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कहानी

सरहद की एक रात*
                                (10)
        माँ ! हमारे गाँव में बंदूकों , राइफलों और मोर्टारों की भयानक आवाजें क्यों सुनाई देती हैं ? इनकी डरावनी आवाजों से मै रात में डर जाता हूँ | कभी-कभी मेरा बिस्तर भी गीला हो जाता है | माँ ने राजू की बातों को सुनकर उत्तर दिया –“बेटा , इन दिनों भारत पाक सीमा पर तनाव बढ़ गया है | बी॰ एस॰ एफ॰ की सेनाएँ सीमा पर तैनात है | पाक भारत का जन्म से दुश्मन है | वह भारत की उन्नति और अपनी अवनति देखकर बौखलाया हुआ है | वह अपने देश के मासूम बच्चों के हाथो में कलम के स्थान पर बंदूक देता है | किताबों की जगह हथियार देता है | वह उनके मन में प्रेम, करूणा, भाईचारा, सहनशीलता की जगह नफरत, निष्ठुरता, भेदभाव, प्रतिशोध जैसे नकारात्मक भावों को पैदा करता है | माँ की बातों को सुनकर मासूम बालक पुन: प्रश्न करता है | -“ माँ, आखिर क्यों” ? मानव तो प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ कहा गया है | वह ज्ञानी, वैज्ञानिक, दार्शनिक, विद्वान और जीवजंतुओं का रक्षक है | तो , फिर क्यों ? ऐसा अमानवीय और जघन्य अपराध में प्रवृत्त होता है ? मेरी प्यारी माँ, मुझे समझाओ न | माँ , मै अनजान हूँ | बालक की बालपन की प्यारी बातों को सुनकर के माँ चिंतन करने लगी | राजू ने सच्चा प्रश्न किया है | यदि वह सही उत्तर नही देती तो उसकी जिज्ञासा प्रसुप्त हो जाएगी और बाल मन को आघात लगेगा | यदि उत्तर देती है तो , उसके मन में दुश्मनों के प्रति नफरत और प्रतिरोध के भाव पैदा होंगे |
                 अमावस्या की काली और भयानक रात | सरहद के गाँवों में सन्नाटा पसरा हुआ है |
ग्रामीण जनों में दहशत व्याप्त है | रात में रूक रूक कर सरहद के उस पार से गोलाबारी हो रही है | क्षणभर पश्चात् सीमा पार से जोरदार धमाका सुनायी दिया | शिशु का हृदय काँप उठा | वह बार – बार अपनी माँ से पूछता है – माँ, यह कैसी भयानक और डरावनी आवाज सुनाई दे रही है ? माँ , अपने बच्चे को छाती से चिपकाकर के सुलाना चाहती है | किन्तु वह आशंकाओं के दलदल से निकल नहीं पाती है | उसे यह आशंका सदैव बनी रहती है कि सरहद के उस पार से जाने कब गोलियां की वर्षा प्रारम्भ हो जाय ?
