सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आदिकाल की प्रमुख रचनाएं

आदिकाल की प्रमुख रचनाएँ एवं उनके रचनाकार-----👇👇👇
➖➖➖➖➖➖➖➖
रासो काव्य⬇
>>>>>>>>>
पृथ्वीराज रासो- चन्दबरदाई
बीसलदेव रासो- नरपति नाल्ह
खुमान रासो- दलपत विजय
परमाल रासो- जगनिक
हम्मीर रासो- शारंगधर
विजयपाल रासो- नल्ह सिंह
जयचंद प्रकाश- भट्ट केदार
जयमयंक जसचंद्रिका- मधुकरकवि
----------------------------------------
सिद्ध साहित्य⬇
>>>>>>>>>>
दोहाकोष- सरहपा
चर्यापद- शबरपा
योगचर्या- डोम्भिपा
डोम्बिगीतिका- डोम्भिपा
अक्षरादि कोपदेश- डोम्भिपा
--------------------------------------
जैन साहित्य⬇
>>>>>>>>>
श्रावकाचार- देवसेन
लघुनयचक्र- देवसेन
दर्शनसार- देवसेन
भरतेश्वर बाहुबली रास- शालिभद्र सूरि
चन्दनबाला रास- आसुग कवि
स्थूलिभद्र रास- जिनधर्म सूरि
रेवंतगिरि रास- विजयसेन सूरि
नेमिनाथ रास- सुमति गणि
-------------------------------------
नाथ साहित्य⬇
>>>>>>>>>
प्राणलंकली- गोरखनाथ
आत्मबोध- गोरखनाथ
महीन्द्र गोरखबोध- गोरखनाथ
--------------------------------------
आदिकाल के अन्य कवि
एवं उनकी रचनाएँ⬇
>>>>>>>>>>>>>>>
पउमचरिउ- स्वयंभू
रिट्ठणेमि चरिउ- स्वयंभू
महापुराण- पुष्पदंत
णयकुमार चरिउ- पुष्पदंत
जसहर चरिउ- पुष्पदंत
भविष्यत कहा- धनपाल
संदेश रासक- अब्दुर्रहमान
उपदेश रसायन रास- जिनदत्त सूरि
शब्दानुशासन- हेमचन्द्र
कुमारपाल चरित- हेमचन्द्र
देशी नाम वाला- हेमचन्द्र
प्राकृत व्याकरण- हेमचन्द्र
पाहुड़ दोहा- रामसिंह
परमात्म प्रकाश- जोइन्दु
योगसार- जोइन्दु
उक्तिव्यक्ति प्रकरण- दामोदर शर्मा
खुसरो की पहेलियाँ- अमीर खुसरो
खालिकबारी- अमीर खुसरो
मुकरिया- अमीर खुसरो
दो सुखने- अमीर खुसरो
राउलवेल- रोडा
वर्णरत्नाकर- ज्योतिरीश्वर ठाकुर
नल दमयंती कथा- व्यास कवि
कीर्तिलता- विद्यापति
कीर्तिपताका- विद्यापति
विद्यापति पदावली- विद्यापति
कर्पूरमंजरी- राजशेखर

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हिन्दी साहित्य की कुछ मिलती जुलती नामों वाली रचनाएं

हिन्दी साहित्य की कुछ मिलती-जुलती नामों वाली रचनाएँ।।।। कफ़न (कहानी) प्रेमचंद   तिरंगे कफ़न (कहानी) अमृत राय कफ़न खोर (उपन्यास) बटरोही अपराजिता (काव्य)~रामेश्वर शुक्ल अंचल।। अपराजिता (उपन्यास)~चतुरसेन शास्त्री।। नीली झील (कहानी)~कमलेश्वर।। नीली झील (एकांकी)~धर्मवीर भारती अर्धनारीश्वर (उपन्यास)~विष्णु प्रभाकर अर्धनारीश्वर (निबंध)~दिनकर एक पति के नोट्स (उपन्यास)~महेंद्र भल्ला एक पत्नी के नोट्स (उपन्यास)~ममता कालिया एक कस्बे के नोट्स(उपन्यास)~नीलेशरघुवंशी त्रिशंकु (कथा संग्रह)~मन्नू भंडारी त्रिशंकु (नाटक)~ब्रजमोहनसिंह त्रिशंकु (निबंध)~अज्ञेय अनित्य (उपन्यास)~मृदुला गर्ग अनित्य (कहानी)~ बदी उज्जमा पंच परमेश्वर (कहानी)~प्रेमचंद पंच परमेश्वर (कहानी)~रांगेय राघव झूठा सच (उपन्यास)~यशपाल झूठ सच (निबंध)~सिया राम शरण गुप्त काली आँधी (उपन्यास)~कमलेश्वर पीली आँधी (उपन्यास)~प्रभाखेतान द्रौपदी (प्रबंध काव्य)~नरेंद्र शर्मा द्रौपदी (उपन्यास)~प्रतिभा राय द्रौपदी (नाटक)~सुरेंद्रवर्मा बाँधो न नाव इस ठाँव (उपन्यास)~उपेन्द्र नाथ अश्क बाँधो न नाव इस ठाँव (काव्य)~निराला सं...

सठोत्तरी कविता

 सन् साठ के बाद भारतीय जनता में निराशा की भावना बढ़ने लगी थी । समाज एवं राजनीति में चारों और हाहाकार मचा हुआ था । आम आदमी गरीबी, महंगाई आदि अनेक कारणों से शोषण की चक्की में पिसा जा रहा था । जिसके कारण जनमानस विचलित हो गया था । राजनीति के मूल्य विघटन ने भाई-भतीजावाद एवं कुर्सीवाद को प्रोत्साहन दिया । देश एवं आम आदमी के प्रगति करने की जगह राजनेता, सत्ताधारी अपनी तिजोरियाँ भरने लगे। सन् १९४७ में स्वतंत्रता के समय भारत-पाक बटवारा, शरणार्थियों की समस्या, सन् १९६२ में चीन से युद्ध, १९६५ और १९७१ में पाकिस्तान से हुए युद्धों के कारण भारत की आर्थिक स्थिति और दयनीय बनती गई । इन तीनों युद्धों ने भारत को एक महत्त्वपूर्ण सबक सिखलाया और हमारी अनेक कमजोरियों हमें अवगत कराया । वही दूसरी ओर राजनीतिक भ्रष्टाचार, सामाजिक कुरीतियाँ, पाखण्ड अंधश्रद्धा, उँच-नीच आदि के कारण देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी । चुनाव जीतने के समस्त नारे कुर्सी हथियाने के बाद खोखले साबीत हुए । इन परिस्थितियों ने युवा पीढ़ी में कुंठा, निराशा, विद्रोह और आक्रोश को भर दिया । जिसके साक्षात्कार हमें साठोत्तरी काव्य में ह...

समास

Samas(Compound)(समास) समास(Compound) की परिभाषा- अनेक शब्दों को संक्षिप्त करके नए शब्द बनाने की प्रक्रिया समास कहलाती है।  दूसरे अर्थ में-  कम-से-कम शब्दों में अधिक-से-अधिक अर्थ प्रकट करना 'समास' ...