने स्वीकृति प्रदान कर दी | पुजारी की विनम्र प्रार्थना पर चौरादेवी का पुन: प्राकट्य हुआ | उन्होंने दिव्यवाणी में कहा – “आप लोगों की मेरी आराधना – पूजा – अर्चन आदि से मैं अति प्रसन्न हूँ | अब इस गाँव में किसी भी प्राणी की अकाल मृत्यु नहीं होगी | कोई कन्या कुँवारी नहीं रहेंगी | सर्दी – गर्मी बारिस की ऋतुएँ समय पर आती रहेंगी | गाँव में अन्न – जल का अभाव कदापि नहीं होगा | ग्रामीण जनों में खुशहाली रहेगी | ऐसा वचन देकर चौरादेवी अन्तर्धान हो गई | उनके अन्तर्धान होने पर ग्रामीणजनों में खुशियों की लहर दौड़ गई | बारिस का आगमन सन्निकट है | आकाश मण्डल श्यामवर्ण वाले जलद से आच्छादित हो उठा है | वनों में मयूर मण्डली ने अपनी मधुर ध्वनियों से जलागमन की सूचना दे दिया है | मेढकों की टर्र – टर्र की कर्कश ध्वनियों से सरोवर गुंजायमान हो चुका है | देखते – देखते ही बारिस शुरू हो गई | नदी – नद, सरोवरों में जल भर गया है | ग्रामीण जन अपने खेतों में धान की बेरन डालना शुरू कर दिया है | स्त्रियाँ गृहस्थी के सामानो को चार महीनों के लिए इकट्ठा करना शुरू कर दिया है | ग्रामीण बच्चे नदियों सरोवरों में क्रीड़ाएँ करना आरंभ कर दिए हैं | पगडंडियों पर पानी का जमाव हो गया हैं | राजमार्गों
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पर यदा-कदा वाहन भागते हुए दिखाई दे रहे हैं | गर्मी की ऊमस समाप्त होने लगी है | ठण्डी हवाएँ शनै: शनै: बहने
                               
लगी हैं | गांवों में अखाड़े खुलने लगे हैं | ग्रामीणजन अखाड़ों में कसरत और कुश्ती का अभ्यास कर रहे हैं |
                   माँ चौरादेवी की कृपा चतुर्दिक बरसने लगी है | गाँव की स्त्रियाँ आपस में कानाफूसी करने लगी हैं | वे कहती हैं कि सुना नहीं, रामू की माई, चौरादेवी ने खुश होकर गाँव पर – धन – वर्षा कर दिया है | निरहू की कुँवारी बिटिया की शादी जो, गरीबी के कारण रूकी थी, किसी अमीर लड़के के साथ निश्चित हो चुकी है | देखो, बहन जी, चौरामाई की दैवीशक्ति | बिना उनकी कृपा से संसार में कुछ प्राप्त नहीं हो सकता है | उनकी कृपा की वर्षा होने पर सबकुछ अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं | ऐसी माँ चौरादेवी की बारंबार जयकारा लगाना चाहिए | वे भी दयालु हैं | वे हम लोगों की मनोकामना पूरा करेंगी | इसमें कुछ भी संदेह का अवकाश नहीं हैं |



             

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