               वह युद्ध की भयानकता को नहीं देख सकती क्योकि नारी का हृदय सुकोमल होता है | वह पुरूष के अत्याचारों को अपनी मृदुल भावनाओं से जीतना चाहती है | वह जानती है कि खूंखार शेर को शेरनी अपनी भाव भंगीमाओं से जीत लेती है | वह उसके समक्ष नतमस्तक हो जाता है | क्योंकि प्राणी जगत में प्रेमभाव का बीज समान रूप से विद्यमान होता है | 
                                      (11)
                नारी शक्ति दुनियाँ की सर्वश्रेष्ठ शक्ति होती है | नारी ही सृष्टि की रचयित्री है | यदि नारी का प्रादुर्भाव न हुआ होता , तो ब्रह्मा की सृष्टि आधी – अधूरी होती | मानव की जन्मदायनी माँ स्वर्ग से भी बढ़कर होती है | इसमें संदेह का अवकाश नही है |
                नारी की सहनशीलता अपरिमित है , जो अपनी शरीर को फाड़कर सुंदर शिशु का जन्म देती है पुरूष की जन्मदायनी नारी सृष्टि की संचालिका कही गई है | वह सृष्टि निर्माता के कार्यों में सहयागिनी है | जो नारी पुरूष के निर्मम अत्याचारों को चुपचाप सहन कर लेती है , वह स्त्री कमल से भी कोमल एवं पत्थर से भी कठोर होती है |
  प्रभात का समय | सरहद पर पिछली रात में आतंकियों द्वारा भीषण नरसंहार किया गया है | चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है | कही कौओ का समूह , कही कुत्तों का जमावड़ा दिखलाई देता है | चारों दिशाओं में नीरवता और भयानकता पसरा हुआ है | सीमावर्ती गांवों के लोग अपने – अपने घरों से निकलकर पलायन कर रहे हैं | आज की रात में भयंकर युद्ध की आशंका से ग्रामीण लोगों में भय परिव्याप्त है | सरकार की ओर से रेड अर्लट जारी कर दिया गया है | गाँव की स्त्रियाँ अपने नवजात शिशुओं को छाती से चिपकाए हुए है | गर्भस्थ शिशु जन्म के पूर्व ही गोलियों की भयानक शोर सुनकर के काँप जाता है | वह अन्तर्मन में सोचता है –“ हे ईश्वर ! तुम्हारी बनायी हुई सृष्टि इतनी निर्मम क्यो है ?क्या तुम्हारी सृष्टि में दया करना, प्रेम, उदारता, सहिष्णुता, क्षमाशीलता आदि देवी गुणों का अभाव हो गया है ? क्या तू ने संसार की संरचना विनाश करने हेतु किया है | यदि तुम्हारे मन में ऐसा विचार था तो , संसार की संरचना ही क्यों किया ? ऐसे तमाम अनुत्तरित प्रश्न गर्भस्थ शिशु के अन्तर्मन में समुद्र की तरंगो के सदृश उठ रहे है और उसी में विलीन हो रहे हैं |
          सीमा पर शहीद हुए एक सैनिक के शव को देखने के लिए गाँव में कोहराम मचा हुआ है | पाँच वर्षीय शिशु अपने पिता का शव देखकर माँ से प्रश्न किया – “ माँ , यह कौन है ? जिसे देखकर गाँव में भंयकर रोने की आवाज़ सुनाई दे रही है ? माँ ने उत्तर दिया – “ बेटा, ये तुम्हारे पिता जी है | सरहद पर युद्ध करते समय पाक के दुश्मनों की गोलियो का शिकार हुए है | शिशु ने माँ से पुन: पुछा – “ माँ , मेरे पिताश्री क्यों बोल नहीं रहे है ? माँ ने उत्तर दिया – “ बेटा , तुम्हारे पिताश्री अब कभी बात नहीं करेंगे | शिशु का अन्तर्मन काँप उठा | उसने संकल्प किया –“ वह बड़ा होकर सैनिक बनेगा और सीमा पर शहीद हुए अपने पिताश्री का प्रतिशोध अवश्य लेगा |
           नन्हा शिशु अपने अन्तर्मन में कुछ बुदबुदाता हुआ अपनी माँ की छाती को पकड़कर सो जाता है |
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           माँ अपने अनजान शिशु को अपनी छाती से चिपकाए हुए किसी भावी आशंका में खो जाती है | उसे काली रात में एक भयानक काला चेहरा दिखाई पड़ता है, जिसने उसके पति को जबरन उससे छीन लिया है और उसे विधवा स्त्री की संज्ञा दिया है | यह सोचकर के उसका कोमल हृदय पुन: काँप उठा |   
           वह रात में स्वप्न देखती है कि उसका पति किसी दिव्य लोक में विराजमान है | वहाँ पर सरहद पर शहीद हुए वीरों का संसार है | वे सब ‘भारत माँ की जय हो’ के नारे लगा रहे है और अपनी शहादत पर खुशियाँ मना रहे है |
           स्वप्न में उसके पति ने उससे कहा – “प्रिये , तुम्हारा पति अमर लोक को प्राप्त हो चुका है | तुम विधवा नहीं हो बल्कि सौभाग्यवती हो | तत्क्षण उसका स्वप्न टूट जाता है और वह भूलोक में स्वयं को देखती है |

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